
केंद्र सरकार ने देश में अपराध जांच व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अगले पांच वर्षों में पूरे भारत में फोरेंसिक लैब्स का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने के लिए 30 हजार करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। लक्ष्य है कि 2029 तक हर राज्य में कम से कम एक फोरेंसिक विश्वविद्यालय या केंद्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला (CFSL) स्थापित हो सके।
यह ऐलान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक के दौरान किया। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
देश में बढ़ेगा फोरेंसिक ढांचा, 7 से बढ़कर 15 CFSL होने की तैयारी
गृह मंत्री शाह ने बताया कि इस समय देश में सात केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जबकि आठ नई CFSL स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा, राज्यों की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं, फोरेंसिक वैन और क्षेत्रीय लैब्स को मजबूत करने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अनुदान दिए जा चुके हैं।
फोरेंसिक शिक्षा और प्रशिक्षण को मिलेगा बड़ा विस्तार
अमित शाह ने बताया कि फोरेंसिक शिक्षा को मानकीकृत करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 2029 तक 35 हजार छात्र नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) में अध्ययन करेंगे। NFSU की 100% प्लेसमेंट की उपलब्धि इसे देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल करती है। अब तक 14 कैंपस स्थापित हो चुके हैं और यह विश्वविद्यालय 100 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है।
पिछले चार वर्षों में 16 हजार से ज्यादा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। अगले चार वर्षों में इस संख्या को तीन गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य है। NFSU ने अब तक 46 पेटेंट दर्ज किए हैं, जिनमें से 30 सिर्फ 2024 में हुए। दुनिया के 96 देशों ने 103 MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि 117 संगठन भी संस्थान के साथ सहयोग कर रहे हैं।
2029 तक पूरा होगा ‘3 साल में न्याय’ का लक्ष्य
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 2019 से मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की 12 बैठकें की गई हैं, जिनसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि एफआईआर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया तीन वर्षों के भीतर पूरी हो, जिसके लिए फोरेंसिक तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
सरकार की यह व्यापक पहल देश में फोरेंसिक विज्ञान, अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा दे सकती है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और मजबूत तकनीकी ढांचे के साथ भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के अग्रणी फोरेंसिक नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो सकता है।




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