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NMC के नए नियमों से MBBS सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ़, मेडिकल शिक्षा को मिलेगी रफ्तार

NMC के नए नियमों से MBBS सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ़, मेडिकल शिक्षा को मिलेगी रफ्तार

NMC के नए नियमों से MBBS सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ़, मेडिकल शिक्षा को मिलेगी रफ्तार

देश में डॉक्टरों की कमी और सीमित मेडिकल सीटों की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है। हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा पास करते हैं, लेकिन सीटों की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों का सपना अधूरा रह जाता है। अब इस स्थिति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। National Medical Commission ने ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन-2023 में अहम संशोधन करते हुए नए नियमों की अधिसूचना जारी की है, जिससे देश में MBBS सीटें बढ़ाने का रास्ता आसान हो गया है।

नए प्रावधानों के तहत मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से जुड़ी कई पुरानी सीमाएं हटा दी गई हैं। पहले किसी भी मेडिकल कॉलेज के लिए अधिकतम 150 MBBS सीटों की सीमा तय थी, भले ही संस्थान के पास पर्याप्त संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हो। अब इस सीमा को खत्म कर दिया गया है, जिससे सक्षम संस्थान अपनी क्षमता के अनुसार सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इसके साथ ही एक और बड़ा बदलाव आबादी आधारित नियम में किया गया है। पहले 10 लाख की आबादी पर अधिकतम 100 MBBS सीटों की अनुमति थी, जिसके कारण कई क्षेत्रों में नए कॉलेज या सीटें बढ़ाने में बाधाएं आती थीं। अब यह शर्त भी हटा दी गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि कम आबादी वाले क्षेत्रों में भी मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का रास्ता खुलेगा और क्षेत्रीय असंतुलन कम हो सकेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नियमों में भी राहत दी गई है। पहले मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल के बीच यात्रा का समय 30 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए था, जो व्यावहारिक रूप से कई जगहों पर चुनौती बन जाता था। अब इसे दूरी के आधार पर तय किया गया है। नए नियमों के मुताबिक, कॉलेज और अस्पताल के बीच अधिकतम 10 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह सीमा 15 किलोमीटर रखी गई है।

इन बदलावों का सबसे बड़ा लाभ छात्रों को मिलने की उम्मीद है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करते हैं, लेकिन सीटों की कमी के कारण उन्हें या तो दूसरे कोर्स चुनने पड़ते हैं या विदेश का रुख करना पड़ता है। अब सीटों में संभावित बढ़ोतरी से ज्यादा छात्रों को देश में ही मेडिकल शिक्षा हासिल करने का अवसर मिल सकेगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इससे न केवल नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मौजूदा संस्थानों की क्षमता का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। इसके साथ ही, लंबे समय में देश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने में भी यह कदम अहम भूमिका निभा सकता है।

Asmita Sarkar

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