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एंटीबैक्टीरियल साबुन और डिसइन्फेक्टेंट बन रहे स्वास्थ्य के लिए खतरा, वैज्ञानिकों की नई चेतावनी

एंटीबैक्टीरियल साबुन और डिसइन्फेक्टेंट बन रहे स्वास्थ्य के लिए खतरा, वैज्ञानिकों की नई चेतावनी

एंटीबैक्टीरियल साबुन और डिसइन्फेक्टेंट बन रहे स्वास्थ्य के लिए खतरा, वैज्ञानिकों की नई चेतावनी

घर को साफ रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल साबुन, वाइप्स और डिसइन्फेक्टेंट अब एक नए वैश्विक स्वास्थ्य खतरे की वजह बन रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इन उत्पादों में मौजूद रसायन बैक्टीरिया को खत्म करने के बजाय उन्हें और अधिक मजबूत बना रहे हैं, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति उनका प्रतिरोध बढ़ता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि सामान्य लोगों के लिए इन उत्पादों से किसी अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है, जबकि बेमतलब और अत्यधिक उपयोग भविष्य में मामूली संक्रमण को भी गंभीर बना सकता है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेन्स (AMR)—जिस स्थिति में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी दवाओं के असर से बचने लगते हैं—हर साल दुनिया में 10 लाख से अधिक लोगों की जान ले रहा है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो 2050 तक यह संकट कैंसर जितना घातक हो सकता है। अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने भी चेताया है कि घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाले एंटीबैक्टीरियल उत्पाद इस संकट को और तेज कर रहे हैं। यह शोध Environmental Science & Technology जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इन उत्पादों में मौजूद रसायन हर दिन लाखों घरों से नालों के जरिए पानी और पर्यावरण में पहुंचकर बैक्टीरिया के साथ मिश्रित होते हैं। इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया अधिक प्रतिरोधी बनते जाते हैं और समय के साथ एएमआर का खतरा बढ़ता है। शोध में यह भी सामने आया कि ये रसायन केवल हैंड सोप या वाइप्स में ही नहीं पाए जाते, बल्कि डिसइन्फेक्टेंट स्प्रे, कपड़े धोने वाले सैनिटाइजर, पर्सनल केयर आइटम्स और कई प्लास्टिक उत्पादों में भी मौजूद हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान एंटीबैक्टीरियल उत्पादों का उपयोग अचानक कई गुना बढ़ गया था। हालांकि महामारी समाप्त होने के बावजूद इनका उपयोग महामारी से पहले की तुलना में अधिक बना हुआ है। प्रयोगशालाओं और वास्तविक परिस्थितियों में किए गए शोध बताते हैं कि उपभोक्ता उत्पादों में मौजूद ये रसायन अतिरिक्त सुरक्षा नहीं देते, बल्कि एएमआर के जोखिम और रसायनिक विषाक्तता की संभावना को बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई एंटीबैक्टीरियल उत्पादों में क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड (QACs) और क्लोरोऑक्सीलिनॉल जैसे रसायन मिलाए जाते हैं। इन्हें बायोसाइड कहा जाता है—यानी ऐसे रसायन जो सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए बनाए जाते हैं। लेकिन ये केमिकल बैक्टीरिया को पूरी तरह नष्ट नहीं कर पाते। इसके बजाय वे बैक्टीरिया को ऐसे हालात में ढाल देते हैं जहां वे खुद को बदलकर और अधिक मजबूत, यानी ‘सुपरबग’, के रूप में विकसित हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि अगर एंटीबैक्टीरियल उत्पादों का अनियंत्रित उपयोग इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि जहां तक संभव हो, अत्यधिक उपयोग से बचें और सामान्य सफाई के लिए साधारण साबुन और पानी जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं।

Asmita Sarkar

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