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राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय: भारत से दुनिया तक फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान में बना नई पहचान

राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय: भारत से दुनिया तक फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान में बना नई पहचान

राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय: भारत से दुनिया तक फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान में बना नई पहचान

नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) आज फॉरेंसिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। शिक्षा, वैज्ञानिक जांच, तकनीकी विकास और शोध को एक साथ जोड़ने वाले अपने मॉडल के जरिए विश्वविद्यालय ने फॉरेंसिक साइंस और आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वर्ष 2009 में गुजरात के गांधीनगर में स्थापित इस विश्वविद्यालय को अक्टूबर 2020 में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (Institution of National Importance) का दर्जा दिया गया था। गुजरात सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, पिछले एक दशक में विश्वविद्यालय ने तेज़ी से विकास किया है और फॉरेंसिक विज्ञान तथा आपराधिक न्याय के कई क्षेत्रों में अपनी पहुंच का विस्तार किया है।

दुनिया भर में बढ़ रही NFSU की पहचान

संस्थापक कुलपति डॉ. जे. एम. व्यास के नेतृत्व में NFSU ने ऐसा शैक्षणिक मॉडल विकसित किया है, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जांच को एक साथ जोड़ा गया है।

विश्वविद्यालय ने युगांडा के जिन्जा (Jinja) में अपना अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित किया है। इसके अलावा, अब तक 96 देशों के पेशेवरों को विभिन्न फॉरेंसिक विषयों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को देखते हुए कई अन्य देशों ने भी अपने यहां NFSU का परिसर स्थापित करने में रुचि दिखाई है।

जानकारी के अनुसार, मई 2026 तक विश्वविद्यालय के भारत और विदेशों में कुल 13 कैंपस संचालित होने की उम्मीद है।

वैज्ञानिक जांच को मिली नई मजबूती

NFSU की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में स्वदेशी मोबाइल फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन वैन का विकास भी शामिल है। इन वैन का उद्देश्य अपराध स्थल पर वैज्ञानिक जांच को तेज करना और साक्ष्य संग्रह की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

वर्तमान में देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट तैनात हैं। अत्याधुनिक फॉरेंसिक उपकरणों से लैस और प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा संचालित ये टीमें 24 घंटे पुलिस और जांच एजेंसियों को अपराध स्थल पर साक्ष्य जुटाने और वैज्ञानिक विश्लेषण में सहायता प्रदान करती हैं।

इस पहल का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों को अधिक मजबूत बनाना है।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत बढ़ावा मिल रहा स्वदेशी नवाचार को

फॉरेंसिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए NFSU ने फॉरेंसिक इनोवेशन काउंसिल और स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी (SSIP) के सहयोग से फॉरेंसिक इनोवेशन सेंटर की स्थापना की है।

यह केंद्र स्वदेशी फॉरेंसिक तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करता है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यहां विकसित 20 से अधिक फॉरेंसिक उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, सिंगापुर और कई यूरोपीय देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय को अपनी कई तकनीकों के लिए भारत और अमेरिका दोनों में पेटेंट भी प्राप्त हो चुके हैं।

कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच में निभाई भूमिका

NFSU ने देश के कई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक मामलों और आपदा प्रबंधन अभियानों में भी अहम भूमिका निभाई है। गुजरात सरकार के अनुसार, जून 2025 में अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास हुए एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे में जान गंवाने वाले 265 लोगों की पहचान डीएनए प्रोफाइलिंग के माध्यम से करने में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इसके अलावा विश्वविद्यालय ने खिलाड़ियों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर न्यूट्रिशनल टेस्टिंग फॉर स्पोर्ट्सपर्सन्स (CoE-NSTS) भी स्थापित किया है। यहां खिलाड़ियों के पोषण स्तर का आकलन किया जाता है और प्रतिबंधित पदार्थों की जांच की जाती है। इसे देश की अपनी तरह की एक अनूठी सुविधा माना जाता है।

आधुनिक तकनीकों पर हो रहा शोध

NFSU में छात्र और शोधकर्ता कई उभरती हुई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • डीएनए फॉरेंसिक
  • डिजिटल फॉरेंसिक
  • ड्रोन फॉरेंसिक
  • साइबर जांच
  • फॉरेंसिक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग

ये सभी शोध क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप हैं।

डिजिटल युग की चुनौतियों पर भी फोकस

हाल ही में विश्वविद्यालय में वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा का विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसका विषय था “माय लाइफ: माय स्टोरी”। इस दौरान उन्होंने फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक तकनीक जैसी आधुनिक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि डिजिटल दौर में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

आध्यात्मिक गुरु रमेशभाई ओझा ने भी विश्वविद्यालय का दौरा कर इसकी सराहना की और इसे फॉरेंसिक विज्ञान तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व क्षमता का उदाहरण बताया।

आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में अग्रणी संस्थान

गृह मंत्रालय के अधीन संचालित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी वैज्ञानिक जांच, अनुसंधान और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के माध्यम से भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

तेजी से हो रहा विस्तार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों पर शोध और नवाचार की दिशा में लगातार प्रयासों ने NFSU को भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान का एक अग्रणी संस्थान बना दिया है।

Asmita Sarkar

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