
नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने देशभर में बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) और बीओटी (बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी) कोर्स में दाखिले के लिए NEET UG स्कोर को अनिवार्य कर दिया है। यह व्यवस्था अकादमिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। आयोग ने इस संबंध में नोटिस जारी करने के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पत्र भेजकर योग्यताओं और प्रक्रिया का पूरा विवरण दे दिया है।
कुछ महीने पहले NCAHP ने पैरामेडिकल के 13 कोर्सों में नीट को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अब अंतिम निर्णय के तहत केवल बीपीटी और बीओटी को ही नीट के दायरे में शामिल किया गया है।
नीट यूजी से किन कोर्सों में होती है अभी भर्ती
NTA हर साल NEET UG परीक्षा आयोजित करता है, जिसके आधार पर देशभर में निम्न कोर्सों में दाखिले दिए जाते हैं:
– MBBS
– BAMS
– BUMS
– BSMS
– BHMS
– BDS
– BVSc & AH
इसके अलावा कई संस्थानों में B.Sc Nursing में भी नीट स्कोर के आधार पर प्रवेश होता है।
13 कोर्सों में होना था दाखिला नीट से, पर अब सिर्फ दो पर लागू
पहले जिन कोर्सों को नीट में शामिल करने की चर्चा थी, उनमें शामिल थे:
– फिजियोथेरेपी (BPT)
– इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी
– बर्न केयर टेक्नोलॉजी
– एडवांस केयर पैरामेडिक
– ऑक्यूपेशनल थेरेपी
– मेडिकल लैब साइंसेज
– एप्लाइड साइकोलॉजी व बिहेवियरल हेल्थ
– ऑप्टोमेट्री
– न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स
– डायलिसिस टेक्नोलॉजी
– रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी
– मेडिकल रेडियोलॉजी व इमेजिंग
– एनेस्थीसिया व ओटी टेक्नोलॉजी
– हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट
– फिजिशियन एसोसिएट्स
अब इनमें से केवल दो—BPT और BOT—में ही नीट स्कोर की अनिवार्यता रहेगी। बाकी सभी कोर्सों में दाखिला राज्य सरकारें, संबंधित विश्वविद्यालय या निजी संस्थान अपने स्तर पर कराएंगे।
बीपीटी और बीओटी के लिए अनिवार्य योग्यता
अवधि:
– चार वर्ष का कोर्स + एक साल की इंटर्नशिप
शैक्षणिक योग्यता:
– 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी (बॉटनी/जूलॉजी)
– कुल अंक 50% (SC/ST/OBC के लिए 40%)
– अंग्रेजी विषय में पास होना अनिवार्य
– अनिवार्य: NEET UG स्कोर
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया राज्यों का अधिकार क्षेत्र है, इसलिए इसे केंद्र द्वारा तय करना उचित नहीं है। सिर्फ नीट में उपस्थित होना योग्यता तय करने का पैमाना नहीं हो सकता। दुनिया में पात्रता का निर्धारण परीक्षा पास करने या बेहतर अंक हासिल करने से होता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह फैसला समाज में कोचिंग कल्चर को और बढ़ावा देगा, जिससे लाखों छात्रों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। स्टालिन के अनुसार, राज्यों से इस फैसले पर कोई परामर्श नहीं लिया गया, जो उन्हें अस्वीकार्य है।
बीपीटी और बीओटी में प्रवेश के लिए नीट को अनिवार्य करने का फैसला स्वास्थ्य शिक्षा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जहां केंद्र इसे एक मानकीकृत और पारदर्शी प्रणाली की ओर कदम बताता है, वहीं कुछ राज्य इसे अपने अधिकारों में हस्तक्षेप और छात्रों पर अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर और बहस की संभावना है।




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