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स्वास्थ्य सेवा: एक पेशा नहीं, बल्कि एक पुकार

स्वास्थ्य सेवा केवल करियर नहीं, बल्कि एक पुकार है—समर्पण, त्याग, जुनून, उद्देश्य और ज़िम्मेदारी की ऐसी यात्रा जो वेतन से कहीं आगे तक जाती है। भारत के स्वास्थ्यकर्मियों—चाहे वे डॉक्टर हों, नर्स हों या सहयोगी पेशेवर—का नजरिया साबित करता है कि उनके लिए जीवन बचाना व्यक्तिगत लाभ या भौतिक फायदे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

भारतीय डॉक्टरों की भावना
भारत में अनगिनत उदाहरण हैं जब डॉक्टरों ने अपने आराम और जीवन तक को दांव पर लगाकर मरीजों की जान बचाई। हाल ही में इंडिगो फ्लाइट में आर्मी फिजिशियन मेजर सिमरत राजदीप सिंह ने गंभीर रूप से बीमार यात्री को पुनर्जीवित कर सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। यह काम उन्होंने न तो शोहरत के लिए किया और न ही पैसों के लिए, बल्कि अपने कर्तव्यनिष्ठ भाव से किया। एक और घटना में, एक डॉक्टर ने ऑपरेशन थिएटर में बेहोश होने के बाद भी खुद को पैर से ड्रिप लगाई ताकि सर्जरी बीच में न रुके और मरीज की जान बचाई जा सके। इसी तरह, एआईआईएमएस के डॉक्टरों ने एक वाणिज्यिक उड़ान में दो साल की बच्ची की जान बचाने के लिए दबाव की स्थिति में मिलकर काम किया। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि उनके लिए सेवा और उपचार का जुनून स्वार्थ से ऊपर है।

नर्सें: संकट में साहस की मिसाल
स्वास्थ्य सेवा के त्याग को हाल ही में सबसे जीवंत रूप में देखा गया असम के आदित्य अस्पताल में सितंबर 2025 के भूकंप के दौरान। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें देखा गया कि जब जोरदार झटकों से अस्पताल की इमारत हिलने लगी, तो एनआईसीयू की दो नर्सें नवजात शिशुओं को बचाने के लिए तुरंत उन पर ढककर लेट गईं, बजाय इसके कि वे खुद अपनी जान बचाने के लिए भागें। उनकी पहली प्रतिक्रिया खुद को बचाना नहीं बल्कि उन मासूमों को सुरक्षित करना था। इस निस्वार्थ साहसिक कदम के लिए उन्हें पूरे देश से आशीर्वाद मिल रहा है और लोग उन्हें “सच्ची भारतीय नर्सें” कह रहे हैं।

सहयोगी स्वास्थ्यकर्मियों का महत्व
स्वास्थ्य सेवा केवल डॉक्टरों और नर्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी टीम का सामूहिक प्रयास है। फिजियोथेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डाइटिशियन और ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट जैसे सहयोगी पेशेवर मरीजों की रिकवरी, पुनर्वास, डायग्नोसिस और नियमित देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं। ये न केवल अस्पतालों में मददगार होते हैं बल्कि ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को पूरा करने में भी योगदान देते हैं। उनकी मेहनत डॉक्टरों और नर्सों के काम को और प्रभावी बनाती है और मरीजों के लिए बेहतर देखभाल का माहौल तैयार करती है।

स्वास्थ्य सेवा को स्थापित करने वाली मूल्य प्रणाली
ये सभी उदाहरण साबित करते हैं कि स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि एक पुकार है, जो प्रेरित होती है:
– रोगियों के प्रति दया और संवेदना से, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।
– समाज के प्रति गहरी ज़िम्मेदारी से, विशेषकर संकट के समय।
– मरीजों और उनके परिवारों को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बनाने की इच्छा से।
– लंबे समय तक काम करने, जोखिम उठाने और त्याग करने की तत्परता से।

स्वास्थ्य सेवा सेवा, त्याग और सही कार्य करने के सिद्धांतों पर आधारित एक पेशा है। चाहे डॉक्टर अस्पताल से बाहर भी आवश्यक ऑपरेशन करें, नर्सें आपदा में मासूमों की जान बचाएं या सहयोगी पेशेवर गाँव-शहर में लोगों तक उपचार पहुँचाएं—ये सभी मिलकर एक ऐसा समाज गढ़ते हैं जो हर दिन और अधिक मानवीय और स्वस्थ होता जाता है।

Asmita Sarkar

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