
भारत से बाहर जाकर MBBS करना छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। हर साल हजारों भारतीय स्टूडेंट्स डॉक्टर बनने का सपना लेकर रूस, ईरान समेत कई देशों में पढ़ाई के लिए जाते हैं। हालांकि, भारत लौटने के बाद उन्हें फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना अनिवार्य होता है। यह परीक्षा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) आयोजित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेशी डॉक्टर भारत के मेडिकल मानकों पर खरे उतरें।
लेकिन अच्छी खबर यह है कि कुछ देशों से डिग्री लेने पर भारत में सीधे प्रैक्टिस की इजाजत मिलती है और FMGE देना जरूरी नहीं होता। आइए जानते हैं कौन से हैं ये देश और वहां की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था कैसी है।
1. अमेरिका (USA)
यहां MBBS की जगह Doctor of Medicine (MD) की डिग्री दी जाती है। प्रवेश से पहले चार साल का ग्रेजुएशन पूरा करना पड़ता है। इसके बाद चार साल का MD प्रोग्राम होता है (2 साल थ्योरी + 2 साल क्लीनिकल ट्रेनिंग)। कुल मिलाकर डॉक्टर बनने में लगभग 8 साल लगते हैं। अमेरिका की डिग्री भारत में मान्य है और FMGE देने की जरूरत नहीं।
2. ब्रिटेन (UK)
यहां भारत की तरह MBBS डिग्री दी जाती है, जिसकी अवधि 5-6 साल होती है।शुरुआत से ही छात्रों को क्लीनिकल ट्रेनिंग दी जाती है। ज्यादातर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) अस्पतालों में होती है। भारतीय छात्र इसे पसंद करते हैं क्योंकि शिक्षा प्रणाली भारत से काफी मिलती-जुलती है।
3. कनाडा (Canada)
यहां भी डॉक्टर बनने में लगभग 8 साल लगते हैं। पहले चार साल का ग्रेजुएशन और फिर मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट MCAT पास करना जरूरी है। MD प्रोग्राम में शुरुआती दो साल थ्योरी और अंतिम दो साल क्लीनिकल ट्रेनिंग होती है। कनाडा की मेडिकल डिग्री भारत में मान्य है।
4. ऑस्ट्रेलिया (Australia)
यहां दो रास्तों से मेडिकल शिक्षा मिलती है:
अंडरग्रेजुएट एंट्री: 5-6 साल का BMed/MD प्रोग्राम।
ग्रेजुएट एंट्री: बैचलर्स के बाद MD प्रोग्राम (प्रवेश के लिए GAMSAT टेस्ट जरूरी)।
पाठ्यक्रम में थ्योरी और क्लीनिकल ट्रेनिंग दोनों का संतुलित मिश्रण होता है।
5. न्यूज़ीलैंड (New Zealand)
यहां डॉक्टर बनने में लगभग 6 साल लगते हैं। शुरुआत एक वर्षीय फाउंडेशन प्रोग्राम से होती है। इसके बाद प्री-क्लीनिकल और क्लीनिकल फेज में छात्रों को अस्पतालों में ट्रेनिंग दी जाती है। यहां की डिग्री MBChB कहलाती है, जो MBBS के बराबर मानी जाती है।
इन पांच देशों—अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड—से मेडिकल डिग्री लेने वाले भारतीय छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए FMGE एग्जाम पास करने की जरूरत नहीं पड़ती।




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