
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board द्वारा संचालित Shri Mata Vaishno Devi Institute of Medical Excellence (SMVDIME) एक बार फिर सुर्खियों में है। संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से MBBS कोर्स दोबारा शुरू करने के लिए National Medical Commission (NMC) से नई अनुमति मांगी है। इस पहल को जम्मू-कश्मीर और आसपास के राज्यों के मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खुल सकते हैं।
श्राइन बोर्ड की ओर से एनएमसी को औपचारिक आवेदन भेजा जा चुका है। बोर्ड का उद्देश्य है कि आने वाले सत्र से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई फिर शुरू हो और क्षेत्र में डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार हो सके। साथ ही इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पहले क्यों रुकी थी MBBS की प्रक्रिया
इससे पहले कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स शुरू करने की योजना बनी थी, लेकिन कुछ बुनियादी ढांचे और तकनीकी मानकों से जुड़े मुद्दों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। एनएमसी के मानकों के मुताबिक फैकल्टी, क्लिनिकल सुविधाएं और अस्पताल से जुड़े कई पहलुओं में सुधार जरूरी था।
अब श्राइन बोर्ड का कहना है कि कॉलेज के प्रशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं। संस्थान ने मेडिकल शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने का दावा किया है।
अस्पताल और ट्रेनिंग की मजबूत व्यवस्था
इस मेडिकल कॉलेज से जुड़ा हुआ Shri Mata Vaishno Devi Narayana Superspeciality Hospital छात्रों के लिए क्लिनिकल ट्रेनिंग का मुख्य केंद्र होगा। यह अस्पताल पहले से ही क्षेत्र के बड़े सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में गिना जाता है और यहां विभिन्न विभागों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
कॉलेज ने शुरुआती चरण में 100 एमबीबीएस सीटों के लिए अनुमति मांगी है। यदि एनएमसी से मंजूरी मिलती है, तो इन सीटों पर दाखिला राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Eligibility cum Entrance Test (NEET-UG) के माध्यम से होगा।
कॉलेज परिसर में आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और छात्रों के लिए बेहतर हॉस्टल सुविधाएं तैयार की गई हैं। प्रशासन का दावा है कि पढ़ाई और शोध के लिए जरूरी सभी बुनियादी ढांचा अब उपलब्ध है।
NMC की टीम करेगी निरीक्षण
अब गेंद एनएमसी के पाले में है। आयोग पहले आवेदन की समीक्षा करेगा और इसके बाद विशेषज्ञों की एक टीम कॉलेज का भौतिक निरीक्षण करने के लिए कटरा का दौरा कर सकती है।
निरीक्षण के दौरान टीम फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, क्लिनिकल डेटा, प्रयोगशालाओं के उपकरण और अन्य शैक्षणिक मानकों की जांच करेगी। यदि निरीक्षण में सब कुछ संतोषजनक पाया गया, तो एनएमसी संस्थान को ‘लेटर ऑफ परमिशन’ (LoP) जारी कर सकता है। इसके बाद मेडिकल काउंसलिंग के जरिए छात्रों को यहां दाखिला मिल सकेगा।
क्षेत्र के लिए क्यों है अहम
श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह मेडिकल कॉलेज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि रियासी और आसपास के जिलों के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का आधार भी बनेगा। मेडिकल कॉलेज के सक्रिय होने से स्थानीय अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
बोर्ड की योजना है कि आने वाले वर्षों में इस संस्थान को उत्तर भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में विकसित किया जाए।
छात्रों के लिए क्या हो सकता है खास
श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित होने के कारण यहां फीस कई निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा छात्रों को सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के अनुभवी डॉक्टरों के साथ काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव हासिल होगा।
त्रिकुटा पहाड़ियों के पास स्थित यह कैंपस शांत और प्राकृतिक वातावरण में बना है, जो पढ़ाई और शोध के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करता है।
मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे एनएमसी और श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर रखें, ताकि काउंसलिंग और सीटों से जुड़ी ताजा जानकारी समय पर मिल सके।




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