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बीपी कंट्रोल के लिए दो दवाओं का मिश्रण पांच गुना ज्यादा असरदार, शोध में हुआ खुलासा 

देश की आबादी में बढ़ते रक्तचाप के प्रसार के बीच अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन सामने आया है जो उच्च रक्तचाप प्रबंधन में एक अहम भूमिका निभा सकता है। इसके अनुसार, बीपी यानी रक्तचाप कंट्रोल के लिए दो दवाओं का मिश्रण पांच गुना तक ज्यादा असरदार है। अभी तक रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए मरीज एकल खुराक लेते हैं।

शिकागो में बीते दिनों अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिक सत्र में जारी यह अध्ययन भारत के 35 अस्पतालों में 30 से 79 वर्ष के 1,981 मरीजों पर हुआ है। साल 2022 से 2024 के बीच नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के इस अध्ययन में अमेरिका के सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल (सीसीडीसी) और लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने सहयोग किया है। 

टॉपस्पिन नामक इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने छह दवाओं के तीन मिश्रण का परीक्षण किया है। इनमें एम्लोडिपिन व पेरिंडोप्रिल, एम्लोडिपिन व इंडैपामाइड और पेरिंडोप्रिल व इंडैपामाइड दवाओं का मिश्रण शामिल है। अध्ययन में पता चला कि जांच के दौर से गुजर रहे लगभग 70 फीसदी रोगियों में अनियंत्रित रक्तचाप कुछ ही समय बाद नियंत्रण में आने लगा। दवाओं के ये संयोजन रक्तचाप को कम करने में समान रूप से प्रभावी और सुरक्षित हैं।

1,981 रोगियों में से 55 फीसदी रोगियों ने बताया कि वह बीपी के लिए दिन में एक गोली का सेवन कर रहे हैं। पंजीयन के वक्त और उसके बाद डॉक्टरों ने इनका बीपी मापा और फिर इन्हें मिश्रित दवाओं की खुराक देनी शुरू की। इसके बाद दो, चार और छह महीने तक रोगियों की निगरानी की। डॉक्टरों ने जब 24 घंटे चलने वाले बीपी मॉनिटर के जरिये मापा तो लगभग 14/8 मिमी और क्लिनिक में मापने पर 30/14 मिमी उच्च रक्तचाप में कमी आई।

दिल्ली एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर व इस अध्ययन के प्रमुख जांचकर्ताओं में से एक डॉ. अंबुज रॉय का कहना है कि उच्च रक्तचाप को लेकर यह अध्ययन एक बड़े बदलाव का जरिया बन सकता है। कौन सा संयोजन सबसे अच्छा काम करता है और सबसे सुरक्षित है अब इसके वैज्ञानिक साक्ष्य हमारे पास हैं।

सीडीसी के कार्यकारी निदेशक और अध्ययन के प्रमुख जांचकर्ताओं में से एक डॉ. दोराई राज प्रभाकरन का कहना है कि हमारे पास अब नए सबूत मौजूद हैं। डॉक्टर अब इनमें से किसी भी मिश्रण को अपनी प्रैक्टिस में शामिल कर सकते हैं। इसके परिणाम काफी बेहतर हैं।

दरअसल, भारत में उच्च रक्तचाप मृत्यु दर और विकलांगता के लिए एक अहम कारणों में से एक है। हाल ही में आईसीएमआर का जारी राष्ट्रीय सर्वे बताता है कि भारत की करीब 30 फीसदी आबादी रक्तचाप की परेशानी से प्रभावित है, जिनकी संख्या करीब 40 करोड़ से भी अधिक है।

Asmita Sarkar

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