
VIT Bhopal University Patent: वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर फेफड़ों की गंभीर बीमारी पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) की लंबे समय तक निगरानी करने वाली एक नई तकनीक विकसित की है। इस नवाचार के लिए टीम को भारतीय यूटिलिटी पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह पेटेंट “Apparatus for Dynamic Monitoring and Analysis in Pulmonary Fibrosis” शीर्षक से दिया गया है। यह प्रणाली मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा को लगातार एकत्रित और विश्लेषित करने के लिए तैयार की गई है, जिससे डॉक्टर बीमारी की प्रगति पर अधिक प्रभावी तरीके से नजर रख सकेंगे। यह तकनीक दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं (Remote Healthcare), क्लिनिकल निर्णय लेने और लंबे समय तक श्वसन संबंधी देखभाल की आवश्यकता वाले मरीजों के समय पर उपचार में मदद करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
भारतीय पेटेंट के तहत मिली मान्यता
यह आविष्कार भारतीय पेटेंट संख्या 588547 के तहत स्वीकृत किया गया है। यह पेटेंट पेटेंट आवेदन संख्या 202421039574 के आधार पर प्रदान किया गया, जिसे 21 मई 2024 को दाखिल किया गया था और 7 मई 2026 को मंजूरी मिली।
कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने मिलकर किया शोध
इस शोध का नेतृत्व वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के डॉ. रजनीश कुमार पटेल और डॉ. सिद्धार्थ सिंह चौहान ने किया।
शोध टीम में एसआरएम यूनिवर्सिटी दिल्ली-एनसीआर की डॉ. नैन्सी कुमारी, एनआईटी अगरतला के डॉ. कृष्ण कुमार पांडे तथा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल के अमित पटेल और सुनील कुमार गौतम भी शामिल रहे।
क्या है पल्मोनरी फाइब्रोसिस?
पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों की एक गंभीर और दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें फेफड़ों के ऊतकों पर धीरे-धीरे निशान (Scarring) बनने लगते हैं। इससे सांस लेने में कठिनाई बढ़ती जाती है और समय के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
आमतौर पर इस बीमारी की निगरानी अस्पताल में समय-समय पर होने वाली जांच के जरिए की जाती है। ऐसे में दो जांचों के बीच मरीज की स्थिति में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखना मुश्किल होता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, नई पेटेंट तकनीक इस चुनौती को कम करने का प्रयास करती है। यह मरीज के स्वास्थ्य संबंधी डेटा का लगातार विश्लेषण कर डॉक्टरों को बीमारी की प्रगति समझने और मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार की बेहतर योजना बनाने में सहायता कर सकती है।
टेलीमेडिसिन और रिमोट हेल्थकेयर में होगा उपयोग
वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट कदंबरी एस. विश्वनाथन ने कहा कि यह पेटेंट विश्वविद्यालय की उस शोध नीति को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों का समाधान विकसित करना है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. रजनीश कुमार पटेल ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य ऐसी प्रणाली विकसित करना था, जो मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा का गतिशील (Dynamic) विश्लेषण कर डॉक्टरों को बेहतर चिकित्सीय निर्णय लेने और श्वसन रोगियों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने में मदद कर सके।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग टेलीमेडिसिन, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, श्वसन रोगों पर शोध और रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। यह पेटेंट सहयोगात्मक शैक्षणिक शोध के माध्यम से विकसित विश्वविद्यालय की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।




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