
लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में साइबर अपराध और फॉरेंसिक जांच को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 32वीं और 35वीं वाहिनी पीएसी के करीब 700 आरक्षी स्तर के पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस बल को साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति से अवगत कराना और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक पीएसी डॉ. आरके स्वर्णकार, आईपीएस ने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए साक्ष्य संकलन में गंभीरता और व्यावहारिक प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और तकनीक का दुरुपयोग बढ़ा है, ऐसे में पुलिसकर्मियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना समय की मांग है।
डॉ. स्वर्णकार ने यूपीएसआईएफएस को उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट फॉरेंसिक संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका लाभ प्रदेश की कानून व्यवस्था को मिल रहा है। उनका कहना था कि जिस तरह अपराधी अत्याधुनिक तकनीक और ज्ञान का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी स्तर पर प्रशिक्षित पुलिस बल ही अपराधों का सफलतापूर्वक खुलासा कर सकता है।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि पुलिस जवान कानून व्यवस्था की असली नींव होते हैं। वे आम जनता के बीच रहकर साक्ष्य संकलन, अपराध नियंत्रण और अभिसूचना जैसे अहम कार्य करते हैं। उन्होंने वर्तमान समय में साइबर फॉरेंसिक को साइबर अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम बताया और कहा कि इसकी बुनियादी जानकारी हर पुलिसकर्मी के लिए आवश्यक हो गई है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. आरके स्वर्णकार और सेनानायक प्राची सिंह को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया, जबकि उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रशिक्षण सत्रों में साइबर और फॉरेंसिक से जुड़े विभिन्न विषयों पर कुल 11 व्याख्यान दिए गए। इनमें डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. श्रुति दास गुप्ता, डॉ. निताशा अग्रवाल, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. मनीष राय, डॉ. पलक अनेजा और डॉ. अमित कार्तिकेय सहित अन्य विषय विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर गिरिजेश राय, उप निरीक्षक शैलेंद्र सिंह समेत कई अन्य अधिकारी और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने का अवसर मिला, जिससे भविष्य में अपराध नियंत्रण की क्षमता और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।




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