
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत राज्य के अन्य हिस्सों में अब अपराधों की जांच मोबाइल फॉरेंसिक वैन के जरिए की जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में इन वैनों का उद्घाटन किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में कुल 259 मोबाइल फॉरेंसिक वैन चालू की जाएंगी, जिनमें से 21 वैन पूरी तरह से सुसज्जित होकर पहले ही परिचालन में आ चुकी हैं।
इन वैनों में अत्याधुनिक तकनीक और उपकरण शामिल हैं, जो अपराध स्थल पर साक्ष्य एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने में मदद करेंगी। अपराध स्थल एप्लिकेशन ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके साक्ष्य को सुरक्षित रूप से एकत्र और संग्रहीत करेगा। साक्ष्य बारकोड के माध्यम से संरक्षित किए जाएंगे।
वैन में बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में डीएनए, रक्त और अन्य आवश्यक साक्ष्य जुटाने की क्षमता होगी। इसके अलावा, साइबर अपराध और विस्फोटक जांच के लिए विशेष किट भी उपलब्ध होंगी। वैन में सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे और यह संबंधित पुलिस स्टेशन से जुड़ी होगी।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत, 7 या उससे अधिक वर्षों की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। मोबाइल फॉरेंसिक वैन इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन वैनों की मदद से अपराध स्थल का विवरण दस्तावेज़ के रूप में दर्ज किया जाएगा।
फोरेंसिक विशेषज्ञ साक्ष्य एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने में वरिष्ठ विशेषज्ञों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क कर सकेंगे। अपराध स्थल की रिपोर्ट तैयार कर तुरंत पुलिस जांच अधिकारी को सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह पहल महाराष्ट्र को अपराध प्रूफ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सुविधा अपराधियों में डर पैदा करेगी और अपराधों की दोषसिद्धि दर बढ़ाने में मददगार साबित होगी। महाराष्ट्र मोबाइल फॉरेंसिक वैन सुविधा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने मौके पर इन वैनों की कार्यप्रणाली का डेमो भी देखा और इसे अपराध जांच में क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत बताया।
इससे साक्ष्य संग्रहण प्रक्रिया अधिक कुशल और सटीक हो जाएगी। जांच एजेंसियों और फोरेंसिक विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। कोई भी व्यक्ति साक्ष्य नष्ट करके या उनसे छेड़छाड़ करके आरोपी को सजा से नहीं बचा सकेगा। मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने इस अवसर पर यह भी कहा कि इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और अपराधों में दोषसिद्धि की दर निश्चित रूप से बढ़ेगी।




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