
नए आपराधिक कानून में फोरेंसिक जांच पर बढ़ते फोकस के चलते देश के हर जिले में फोरेंसिक प्रयोगशालाएं खोलने की योजना पर काम हो रहा है। मौजूदा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
फोरेंसिक जांच की अनिवार्यता और बढ़ती आवश्यकता
नए आपराधिक कानून के तहत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है। इससे फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं पर अचानक काम का दबाव बढ़ने की उम्मीद है। मौजूदा फोरेंसिक क्षमता अपेक्षा से काफी कम है, इसलिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर प्रयोगशालाओं को नवीनतम उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, जांच और नीति-निर्माण में सहायता के लिए फोरेंसिक डेटा का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
फोरेंसिक शिक्षा और प्रशिक्षण को प्राथमिकता
फोरेंसिक विज्ञान में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस केंद्रों और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे विशेषज्ञता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
साइबर अपराधों की जांच के लिए नए प्रयोगशाला केंद्र
देश भर में फोरेंसिक सुविधाओं के विस्तार के तहत साइबर अपराधों की वैज्ञानिक जांच को बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के सीआईएस प्रभाग के समक्ष पांच अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं (NCFL) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
डीएनए विश्लेषण और साइबर फोरेंसिक सुविधाएं
वर्तमान में फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय (DFSS) के तहत सात केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (CFSL) डीएनए विश्लेषण की सुविधा प्रदान कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 32 राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) और 97 क्षेत्रीय FSL कार्यरत हैं। इनमें से 30 राज्य FSL में डीएनए विश्लेषण की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 13 प्रयोगशालाओं में साइबर फोरेंसिक जांच की सुविधा दी जा रही है।
इस योजना के लागू होने से आपराधिक जांच की दक्षता में सुधार होगा और न्याय प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।




Add comment