
भारत में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में हर नौवां व्यक्ति किसी न किसी संक्रमण से पीड़ित है। यह तथ्य स्वास्थ्य प्रणाली और नीति निर्माताओं के लिए गंभीर चेतावनी है।
पिछले कुछ वर्षों में जहां कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ाया है, वहीं संक्रामक रोगों (Infectious Diseases) की बढ़ती दर ने नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेष रूप से शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संक्रमण का प्रसार अधिक तेजी से देखा जा रहा है।
ICMR रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
ICMR ने देशभर से 4.5 लाख रोगियों के सैंपल टेस्ट किए। इनमें से 11.1 प्रतिशत में संक्रामक संक्रमण की पुष्टि हुई। इन रोगियों में से कई को एक्यूट या जानलेवा बीमारियों से जूझते पाया गया।
सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए पांच प्रमुख रोगाणु (Pathogens) निम्न हैं:
- इन्फ्लूएंजा ए वायरस – तीव्र श्वसन संक्रमण का कारण
- डेंगू वायरस – रक्तस्रावी बुखार और प्लेटलेट्स में गिरावट
- हेपेटाइटिस ए वायरस – पीलिया और लिवर से जुड़ी समस्याएं
- नोरोवायरस – दस्त और उल्टी जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस लक्षण
- हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV) – इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च 2025 की पहली तिमाही में संक्रमण दर 10.7% थी, जो अप्रैल से जून 2025 में बढ़कर 11.5% हो गई। यानी केवल तीन महीनों में संक्रमण दर में 0.8 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
वायरस रिसर्च नेटवर्क से मिले संकेत
ICMR के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (VRDL) नेटवर्क के अनुसार, जनवरी–मार्च 2025 के बीच 2.28 लाख सैंपलों में से 24,502 पॉजिटिव पाए गए।अप्रैल–जून 2025 में 2.26 लाख सैंपलों में से 26,055 में संक्रमण मिला।
इन परिणामों से साफ है कि संक्रमण का प्रसार मौसमी बदलावों और पर्यावरणीय कारणों से जुड़ा हुआ है, जो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य तंत्र पर और बोझ डाल सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
ICMR के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वृद्धि भले ही “अत्यधिक” न लगे, लेकिन इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। एक वरिष्ठ विषाणु विज्ञानी ने कहा, “यह मौसमी बीमारियों और उभरते संक्रमणों की चेतावनी है। अगर हम तिमाही दर तिमाही संक्रमण के रुझानों की निगरानी करते रहें, तो भविष्य में किसी महामारी को रोकना संभव हो सकता है।”
अप्रैल से जून 2025 के बीच किए गए अध्ययनों में 191 रोग समूहों की जांच की गई, जिनमें मम्पस, खसरा, रूबेला, चिकनगुनिया, रोटावायरस, वैरिसेला जोस्टर वायरस, एपस्टीन-बार वायरस (EBV) और एस्ट्रोवायरस जैसी बीमारियों की भी पहचान हुई।
क्यों बढ़ रही हैं संक्रामक बीमारियां?
विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमणों में वृद्धि के पीछे मानवीय और पर्यावरणीय दोनों कारण हैं:
– तेजी से बढ़ता शहरीकरण और असंतुलित जनसंख्या घनत्व
– जलवायु परिवर्तन और इसके चलते वायरसों की अनुकूल वृद्धि
– अस्वच्छ जीवनशैली और अपर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं
– मानव-पशु संपर्क और जीव-जंतुओं से फैलने वाले रोग
– कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली और प्रारंभिक पहचान की कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो भविष्य में नई महामारियों का खतरा टाला नहीं जा सकेगा।
क्या जरूरी है अब?
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को “एक चेतावनी संकेत” मानते हैं। उनका कहना है कि भारत को न केवल संक्रामक रोगों की निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाना होगा, बल्कि स्वच्छता, टीकाकरण और जनजागरूकता अभियानों को भी और प्रभावी बनाना होगा।
इसके साथ ही, राज्यों को अपने स्तर पर महामारी पूर्व-नियोजन (Preparedness Plans) पर काम करना चाहिए ताकि संक्रमण के शुरुआती चरण में ही उसे रोका जा सके।
ICMR की यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि भारत को संक्रामक बीमारियों के खिलाफ अपनी रणनीति और निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा। बढ़ती आबादी, बदलती जलवायु और सीमित स्वास्थ्य संसाधनों के बीच यह चुनौती और जटिल होती जा रही है। यदि अभी से व्यापक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का बड़ा कारण बन सकता है।




Add comment