
तपेदिक यानी Tuberculosis (TB) एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही अधिकांश लोग घबराने लगते हैं। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु के कारण होती है और इसे क्षय रोग भी कहा जाता है। भारत में हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। हालांकि, अब टीबी लाइलाज नहीं है, और इसे समय पर इलाज से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
वर्ल्ड टीबी डे हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है। वर्ल्ड टीबी डे को मनाने का मुख्य उद्देश्य टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) के प्रति लोगों में जागरूकता लाना और टीबी के नियंत्रण की दिशा की जा रही उपलब्धियों को याद दिलाता है। इस दिन को विशेष रूप से उन प्रयासों की सराहना के रूप में भी मनाया जाता है, जो वैश्विक स्तर पर टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए किए जा रहे हैं। इसे विश्व तपेदिक दिवस भी कहा जाता है। आज इस खास मौके पर, हम आपको टीबी से जुड़ी कुछ आम गलतफहमियों के बारे में बताएंगे जो आज भी लोगों में फैली हुई हैं।
पहली गलतफहमी – टीबी फेफड़ों की बीमारी है
कई लोग यह मानते हैं कि टीबी केवल फेफड़ों की बीमारी है, लेकिन सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निष्ठा सिंह के अनुसार, टीबी किसी भी शरीर के अंग को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, फेफड़ों में होने वाली टीबी सबसे सामान्य है, और यही वजह है कि दुनिया भर में करीब 70 फीसदी टीबी के मामले फेफड़ों से जुड़े होते हैं। जब टीबी फेफड़ों को प्रभावित करती है, तो इसे पल्मोनरी टीबी कहा जाता है, जबकि अन्य अंगों में होने पर इसे एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है।
दूसरी गलतफहमी – टीबी संक्रामक होती है
यह सही नहीं है कि सभी प्रकार की टीबी संक्रामक होती है। केवल पल्मोनरी टीबी यानी फेफड़ों वाली टीबी संक्रामक होती है। यह बीमारी तब फैलती है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, जिससे बैक्टीरिया हवा के माध्यम से दूसरों तक पहुंच सकते हैं। वहीं, एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी संक्रामक नहीं होती क्योंकि यह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती है।
तीसरी गलतफहमी – टीबी लाइलाज है
आज भी कई लोग मानते हैं कि टीबी का इलाज नहीं हो सकता और यह बीमारी कभी ठीक नहीं होती। यह पूरी तरह से गलत है। अगर समय रहते इसका पता चल जाए और सही इलाज किया जाए, तो टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। टीबी का इलाज एक निश्चित समय के कोर्स के माध्यम से किया जाता है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होती। सामान्यतः, टीबी का इलाज छह से नौ महीने तक चलता है, जबकि गंभीर मामलों में यह 18 से 24 महीने भी हो सकता है।
विश्व टीबी दिवस का इतिहास
आज सारी दुनिया वर्ल्ड टीबी डे मना रही है, तब इस दिन का इतिहास और महत्व (World Tuberculosis Day 2025 Theme History and Importance) जानना जरूरी है। इस बीमारी के बारे में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस (World Tuberculosis Day) मनाया जाता है।
24 मार्च 1882 को डॉ. रॉबर्ट कोच ने टीबी के कारण बनने वाले माइक्रोबैक्टीरियल ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium Tuberculosis) बैक्टीरिया की खोज की थी। यह खोज टीबी के इलाज में क्रांतिकारी साबित हुई। डॉ. कोच की इस महत्वपूर्ण खोज के कारण उन्हें 1905 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस खोज के बाद से, टीबी के खिलाफ जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से 24 मार्च की तारीख को चुना गया और इसे विश्व तपेदिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।




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