
महाराष्ट्र के कई शहरों में गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के बढ़ते मामलों ने लोगों को डरा दिया है। महाराष्ट्र पहले से ही बर्ड फ्लू के संक्रमण से परेशान था, इसी बीच जीबीएस की एंट्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। इम्युनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्डर गिलियन बैरे सिंड्रोम का प्रकोप सबसे ज्यादा पुणे में देखा जा रहा है, जहां प्रभावितों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है जिनमें से 68 पुरुष और 33 महिलाएं शामिल हैं।
गिलियन बैरे सिंड्रोम से पुणे में एक मरीज मौत भी हो गई है, जो महाराष्ट्र में इस बीमारी से होने वाली पहली संदिग्ध मौत है। पुणे में विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे इन 100 से अधिक मरीजों में से करीब 16 वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि करीह 19 मरीज 9 वर्ष से कम उम्र के और करीब 10 मरीज 65-80 की आयु वाले हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ये बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को प्रभावित कर रही है।
महाराष्ट्रे के कई हिस्सों में बढ़ती इस बीमारी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये कोई नई संक्रामक बीमारी है? आखिर ये बीमारी कैसे बढ़ रही है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
दरअसलजून 2021 में जब कोविड की दूसरी लहर चल रही थी उसी दौरान कई देशों में गिलियन बैरे सिंड्रोम के मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई थी। वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में बताया था कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स के रूप में कुछ लोगों में गुलियन-बैरे सिंड्रोम की समस्या देखी जा रही है। हालांकि बाद में कुछ अन्य अध्ययनों में वैक्सीनेशन के इस दुष्प्रभाव को नकारा गया था।
गिलियन बैरे सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं पर अटैक कर देती है। इस वजह से मरीजों को कमजोरी, सुन्न होने या फिर लकवा मारने जैसे दिक्कतें हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ जीबीएस की समस्या को मेडिकल इमरजेंसी के तौर पर देखते हैं, जिसमें रोगी को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इलाज न मिलने पर जान जाने का भी खतरा हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट पर नजर डालें तो पता चलता है कि दुनियाभर में हर साल लगभग एक लाख लोगों को ये समस्या होती है, हालांकि ये दिक्कत क्यों होती है इसका सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। अगर समय पर रोग का इलाज हो जाए तो इससे आसानी से ठीक हो सकते हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक ये बीमारी आपके पेरीफेरल नर्वस को अटैक करती है। ये तंत्रिकाएं मांसपेशियों की गति, शरीर में दर्द के संकेत, तापमान और शरीर को छूने पर होने वाली संवेदनाओं का एहसास कराती हैं। इन तंत्रिकाओं को होने वाली क्षति के कारण आपको कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
– हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास।
– पैरों में कमजोरी जो शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैल सकती है।
– चलने या सीढ़ियां में असमर्थ होना।
– बोलने, चबाने या निगलने में परेशानी होना।
– पेशाब पर नियंत्रण न रह जाना या हृदय गति का बहुत बढ़ जाना।
गिलियन बैरे सिंड्रोम या जीबीएस एक इम्युनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्डर है। इस बीमारी में अचानक से हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी के लक्षणों में कमजोरी, डायरिया आदि शामिल हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण के चलते जीबीएस की समस्या हो रही है। इससे मरीज की इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। बच्चे और युवा इस बीमारी से ज्यादा ग्रस्त हो रहे हैं। हालांकि अच्छी बात ये है कि इलाज के बाद मरीज ठीक हो रहे हैं। सरकार ने लोगों से पीने का पानी साफ रखने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। साथ ही लोगों को अपने खाने में साफ-सफाई रखने और सब्जियों को अच्छी तरह से उबालकर खाने की सलाह जारी की है।




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