
कोविड-19 महामारी की शुरुआत और इसके असर पर अमेरिकी कांग्रेस की जांच दो साल बाद पूरी हो गई है। रिपोर्ट ने कोविड-19 से निपटने के लिए अपनाए गए कई उपायों पर सवाल उठाए हैं। मास्क पहनने को वायरस के फैलाव रोकने में “अप्रभावी” बताया गया है। लॉकडाउन से हुई आर्थिक और मानसिक समस्याओं को इससे ज्यादा नुकसानदायक कहा गया। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के छह फुट के नियम को भी “वैज्ञानिक रूप से आधारहीन” बताया गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोविड-19का कारण बने वायरस सार्स कोव-2 की शुरुआत चीन के वुहान की एक लैब से हुई। इसे गेन ऑफ फंक्शन नाम की रिसर्च के जरिए बनाया गया था। इस रिसर्च में वायरस को और खतरनाक बनाया जाता है ताकि उसकी रोकथाम के तरीके खोजे जा सकें। 520 पन्नों की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने वुहान लैब की गेन ऑफ फंक्शन रिसर्च को फंड किया था। इस मुद्दे ने अमेरिका में वैज्ञानिक शोध पर निगरानी को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
रिपोर्ट ने ऑपरेशन वार्प स्पीड की तारीफ की है। यह ट्रंप प्रशासन की पहल थी, जिसमें वैक्सीन जल्दी विकसित की गई। इसे “बहुत बड़ी सफलता” बताया गया है। स्कूलों को बंद करने के फैसले पर रिपोर्ट ने चिंता जताई है। इसका बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर होने की बात कही गई है । जांच समिति के अध्यक्ष ब्रैड वेनस्ट्रप ने कहा, “इस काम का मकसद है कि अगली महामारी को रोका जा सके और अगर ऐसी स्थिति आए, तो देश तैयार हो।” उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा लौटाने के लिए ईमानदारी और पारदर्शिता जरूरी है।
रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब कोविड-19 के पहले मामले सामने आए हुए पांच साल हो चुके हैं। यह महामारी अमेरिका में 11 लाख लोगों की जान ले चुकी है और पूरी दुनिया पर गहरा असर छोड़ा है। एशिया में इस महामारी के कारण करोड़ों लोग गरीबी के मुंह में चले गए।
इस रिपोर्ट पर इस हफ्ते वोटिंग होनी है। यह देखना बाकी है कि क्या इससे नई नीतियां बनेंगी। रिपोर्ट ने अमेरिकी रिसर्च फंडिंग और स्वास्थ्य संकटों के दौरान एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया है।
हालांकि, इस जांच की रिपोर्ट ने महामारी की शुरुआत और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर बहस को और तेज कर दिया है। यह रिपोर्ट सवाल उठाती है कि अगली महामारी के लिए दुनिया कितनी तैयार है। जवाब ढूंढने की कोशिश जारी है।




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