
फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने करीब 12 वर्षों बाद बी.फार्म (बैचलर ऑफ फार्मेसी) के पाठ्यक्रम को पूरी तरह से अपडेट किया है। नए बी.फार्म 2026 पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल हेल्थ, उद्यमिता, संचार कौशल और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को केवल पारंपरिक फार्मेसी शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें तेजी से बदल रही स्वास्थ्य और दवा उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी और व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जाएंगे। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है।
फेल होने पर नहीं दोहराना होगा पूरा सेमेस्टर
नए सिलेबस का एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि यदि कोई छात्र किसी सेमेस्टर में किसी विषय में असफल हो जाता है, तो उसे पूरा सेमेस्टर दोबारा नहीं पढ़ना पड़ेगा। वह अगले सेमेस्टर में अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगा। हालांकि, उसे संबंधित विषय की परीक्षा बाद में दोबारा पास करनी होगी।
यह व्यवस्था छात्रों के शैक्षणिक वर्ष को प्रभावित होने से बचाने के उद्देश्य से लागू की गई है।
पहले सेमेस्टर से शुरू होगी डिजिटल शिक्षा
बी.फार्म 2026 पाठ्यक्रम में डिजिटल और तकनीकी शिक्षा को शुरुआती स्तर से ही शामिल किया गया है।
पहले सेमेस्टर में छात्रों को “फार्मास्युटिकल साइंसेज के लिए पायथन प्रोग्रामिंग की बुनियादी जानकारी” पढ़ाई जाएगी। दूसरे सेमेस्टर में एप्लाइड बायोस्टैटिस्टिक्स और डेटा एनालिटिक्स शामिल होंगे। तीसरे सेमेस्टर में मशीन लर्निंग की अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा।
इसके बाद छठे सेमेस्टर में फार्मास्युटिकल साइंसेज में AI के उपयोग, सातवें सेमेस्टर में क्लिनिकल एप्लीकेशन में AI और आठवें सेमेस्टर में AI के नैतिक पहलुओं और व्यावहारिक उपयोग से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे।
यह बदलाव दर्शाता है कि आने वाले समय में फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह डिजिटल हेल्थ और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का भी अहम हिस्सा होगा।
छात्रों को मिलेगी विषय चुनने की आजादी
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुसार विषय चुनने का अवसर दिया गया है।
स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (SEC), एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (AEC) और वैल्यू एडेड कोर्स (VAC) के माध्यम से छात्र विभिन्न वैकल्पिक विषयों का चयन कर सकेंगे। इनमें ग्रीन केमिस्ट्री, मेडिकल डिवाइस, साइंटिफिक राइटिंग, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, कंप्यूटर एडेड ड्रग डिजाइन, प्रोफेशनल स्किल्स, क्लीनिंग वैलिडेशन और इम्प्योरिटी प्रोफाइलिंग जैसे विषय शामिल हैं।
इससे छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विशेषज्ञता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इंटर्नशिप और रिसर्च पर विशेष जोर
नए बी.फार्म पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण को अधिक महत्व दिया गया है। छात्रों को दो चरणों में इंटर्नशिप पूरी करनी होगी और इसके लिए कम से कम 240 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
यह प्रशिक्षण फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल डिवाइस, फूड इंडस्ट्री, हॉस्पिटल फार्मेसी और कम्युनिटी फार्मेसी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
इसके अलावा सातवें और आठवें सेमेस्टर में रिसर्च प्रोजेक्ट अनिवार्य होंगे, जिससे छात्रों को अनुसंधान, नवाचार और समस्या समाधान की दिशा में काम करने का अवसर मिलेगा।
मूल्यांकन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव
अब छात्रों का मूल्यांकन केवल अंतिम परीक्षा के आधार पर नहीं किया जाएगा। पूरे सेमेस्टर के दौरान किए गए असाइनमेंट, क्विज, समूह चर्चा, फील्ड वर्क, प्रेजेंटेशन और सेशनल परीक्षाओं को भी अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा।
इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों के समग्र प्रदर्शन और व्यावहारिक समझ का आकलन करना है।
डिग्री के लिए 193 क्रेडिट होंगे जरूरी
नई च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) व्यवस्था के तहत बी.फार्म डिग्री प्राप्त करने के लिए छात्रों को न्यूनतम 193 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। इसमें थ्योरी, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट कार्य सभी को क्रेडिट के रूप में मान्यता दी गई है।
उपस्थिति और सामुदायिक सेवा पर रहेगा फोकस
नए नियमों के अनुसार छात्रों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। बेहतर उपस्थिति वाले छात्रों को अतिरिक्त अंक भी दिए जाएंगे, जबकि निर्धारित सीमा से कम उपस्थिति होने पर इसका लाभ नहीं मिलेगा।
इसके साथ ही प्रत्येक फार्मेसी संस्थान को हर वर्ष कम से कम एक औद्योगिक या फील्ड विजिट आयोजित करनी होगी। संस्थानों को किसी गांव या वार्ड को गोद लेकर सामुदायिक सेवा, दवा जागरूकता अभियान और मरीज परामर्श जैसी गतिविधियां भी संचालित करनी होंगी।
छात्रों को नौकरी ही नहीं, उद्यमिता के लिए भी किया जाएगा तैयार
नए पाठ्यक्रम में इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल नौकरी तलाशने वाला पेशेवर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी प्रेरित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बढ़ती तकनीकी भूमिका को देखते हुए यह बदलाव भारतीय फार्मेसी शिक्षा को वैश्विक मानकों के और करीब ले जाएगा।
फार्मेसी शिक्षा का नया दौर
बी.फार्म 2026 पाठ्यक्रम भारतीय फार्मेसी शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल हेल्थ जैसे विषयों के समावेश से छात्र भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं और फार्मास्युटिकल उद्योग की जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
आने वाले वर्षों में यह बदलाव न केवल छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नए अवसर प्रदान करेगा।




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