
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश अपने लगातार नौवें केंद्रीय बजट 2026-27 में डिज़ाइन शिक्षा और रचनात्मक कौशल को सरकार की शिक्षा और रोजगार रणनीति का केंद्र बनाया। बजट में शिक्षा को रोजगार, उद्यम और सेवा-आधारित विकास से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की गई।
वित्त मंत्री ने कहा, “भारतीय डिज़ाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश में डिज़ाइनरों की कमी है। मैं प्रस्तावित करती हूँ कि चुनौती मार्ग (Challenge Route) के माध्यम से भारत के पूर्वी क्षेत्र में डिज़ाइन शिक्षा और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नया राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (National Institute of Design) स्थापित किया जाए।”
डिज़ाइन शिक्षा में नया प्रस्ताव
बजट में प्रस्तावित सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा पहल है पूर्वी भारत में डिज़ाइन शिक्षा को मजबूत करने के लिए चुनौती मार्ग के माध्यम से नया राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान स्थापित करना। इस पहल का उद्देश्य डिज़ाइन के क्षेत्र में शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना है।
डिज़ाइन क्षेत्र पर यह जोर रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर व्यापक ध्यान के साथ जुड़ा है। AVGC यानी तहत एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स क्षेत्र में पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि छात्रों को शुरुआती स्तर से ही आधुनिक क्रिएटिव तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सके और भविष्य में इस उद्योग में करियर बनाने के लिए वे तैयार हों। अनुमान है कि 2030 तक इस उद्योग में लगभग 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी।
क्या है AVGC?
एनिमेशन: एनिमेशन का मतलब है चित्रों या आइडियाज़ को चलती हुई इमेज या वीडियो में बदलना। इसका इस्तेमाल फिल्मों, टीवी शोज और ऑनलाइन वीडियो में होता है।
विजुअल इफेक्ट्स (VFX): VFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स, जो कंप्यूटर की मदद से बनाए जाते हैं। फिल्मों में सुपरहीरो उड़ते हैं, बम फटता है या फैंटेसी दुनिया दिखाई जाती है, वह VFX के जरिए संभव होता है।
गेमिंग: गेमिंग में वीडियो और मोबाइल गेम्स बनाए जाते हैं। इसमें कहानी, ग्राफिक्स और इंटरैक्टिव डिजाइन शामिल होते हैं। यह बच्चों और युवाओं दोनों में बहुत लोकप्रिय है।
कॉमिक्स: कॉमिक्स में चित्र और टेक्स्ट के जरिए कहानी बताई जाती है। सुपरहीरो, एडवेंचर और फैंटेसी जैसी कहानियां कॉमिक्स में बहुत पसंद की जाती हैं।
प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएं
विश्व डिज़ाइन विश्वविद्यालय के कुलपति संजय गुप्ता ने कहा, “बजट में रचनात्मक और डिज़ाइन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना युवाओं के लिए स्वागतयोग्य कदम है। स्कूलों और कॉलेजों में AVGC और कंटेंट क्रिएशन लैब्स स्थापित करने से युवाओं को भविष्य के रोजगार के अवसर मिलेंगे। डिज़ाइन शिक्षा को मजबूत करने का यह प्रस्ताव लंबे समय से मौजूद प्रतिभा अंतर को भरता है और भारत को डिज़ाइन, कंटेंट और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगा।”
महिंद्रा विश्वविद्यालय के कुलपति यजुलु मेदूरी ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में साहसिक कदम है। ‘युवा शक्ति’ पहल के माध्यम से सरकार कक्षा की पढ़ाई और वास्तविक दुनिया के करियर के बीच का अंतर पाट रही है। पांच नए विश्वविद्यालय टाउनशिप और ‘कॉर्पोरेट मित्र’ पाठ्यक्रम युवाओं को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने का तरीका बदल देंगे।”
उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे में निवेश
बजट में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थान, विश्वविद्यालय टाउनशिप, लड़कियों के हॉस्टल और खगोल विज्ञान सुविधाओं के लिए निवेश की घोषणा की गई। सरकार चुनौती मार्ग के माध्यम से राज्यों का समर्थन करेगी और प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक गलियारों के पास पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाएगी। इन शैक्षणिक क्षेत्रों में विश्वविद्यालय, कॉलेज, अनुसंधान संस्थान, कौशल केंद्र और आवासीय परिसर होंगे।
संजय घोडावत विश्वविद्यालय के ट्रस्टी विनायक वी. भोसल ने कहा, “इस दृष्टिकोण को सफल बनाने के लिए उद्योग को पाठ्यक्रम डिजाइन में शामिल करना होगा और उन्हें अप्रेंटिसशिप, संयुक्त अनुसंधान और सहकारी पेटेंट/स्पिन-ऑफ के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इस तरह की संरचित साझेदारी इन टाउनशिप्स को नवाचार और रोजगार की शक्तिशाली इंजन बना सकती है।”
महिलाओं और खगोल विज्ञान के लिए पहल
महिलाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से STEM संस्थानों में, सरकार ने हर जिले में एक लड़कियों का हॉस्टल स्थापित करने की घोषणा की। खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चार टेलीस्कोप संरचनाओं का निर्माण या उन्नयन किया जाएगा: नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप, नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप, हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप और COSMOS-2 प्लेनेरियम।
इसके अलावा, बजट में शिक्षा और चिकित्सा के लिए लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत स्रोत पर वसूले जाने वाले कर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।




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