
सर्जरी के दौरान आध्यात्मिक संगीत मरीजों के मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में प्रभावी साबित होता है। यह निष्कर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 150 मरीजों पर कराए गए एक अध्ययन से सामने आया है। यह अध्ययन झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने किया, जिसे अमेरिकी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल क्यूरस में प्रकाशित किया गया है।
अध्यान के अनुसार, इन 150 मरीजों को सर्जरी के लिए भर्ती किया गया था और उन्हें दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को आध्यात्मिक संगीत सुनने को दिया गया, जबकि दूसरे समूह को मरीज द्वारा चुने गए वाद्य संगीत सुनने के लिए दिया गया। शोध में यह पाया गया कि जिन मरीजों ने हिंदू आध्यात्मिक संगीत सुना, उनमें तनाव और चिंता में महत्वपूर्ण कमी पाई गई। ऑपरेशन के बाद उल्टी और जी मिचलाने की घटनाएं भी कम हुईं, और मरीजों की संतुष्टि का स्तर भी अधिक था।
सर्जरी के दौरान हृदय गति और रक्तचाप का नियंत्रण भी बेहतर पाया गया। तनाव से संबंधित जैविक संकेतक, जैसे कोर्टिसोल के स्तर में भी सकारात्मक गिरावट देखी गई, जो यह सिद्ध करता है कि यह विधि केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
शोध दल के चिकित्सकों का कहना है कि जब मरीज तकलीफ में होते हैं, तो वह अपनी आस्था से गहरे तौर पर जुड़ जाते हैं। ऐसे समय में आध्यात्मिकता, खासकर हिंदू धर्म में प्रयुक्त संगीत, एक प्रभावी चिकित्सीय उपाय बन सकता है। इस अध्ययन में प्रमुख भक्ति गीतों में ॐ गण गणपतये नमः, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, गायत्री मंत्र, रघुपति राघव राजा राम, महामृत्युंजय मंत्र, ॐ जय जगदीश हरे, हनुमान चालीसा (धीमी गति में), हरे राम हरे कृष्ण मंत्र जैसे गीत शामिल थे।




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