
मेनोपॉज को अब तक महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन नई वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के दिमाग में भी ऐसे बदलाव होते हैं, जो उनकी याददाश्त, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के वैज्ञानिकों की एक बड़ी स्टडी में सामने आया है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में चिंता, अवसाद और नींद से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं। यह रिसर्च प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल साइकोलॉजिकल मेडिसिन में प्रकाशित हुई है और इसमें महिलाओं के दिमाग की संरचना और मानसिक स्थिति का गहराई से विश्लेषण किया गया।
इस अध्ययन की खास बात इसका बड़ा डाटा बेस है। रिसर्च यूके बायोबैंक के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें करीब 1 लाख 25 हजार महिलाओं की जानकारी शामिल की गई। महिलाओं को तीन समूहों में बांटा गया—पहली वे महिलाएं जो अभी मेनोपॉज तक नहीं पहुंची थीं, दूसरी वे जिनका मेनोपॉज हो चुका था लेकिन उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) नहीं ली, और तीसरी वे महिलाएं जिन्होंने मेनोपॉज के बाद एचआरटी ली थी। अध्ययन में मेनोपॉज की औसत उम्र 49.5 साल पाई गई।
रिसर्च के दौरान लगभग 11 हजार महिलाओं के एमआरआई स्कैन किए गए। इन स्कैन से दिमाग की संरचना में साफ अंतर देखने को मिला। जिन महिलाओं का मेनोपॉज हो चुका था, उनके दिमाग के उन हिस्सों में ग्रे मैटर की मात्रा कम पाई गई, जो याददाश्त और भावनाओं को नियंत्रित करने से जुड़े होते हैं। इसके अलावा महिलाओं से मेमोरी और प्रतिक्रिया समय से जुड़े टेस्ट भी कराए गए, जिनमें मेनोपॉज के बाद की महिलाओं का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
स्टडी में यह भी सामने आया कि मेनोपॉज के बाद महिलाएं मानसिक तनाव, बेचैनी और उदासी को लेकर ज्यादा शिकायत करती हैं। कई मामलों में वे डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने पहुंचीं और उनमें डिप्रेशन की दवाएं दिए जाने की संभावना भी अधिक पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि इस दौर में भावनात्मक संतुलन बनाए रखना कई महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज जीवन का एक स्वाभाविक लेकिन बड़ा बदलाव है। हालांकि सही जीवनशैली अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, सक्रिय दिनचर्या, संतुलित और पोषक आहार न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग के लिए भी फायदेमंद होते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि परिवार और समाज को इस दौर से गुजर रही महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को समझने और उन्हें भावनात्मक सहयोग देने की जरूरत है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर चुप रहने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।




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