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कोलकाता के SRFTI में छात्र आंदोलन तेज, 11 दिसंबर तक बंद रहेगा कैंपस; छात्रों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) में छात्रों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच संस्थान प्रशासन ने परिसर को 11 दिसंबर 2026 तक बंद रखने का फैसला किया है। इससे पहले भी संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा चुकी है। प्रशासन के इस फैसले के बाद छात्रों का विरोध और तेज हो गया है।

छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सुरक्षा और शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करने के बजाय सख्त कदम उठा रहा है। वहीं, संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि परिसर में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी हैं। इस विवाद के चलते छात्रों की पढ़ाई, कार्यशालाओं और सामान्य परिसर जीवन पर भी असर पड़ रहा है।

27 सितंबर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, दो घटनाओं के बाद बढ़ा तनाव

SRFTI में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 27 सितंबर 2026 को हुई थी। उस दिन परिसर के मुख्य सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विरोध कर रहे छात्रों और संगठन के सदस्यों के बीच झड़प हो गई थी।

छात्रों ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। दूसरी ओर, संगठन के सदस्यों ने भी छात्रों पर कार्यक्रम में बाधा डालने और अपने लोगों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद परिसर में तनाव बढ़ गया और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

इसके बाद 4 अक्टूबर को बंगीय हिंदू जागरण मंच की रैली के दौरान संस्थान के मुख्य द्वार के पास एक और विवाद हुआ। छात्रों ने इस दौरान भी बाहरी लोगों पर हमले और अभद्रता के आरोप लगाए। इन घटनाओं के बाद छात्रों ने परिसर में धरना शुरू कर दिया। उनकी प्रमुख चिंताओं में सुरक्षा, निजता और परिसर में स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार शामिल था।

11 दिसंबर तक बंद रहेगा संस्थान का परिसर, छात्रों को 24 घंटे में जगह खाली करने का निर्देश

लगातार बढ़ते तनाव के बीच SRFTI प्रशासन ने 16 अक्टूबर को फिल्म और इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया (EDM) विंग की शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही परिसर और छात्रावासों में रह रहे सभी छात्रों को 24 घंटे के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था।

शुरुआत में फिल्म और डिजिटल मीडिया की कक्षाएं 13 नवंबर तक स्थगित की गई थीं। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने के बाद प्रशासन ने परिसर बंद रखने की अवधि बढ़ाकर 11 दिसंबर 2026 कर दी है।

संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फिल्म और EDM दोनों विंग के डीन से चर्चा करने के बाद स्थिति की समीक्षा की गई और पहले जारी आदेश को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।

दो संविदा शिक्षकों की सेवाएं समाप्त, पांच रिसोर्स पर्सन भी हटाए गए

छात्रों ने प्रशासन पर विरोध प्रदर्शन के दौरान उनका समर्थन करने वाले शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

छात्रों के अनुसार, संस्थान ने अब तक दो संविदा फैकल्टी सदस्यों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा पांच रिसोर्स पर्सन की सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। एक अन्य फैकल्टी सदस्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

छात्रों का दावा है कि इस शिक्षक पर प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता रंजन पालित को कार्यशाला आयोजित करने के लिए संस्थान परिसर में बुलाने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।

छात्रों ने इसे शैक्षणिक गतिविधियों में हस्तक्षेप बताते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों और विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई से संस्थान का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

छात्रों ने भोजन, पानी और इंटरनेट जैसी सुविधाएं बंद करने का लगाया आरोप

छात्रों ने ‘यह प्रशासनिक विफलता कब तक जारी रहेगी?’ शीर्षक से एक बयान जारी कर संस्थान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बयान में आरोप लगाया गया है कि शैक्षणिक गतिविधियां बंद करने के साथ-साथ छात्रों को भोजन, पीने के पानी, बिजली और वाई-फाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित किया गया है। छात्रों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में उनके लिए पढ़ाई जारी रखना और परिसर में सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया है।

उनके मुताबिक, मौजूदा हालात उनकी सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं हैं। छात्रों ने इसे संस्थान के इतिहास का असाधारण संकट बताते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

प्रशासन ने क्या सफाई दी?

दूसरी ओर, SRFTI प्रशासन ने परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के फैसले का बचाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों और अन्य लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।

प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों पर डराने-धमकाने, शारीरिक दुर्व्यवहार और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। अधिकारियों का यह भी दावा है कि कुछ छात्र बाहरी तत्वों से प्रभावित होकर मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, परिसर खाली करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद कुछ आंदोलनकारी छात्र छात्रावास की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं।

छात्रों की क्या हैं मांगें?

छात्रों की मुख्य मांग है कि संस्थान में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां जल्द शुरू की जाएं और परिसर का माहौल पहले की तरह सुरक्षित बनाया जाए। वे प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले छात्र संघ ने कुलपति के इस्तीफे, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के हस्तक्षेप की मांग भी उठाई थी। छात्रों का कहना है कि वे अपनी पढ़ाई, फिल्म निर्माण, शूटिंग और कार्यशालाओं को फिर से शुरू करना चाहते हैं।

छात्रों का तर्क है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में विवाद का समाधान बातचीत और जवाबदेही के जरिए होना चाहिए। परिसर बंद करने और शैक्षणिक गतिविधियां रोकने से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

कब सामान्य होंगी SRFTI की शैक्षणिक गतिविधियां?

फिलहाल SRFTI में छात्रों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। परिसर को 11 दिसंबर तक बंद रखने के फैसले से छात्रों की पढ़ाई और संस्थान की नियमित गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। हालांकि, प्रशासन की ओर से सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां दोबारा शुरू करने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संस्थान प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से इस विवाद का समाधान निकल पाएगा? देश के प्रतिष्ठित फिल्म शिक्षण संस्थानों में शामिल SRFTI में लंबे समय तक पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियां प्रभावित रहना छात्रों के साथ-साथ संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है।

फिलहाल छात्रों की मांग है कि उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए, शिक्षकों और छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा हो और परिसर में सामान्य शैक्षणिक जीवन जल्द बहाल किया जाए।

Raish Ahmed

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