NEET-UG पेपर लीक और दूसरी परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अपनी परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव कर रही है। एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने, उनकी जांच, अनुवाद और आंसर-की के सत्यापन जैसे कामों के लिए 5,000 से अधिक विशेषज्ञों को अपने पैनल में शामिल किया है। इसके साथ ही प्रश्नों का एक बड़ा साझा बैंक तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी एक व्यक्ति को परीक्षा में पूछे जाने वाले पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न हो।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये बदलाव अभी केवल NEET तक सीमित नहीं हैं। NTA देश की कई प्रमुख प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। इसलिए नई व्यवस्था का असर NEET-UG, JEE Main, CUET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
तीन साल के लिए होगा विशेषज्ञों का पैनल, स्थायी नियुक्ति नहीं
NTA ने स्पष्ट किया है कि इन विशेषज्ञों की नियमित या स्थायी नियुक्ति नहीं की जाएगी। उन्हें तीन साल के लिए विशेषज्ञों के पैनल में शामिल किया जाएगा। जरूरत और काम के आधार पर उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाएंगी। पैनल में शामिल होने का मतलब यह भी नहीं है कि हर विशेषज्ञ को निश्चित संख्या में काम या मानदेय मिलेगा।
एजेंसी ने इस पैनल के लिए शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, अनुवादकों और अन्य पेशेवरों से आवेदन मांगे थे। विशेषज्ञों को प्रश्न तैयार करने, दूसरे विशेषज्ञों के बनाए सवालों की जांच करने, प्रश्नों का अनुवाद करने, आंसर-की से जुड़ी आपत्तियों की समीक्षा करने और प्रश्न बैंक को अपडेट करने जैसे काम सौंपे जा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के तहत नए विशेषज्ञों को जोड़ने का काम जारी है।
पेपर लीक रोकने के लिए तैयार होगा बड़ा क्वेश्चन बैंक
NTA एक बड़ा और साझा प्रश्न बैंक तैयार कर रहा है। इसमें अलग-अलग विषयों और कठिनाई स्तरों के प्रश्न जमा किए जाएंगे। योजना यह है कि प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों और अनुवादकों को यह जानकारी न हो कि उनके बनाए सवाल किस परीक्षा में इस्तेमाल होंगे। इस तरह किसी एक व्यक्ति के पास परीक्षा में पूछे जाने वाले पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी नहीं होगी।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि NTA प्रश्न बैंक पर काम शुरू कर चुका है। इस व्यवस्था में परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले प्रश्नों का चयन कर प्रश्नपत्र तैयार करने की योजना है। इससे प्रश्नपत्र के पहले से लीक होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह व्यवस्था पेपर लीक की संभावना को पूरी तरह खत्म कर देगी, ऐसा दावा करना अभी जल्दबाजी होगी।
विशेषज्ञों के चयन के लिए चार स्तर पर होगी जांच
NTA ने विशेषज्ञों को पैनल में शामिल करने के लिए चार स्तर की जांच प्रक्रिया अपनाई है। सबसे पहले आवेदक की शैक्षणिक योग्यता, पात्रता और अनुभव से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसके बाद विशेषज्ञ समिति आवेदक की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्य और प्रश्नपत्र तैयार करने के अनुभव का मूल्यांकन करती है। इसके बाद पृष्ठभूमि और अन्य जरूरी जानकारियों की जांच की जाती है।
इस प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा कोचिंग संस्थानों से जुड़ाव की जांच भी है। NTA के नियमों के अनुसार, विशेषज्ञ का किसी कोचिंग संस्थान, परीक्षा की तैयारी कराने वाली कंपनी या ऑनलाइन-ऑफलाइन ट्यूशन प्लेटफॉर्म से सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं होना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे संस्थानों के साथ व्यावसायिक संबंध और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री तैयार करने के अनुभव की जानकारी भी देनी होगी।
चुने गए विशेषज्ञों को गोपनीयता समझौते (NDA) पर हस्ताक्षर करने होंगे। हर नए काम की शुरुआत में उन्हें इस समझौते की शर्तों की दोबारा पुष्टि भी करनी होगी।
पहले करीब 600 विशेषज्ञों को पैनल से हटाया गया
NTA ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के तहत अगस्त 2026 में अपने पुराने पैनल से करीब 600 विषय विशेषज्ञों को हटा दिया था। इसके बाद नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। एजेंसी ने प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार स्तर की व्यवस्था लागू करने की भी बात कही थी। ये कदम NEET-UG पेपर लीक और UGC-NET सहित कुछ परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद उठाए गए हैं।
NEET, JEE और CUET समेत कई परीक्षाओं पर पड़ेगा असर
NTA देश की कई बड़ी प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। इनमें NEET-UG, JEE Main, CUET-UG, CUET-PG, UGC-NET और CSIR-NET शामिल हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के नए पैनल और साझा प्रश्न बैंक की व्यवस्था का संबंध इन परीक्षाओं की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से है।
छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि फिलहाल सामने आई जानकारी मुख्य रूप से प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी गोपनीयता मजबूत करने से जुड़े बदलावों के बारे में है। इससे NEET या दूसरी परीक्षाओं के सिलेबस, परीक्षा पैटर्न या अंक व्यवस्था में बदलाव की घोषणा नहीं मानी जानी चाहिए। NTA की ओर से ऐसे किसी बदलाव की अलग से पुष्टि होने पर ही उसे अंतिम जानकारी माना जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, NTA की कोशिश प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और किसी एक विशेषज्ञ या व्यक्ति पर निर्भरता कम करने की है। इन बदलावों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा व पारदर्शिता कितनी बेहतर होती है।




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