
भारत ने स्वास्थ्य और कृषि के बीच मौजूद दशकों पुरानी दूरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज मिशन SEHAT की शुरुआत कर दी है। जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।
यह मिशन कृषि, पोषण और स्वास्थ्य—तीनों को एक ही नीति ढांचे में लाने का प्रयास है, ताकि देश कुपोषण और बढ़ते गैर-संचारी रोगों की दोहरी चुनौती से एक साथ निपट सके।
मिशन का नेतृत्व दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाएं कर रही हैं—
– भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
– भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
दोनों संस्थाओं का एक मंच पर आना इसे देश के सबसे वैज्ञानिक और समन्वित स्वास्थ्य-कृषि कार्यक्रमों में शामिल कर देता है।
कृषि अब सिर्फ उत्पादन नहीं, पोषण और स्वास्थ्य का आधार
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह मिशन “आधुनिक विज्ञान और भारत की प्राचीन आहार परंपराओं” का अनोखा मेल है। उन्होंने इसे केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि “खाद्य से स्वास्थ्य” तक की राष्ट्रीय सोच का बड़ा कदम बताया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश का खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन से बढ़कर 357 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। अब चुनौती केवल उत्पादन की नहीं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और पोषक भोजन लोगों तक पहुंचाने की है।
दोहरे संकट से निपटने का प्रयास
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत आज दो प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों—कुपोषण और गैर-संचारी रोगों (मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा) —से जूझ रहा है। इन समस्याओं का हल सिर्फ दवाओं या अस्पतालों में नहीं, बल्कि संतुलित पोषण, वैज्ञानिक कृषि और स्वस्थ जीवनशैली में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार वन हेल्थ और होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण के तहत मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एक दूसरे से जोड़कर देख रही है।
ICMR के महानिदेशक राजीव बहल ने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को “सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और समग्र कल्याण की प्रणाली” के रूप में समझा जाए।
मिशन का फोकस: मोटे अनाज, बायो-फोर्टिफिकेशन और प्राकृतिक खेती
मिशन SEHAT ज्वार, बाजरा, रागी जैसे पोषक और पारंपरिक अनाजों को फिर से मुख्यधारा में लाने पर जोर देगा। इसके साथ-साथ बायो-फोर्टिफाइड फसलों के विकास और प्रसार को गति दी जाएगी, ताकि आम लोगों के भोजन में आवश्यक विटामिन और खनिज स्वाभाविक रूप से शामिल हो सकें।
ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि यह मिशन उस वैश्विक सोच को आगे बढ़ाता है जिसमें भोजन को ही “प्राकृतिक औषधि” माना गया है। उनके अनुसार ICAR–ICMR का सहयोग एक ऐसी वैज्ञानिक प्रणाली विकसित करेगा जो कुपोषण और जीवनशैली संबंधी बीमारियों, दोनों से लड़ने में सक्षम होगी।
मिशन में छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, जैविक व प्राकृतिक कृषि और स्थानीय स्तर पर पोषक खाद्य उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों और नागरिकों तक
कृषि मंत्री ने कहा कि अनुसंधान सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका जोर था कि इसके लाभ समय पर किसानों और आम लोगों तक पहुंचें। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों का स्वास्थ्य और सुरक्षित कार्य-परिसर भी इस मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मिशन SEHAT की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इलाज-केंद्रित मॉडल के बजाय रोकथाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान देता है। इसी कारण इसे आने वाले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य और पोषण रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।




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