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It’s not just about design courses; career preparation is also essential: The need to transform design education in the new era

सिर्फ डिजाइन कोर्स नहीं, करियर की तैयारी भी जरूरी: नए दौर में डिजाइन शिक्षा को बदलने की जरूरत

It’s not just about design courses; career preparation is also essential: The need to transform design education in the new era

भारत में डिजाइन शिक्षा के अवसरों की कोई कमी नहीं है। देश के लगभग हर बड़े शहर में फैशन डिजाइन और इंटीरियर डिजाइन से जुड़े कई कॉलेज, संस्थान और अकादमियां मौजूद हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि इससे पता चलता है कि रचनात्मक करियर को अब छात्रों और अभिभावकों के बीच पहले की तुलना में अधिक स्वीकार्यता मिल रही है। हालांकि, इसके साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आता है—क्या छात्रों को केवल कोर्स पूरा करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है या उन्हें वास्तव में सफल करियर के लिए तैयार किया जा रहा है?

आज के युवा अपने भविष्य को लेकर पहले से अलग सोच रखते हैं। वे सिर्फ एक स्थायी नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि कुछ नया बनाने, अपनी पहचान स्थापित करने और अपना उद्यम खड़ा करने की इच्छा रखते हैं। दूसरी ओर, बाजार भी तेजी से बदल रहा है। लोग अब नए विचारों, भारतीय ब्रांडों, स्वतंत्र डिजाइन स्टूडियो, व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए स्पेस, नए फैशन लेबल और रचनात्मक सेवाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। ऐसे में आने वाली पीढ़ी के डिजाइनर केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं होंगे, बल्कि वे अपने खुद के फैशन ब्रांड, डिजाइन स्टूडियो और क्रिएटिव व्यवसाय भी स्थापित कर सकते हैं।

बदल चुका है डिजाइन इंडस्ट्री का स्वरूप

फैशन डिजाइन अब केवल कपड़ों के स्केच बनाने, फैब्रिक चुनने या ट्रेंड्स का पालन करने तक सीमित नहीं है। इसी तरह, इंटीरियर डिजाइन भी केवल कमरों को सजाने, रंग चुनने या फर्नीचर लगाने का काम नहीं रह गया है।

आज दोनों क्षेत्र लाइफस्टाइल, ब्रांडिंग, डिजिटल मीडिया, रिटेल, रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी, ई-कॉमर्स, इवेंट्स और उद्यमिता से गहराई से जुड़े हुए हैं। एक फैशन डिजाइनर को अब स्टाइलिंग, ब्रांड पहचान, कलेक्शन प्लानिंग, ग्राहक व्यवहार और सोशल मीडिया प्रस्तुति की समझ भी होनी चाहिए। वहीं इंटीरियर डिजाइनर को स्पेस प्लानिंग, सामग्री चयन, लाइटिंग, फर्नीचर, क्लाइंट की जरूरतों और प्रोजेक्ट के व्यावहारिक क्रियान्वयन की जानकारी होना आवश्यक है।

यानी डिजाइन को केवल कला का क्षेत्र मानने वाली पारंपरिक सोच अब पर्याप्त नहीं रह गई है।

मजबूत आधार के बिना सफल डिजाइनर बनना मुश्किल

तकनीक और आधुनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बावजूद डिजाइन के मूल सिद्धांत आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। सूक्ष्म अवलोकन, रचनात्मक सोच, स्केचिंग, रंगों की समझ, अनुपात का ज्ञान, शिल्प कौशल, सामग्री की जानकारी और सांस्कृतिक समझ एक अच्छे डिजाइनर की पहचान हैं।

सिर्फ सॉफ्टवेयर सीख लेने या तकनीक का उपयोग कर लेने से कोई व्यक्ति सफल डिजाइनर नहीं बन जाता। असली जरूरत पारंपरिक डिजाइन समझ और आधुनिक बाजार की मांगों के बीच संतुलन बनाने की है।

पोर्टफोलियो की अहमियत को समझना होगा

डिजाइन शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है कक्षा के असाइनमेंट और पेशेवर पोर्टफोलियो के बीच का अंतर। कई शैक्षणिक क्षेत्रों में अंकपत्र और प्रमाणपत्र सफलता का मुख्य आधार माने जाते हैं, लेकिन डिजाइन इंडस्ट्री में पोर्टफोलियो की भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है।

पोर्टफोलियो यह दिखाता है कि छात्र क्या सोच सकता है, क्या बना सकता है और अपने विचारों को किस तरह प्रस्तुत कर सकता है। कई बार पोर्टफोलियो छात्र के बोलने से पहले उसकी क्षमता की कहानी बता देता है। यही कारण है कि डिजाइन शिक्षा को केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें छात्र आत्मविश्वास के साथ उद्योग जगत के सामने प्रस्तुत कर सकें।

फैशन डिजाइन के छात्रों को स्केच, मूड बोर्ड, कलेक्शन आइडिया, लुकबुक और ब्रांड अवधारणाओं पर काम करना चाहिए। वहीं इंटीरियर डिजाइन के छात्रों को स्पेस प्लान, मटेरियल बोर्ड, फर्नीचर कॉन्सेप्ट, 2D और 3D प्रेजेंटेशन तथा क्लाइंट-रेडी प्रोजेक्ट तैयार करने चाहिए।

केवल अच्छा डिजाइन नहीं, अच्छी प्रस्तुति भी जरूरी

कई छात्र रचनात्मक होते हैं, लेकिन अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाते। कुछ के पास बेहतरीन कल्पनाएं होती हैं, लेकिन वे अपनी सोच को स्पष्ट रूप से समझाने में कठिनाई महसूस करते हैं। वहीं कुछ छात्र आकर्षक डिजाइन तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन उसे ग्राहक की जरूरत, बाजार की मांग या बजट से जोड़कर नहीं देख पाते।

वास्तविक दुनिया में डिजाइन केवल सुंदर चीजें बनाने का नाम नहीं है। यह समझाना भी जरूरी होता है कि कोई डिजाइन क्यों उपयोगी है और वह किस समस्या का समाधान करता है।

तकनीक और AI ने बदल दी हैं अपेक्षाएं

डिजिटल टूल्स, डिजाइन सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विजुअलाइजेशन और ऑनलाइन पोर्टफोलियो प्लेटफॉर्म अब डिजाइन पेशे का हिस्सा बन चुके हैं। ये उपकरण छात्रों को अपने विचारों को तेजी से विकसित करने और बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करते हैं।

हालांकि, तकनीक और AI रचनात्मकता, मौलिकता, अवलोकन क्षमता और मानवीय समझ का विकल्प नहीं बन सकते। वे डिजाइन प्रक्रिया को बेहतर बना सकते हैं, लेकिन डिजाइन सोच की जगह नहीं ले सकते।

उद्योग से जुड़ाव से मिलती है वास्तविक समझ

सिर्फ कक्षा में बैठकर कोई छात्र डिजाइन पेशे को पूरी तरह नहीं समझ सकता। उसे यह देखना जरूरी है कि ग्राहक कैसे सोचते हैं, पेशेवर किस तरह काम करते हैं, डिजाइन प्रोजेक्ट कैसे विकसित होते हैं और वास्तविक परिस्थितियों में फैसले कैसे लिए जाते हैं।

इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट, लाइव प्रोजेक्ट, विशेषज्ञ सत्र, पोर्टफोलियो समीक्षा और छात्र प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां छात्रों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद करती हैं।

डिजाइन करियर में बढ़ रही है उद्यमिता की भूमिका

आज कई फैशन डिजाइन छात्र अपना फैशन लेबल, स्टाइलिंग स्टूडियो या ऑनलाइन ब्रांड शुरू करना चाहते हैं। इसी तरह, इंटीरियर डिजाइन के छात्र अपना डिजाइन स्टूडियो, डेकोर ब्रांड, फर्नीचर व्यवसाय या स्वतंत्र कंसल्टेंसी स्थापित करने का सपना देखते हैं।

ऐसे माहौल में छात्रों को केवल डिजाइन बनाना ही नहीं, बल्कि अपने विचारों को व्यवसाय में बदलना भी सीखना होगा। इसके लिए ब्रांडिंग, ग्राहक व्यवहार, लागत प्रबंधन, संचार कौशल और पेशेवर अनुशासन जैसी बुनियादी व्यावसायिक समझ जरूरी है।

डिजाइन शिक्षा को नए नजरिए की जरूरत

आज भारत को केवल अधिक डिजाइन संस्थानों की जरूरत नहीं है। जरूरत ऐसे संस्थानों की है जो रचनात्मकता को करियर की दिशा, उद्योग की समझ और आत्मनिर्भरता से जोड़ सकें।

डिजाइन करियर आने वाले वर्षों में भी युवाओं को आकर्षित करता रहेगा, क्योंकि यह रचनात्मक अभिव्यक्ति और स्वतंत्र विकास के अवसर प्रदान करता है। लेकिन केवल आकर्षण पर्याप्त नहीं है। छात्रों को यह समझना होगा कि डिजाइन में सफलता के लिए कड़ी मेहनत, धैर्य, निरंतर अभ्यास, अवलोकन और लगातार सीखते रहने की आवश्यकता होती है।

भारत के युवा डिजाइनरों को केवल कक्षाओं की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने विचारों को साकार करने, उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और उन्हें सफल करियर या व्यवसाय में बदलने का आत्मविश्वास भी चाहिए।

 

 

 

Asmita Sarkar

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