
राष्ट्रीय सहायक एवं स्वास्थ्य पेशेवर आयोग (NCAHP) भारत में स्वास्थ्यसेवा शिक्षा (healthcare education), प्रशिक्षण और पंजीकरण की नई दिशा तय कर रहा है। जानिए कैसे यह आयोग देशभर में स्वास्थ्य पेशों को एकीकृत और मानकीकृत बना रहा है।
NCAHP (National Commission for Allied and Healthcare Professionals) का उद्देश्य
राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्यसेवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय सहायक एवं स्वास्थ्य पेशेवर आयोग (NCAHP) का गठन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है — स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों की दक्षता, योग्यता और व्यावसायिकता को सुनिश्चित करना।
यह आयोग उन स्वास्थ्यकर्मियों को नियंत्रित करता है जो अन्य परिषदों जैसे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) या भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) के अधीन नहीं आते।
NCAHP की प्रमुख श्रेणियाँ
NCAHP ने सहयोगी एवं स्वास्थ्यसेवा व्यवसायों को 10 प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है —
– मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज
– फिजियोथेरेपी
– न्यूट्रिशन साइंस
– ऑक्यूपेशनल थेरेपी
– मेडिकल रेडियोलॉजी
– हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट
– और अन्य संबंधित स्वास्थ्य व्यवसाय
इसका उद्देश्य है सभी सहायक स्वास्थ्य पेशों को एक ही नियामक ढाँचे के अंतर्गत लाना ताकि देशभर में एक समान मानक स्थापित हो सके।
NCAHP के प्रमुख कार्य
आयोग के कुछ मुख्य कार्य इस प्रकार हैं —
– पाठ्यक्रम की योजना और संचालन
– शैक्षणिक संस्थानों का मान्यता प्रदान करना
– स्वास्थ्य पेशेवरों का पंजीकरण और प्रबंधन
– सतत् व्यावसायिक विकास (Continuing Professional Development) कार्यक्रमों का आयोजन
प्रत्येक स्वास्थ्य पेशेवर को हर पाँच वर्ष में पंजीकरण का नवीनीकरण करना आवश्यक है। इसके लिए उन्हें अपने कौशल को अद्यतन रखना और नए प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है, ताकि गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा दी जा सके।
नई शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम सुधार
NCAHP ने शैक्षणिक सत्र 2026–2027 से दस सहयोगी स्वास्थ्य पेशों के लिए दक्षता-आधारित नया पाठ्यक्रम (Competency-based Curriculum) लागू करने की घोषणा की है।
विश्वविद्यालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों को आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार बोर्ड ऑफ स्टडीज़ का गठन करना होगा, जबकि राज्य सरकारें और परिषदें इसके अनुपालन की निगरानी और प्रगति रिपोर्टिंग करेंगी।
पंजीकरण से जुड़ी नई व्यवस्था
आयोग ने पेशेवरों के लिए पंजीकरण संबंधी मसौदा नियमावली भी जारी की है, जिसमें राज्य परिषद और केंद्रीय रजिस्टर दोनों में पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद पेशेवरों को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) मिलेगा, जिससे वे पूरे भारत में अभ्यास कर सकेंगे। अनौपचारिक योग्यताओं वाले उम्मीदवारों के लिए अस्थायी पंजीकरण (Provisional Registration) की सुविधा उपलब्ध है। अपील, नवीनीकरण और पंजीकरण में विफलता पर दंड से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नया परिवर्तन
अपने नियमन, पाठ्यक्रम सुधार और व्यावसायिक विकास नीतियों के ज़रिए NCAHP भारत के सहयोगी एवं स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र को अधिक संगठित, जिम्मेदार और आधुनिक बनाने की दिशा में अग्रसर है।
यह पहल देशभर में एक एकीकृत, पारदर्शी और मानकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे न केवल पेशेवरों बल्कि मरीजों को भी उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त होंगी।




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