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NEET UG Paper Leak: FAIMA questions NTA's security arrangements in the Supreme Court

NEET UG Paper Leak: FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, पेपर सेट करने वालों पर कड़ी सजा की मांग

NEET UG Paper Leak: FAIMA questions NTA's security arrangements in the Supreme Court

NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने 19 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि केवल सुरक्षा उपायों की सूची बताना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा की बेहद गोपनीय सामग्री तक पहुंच रखने वाले अधिकृत लोगों की जवाबदेही भी कानून में स्पष्ट होनी चाहिए। FAIMA की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने जवाब दाखिल किया।

यह मामला NEET UG 2026 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिकाओं से जुड़ा है। 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा को NTA ने 12 मई को कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया था। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहा है। FAIMA ने पहले ही NTA को बदलने या उसका व्यापक पुनर्गठन करने और परीक्षा व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र व मजबूत बनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट में रखी है।

FAIMA ने पेपर सेट करने वालों की जवाबदेही पर क्या कहा?

FAIMA का ताजा जवाब परीक्षा के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर केंद्रित है। संगठन का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने, जांचने या परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री संभालने वाले लोगों के लिए कानून में अलग और कड़े प्रावधान होने चाहिए।

संगठन के अनुसार, यदि किसी अधिकृत व्यक्ति द्वारा गोपनीय परीक्षा सामग्री की कॉपी की जाती है, उसे किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाया जाता है, साझा किया जाता है या अनधिकृत व्यक्ति के सामने उसका खुलासा किया जाता है, तो इसे सामान्य अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।

यह मांग ऐसे समय आई है जब संसद ने सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों के खिलाफ कानून को पहले ही सख्त कर दिया है। Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026 को संसद ने जुलाई में पारित किया और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह 31 जुलाई 2026 को कानून बन गया। नए कानून में कई अपराधों के लिए सजा और जुर्माना बढ़ाया गया है।

नए कानून के तहत अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर सजा को बढ़ाकर पांच से 10 साल तक और जुर्माने को अधिकतम 50 लाख रुपये तक किया गया है। साथ ही जांच को समयबद्ध बनाने और विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए मामलों की सुनवाई का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, FAIMA का तर्क है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री तक वैध पहुंच रखने वाले लोगों द्वारा अधिकार के दुरुपयोग की स्थिति को और स्पष्ट तरीके से कानून में शामिल किया जाना चाहिए।

राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों का क्या हुआ?

FAIMA ने केंद्र सरकार द्वारा नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनाई गई नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर भी सवाल उठाया है। संगठन ने पूछा है कि जब परीक्षा सुधारों के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में पहले ही विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी और उसने विस्तृत सिफारिशें दी थीं, तो उन सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की स्थिति क्या है और नई टास्क फोर्स की जरूरत क्यों पड़ी।

शिक्षा मंत्रालय ने जून 2024 में पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स बनाई थी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा मजबूत करना और NTA की संरचना तथा कामकाज की समीक्षा करना था। समिति ने अक्टूबर 2024 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें कुल 101 सिफारिशें थीं।

इन सिफारिशों में प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डेटा सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, NTA के पुनर्गठन और परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल थे। समिति ने NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं के लिए कई चरणों और कई सत्रों में परीक्षा कराने तथा लंबे समय में कंप्यूटर आधारित परीक्षा की दिशा में बढ़ने जैसे सुझाव भी दिए थे।

हालांकि, 2026 में इन सिफारिशों के लागू होने को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं। जुलाई 2026 में सामने आए एक विश्लेषण के मुताबिक 101 में से 57 सिफारिशें पूरी तरह लागू हुई थीं, 10 आंशिक रूप से लागू थीं और 27 पर अभी काम बाकी था।

यही वह मुद्दा है जिस पर FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट के सामने जवाब मांगा है कि पहले से मौजूद सुधारों को पूरी तरह लागू किए बिना नई व्यवस्था बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।

नई नीलेकणि टास्क फोर्स पर भी उठे सवाल

केंद्र ने जुलाई 2026 में परीक्षा व्यवस्था में अगले चरण के सुधारों के लिए Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी थी। इसके साथ ही केंद्र ने अदालत को बताया था कि NEET UG को पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने के विकल्प पर भी विचार चल रहा है।

FAIMA का सवाल है कि यदि 2024 में राधाकृष्णन समिति ने पहले ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक सुझाव दिए थे, तो उन सुझावों की स्थिति को स्पष्ट किए बिना नई समिति बनाने से छात्रों के बीच भ्रम बढ़ सकता है।

संगठन का कहना है कि छात्रों को हर कुछ समय बाद नई समिति और नई व्यवस्था का सामना नहीं करना चाहिए। परीक्षा प्रणाली में स्थिरता और स्पष्टता जरूरी है, खासकर NEET UG जैसी परीक्षा के लिए जिसमें देशभर के लाखों छात्र लंबे समय तक तैयारी करते हैं।

NEET UG को CBT में बदलने पर भी छात्रों की चिंता

NEET UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है। 6 अगस्त की सुनवाई में FAIMA की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने कहा था कि यदि सरकार NEET को CBT मोड में बदलने का फैसला करती है तो इसकी जानकारी छात्रों को जल्द दी जानी चाहिए, क्योंकि उम्मीदवार फिलहाल पेन-पेपर पैटर्न के हिसाब से तैयारी कर रहे हैं।

केंद्र ने अदालत को बताया है कि NEET UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने के सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

FAIMA की NTA को बदलने की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?

FAIMA की याचिका में NTA को बदलने या उसका व्यापक पुनर्गठन करने की मांग भी शामिल है। संगठन चाहता है कि NEET UG जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए ऐसी मजबूत और स्वायत्त व्यवस्था हो, जिसमें परीक्षा की सुरक्षा, प्रश्नपत्र की गोपनीयता और जवाबदेही को प्राथमिकता मिले।

FAIMA ने पहले सुप्रीम कोर्ट में यह भी मांग की थी कि नई व्यवस्था बनने तक परीक्षा की निगरानी के लिए एक हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, जिसमें सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों।

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने FAIMA की याचिका पर NTA से जवाब मांगा था और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा था। इसके बाद अदालत ने केंद्र के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा।

2024 में NEET मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला था?

NEET UG 2024 में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करने की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर पूरे देश में परीक्षा रद्द करने का आदेश नहीं दिया था। हालांकि, उसने परीक्षा प्रणाली की कमियों और पेपर लीक से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई निर्देश दिए थे।

इसी मामले के बाद केंद्र ने राधाकृष्णन समिति बनाई थी और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब 2026 में फिर NEET UG पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद उन्हीं सुधारों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

छात्रों के लिए क्या मायने रखता है?

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का सबसे बड़ा असर NEET UG की भविष्य की परीक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। अदालत के सामने NTA की भूमिका, पेपर सुरक्षा, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का अमल, नई नीलेकणि टास्क फोर्स और NEET को कंप्यूटर आधारित करने जैसे कई मुद्दे हैं।

FAIMA का ताजा जवाब इस बहस को केवल तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि गोपनीय परीक्षा सामग्री तक पहुंच रखने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों की जवाबदेही को भी केंद्र में लाता है। अब नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और केंद्र की ओर से इन सवालों पर दिए जाने वाले जवाब पर है।

 

 

Asmita Sarkar

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