
OpenAI के Sora और Google के Veo जैसे टूल्स ने वीडियो क्रिएशन की दुनिया बदल दी है। अब कुछ ही मिनटों में हाई-क्वालिटी विजुअल तैयार हो जाते हैं। लेकिन इसी आसान तकनीक का दूसरा पहलू यह है कि YouTube पर तेजी से ऐसे वीडियो बढ़ रहे हैं, जिन्हें AI स्लॉप या ब्रेनरॉट कंटेंट कहा जा रहा है — यानी ऐसा कंटेंट जो देखने में आकर्षक हो, लेकिन उसके पीछे कोई सार या जानकारी न हो।
वीडियो एडिटिंग कंपनी Kapwing की नई रिपोर्ट के मुताबिक, YouTube पर मौजूद करीब 21% वीडियो इसी श्रेणी में आते हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
कैसे हुई जांच?
Kapwing ने स्टडी के लिए एक बिल्कुल नया YouTube अकाउंट बनाया, ताकि एल्गोरिदम पर पुराने पसंद या वॉच हिस्ट्री का कोई असर न पड़े। इस टेस्ट में शुरुआती 500 YouTube शॉर्ट्स देखे गए। पहले 16 वीडियो में कोई AI स्लॉप नहीं मिला, लेकिन कुल 500 में से 104 वीडियो पूरी तरह AI-जनरेटेड पाए गए। यह आंकड़ा बताता है कि AI जनरेटेड कंटेंट अब YouTube के ऑर्गेनिक फीड का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
कौन सा देश AI स्लॉप सबसे ज्यादा देख रहा है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI स्लॉप कंटेंट देखने में दक्षिण कोरिया सबसे आगे है।दक्षिण कोरिया के टॉप AI चैनल्स को अब तक 8.25 अरब व्यूज मिले हैं। सबसे बड़ा चैनल Three Minutes Wisdom, जिसे अकेले 2.02 अरब व्यूज मिले। इस चैनल पर अधिकतर ऐसे वीडियो मिलते हैं जिनमें पालतू जानवरों को अवास्तविक रूप से जंगली जानवरों को हराते दिखाया जाता है।
पाकिस्तान और अमेरिका भी टॉप लिस्ट में
AI स्लॉप कंटेंट की लोकप्रियता सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है। दूसरे स्थान पर पाकिस्तान है, जहां के टॉप AI स्लॉप चैनलों को 5.34 अरब व्यूज मिले। तीसरे नंबर पर अमेरिका है, कुल 3.39 अरब व्यूज के साथ। अमेरिका का टॉप चैनल Cuentos Facientes को अब तक 1.28 अरब व्यूज मिल चुके हैं। इसकी अनुमानित कमाई करीब 2.66 मिलियन डॉलर रही। इन आंकड़ों से साफ है कि AI जनरेटेड वीडियो अब मनोरंजन की मुख्य धारा का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
ऑफिस वर्क में भी आ गया AI स्लॉप
रिपोर्ट का एक बड़ा खुलासा यह है कि AI स्लॉप सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं रहा।
मई 2025 तक इंटरनेट पर मौजूद 50% से अधिक लिखित कंटेंट AI द्वारा लिखा गया माना जा रहा है। अमेरिका में 10 में से 4 कर्मचारी अपने प्रोफेशनल वर्क में इस तरह के बेअसर AI कंटेंट से जूझ रहे हैं। IT और कंसल्टिंग सेक्टर पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखने की बात कही गई है। ये वही कंटेंट हैं जो दिखने में प्रोफेशनल लगता है, लेकिन असल वर्कफ्लो में कोई वैल्यू नहीं जोड़ता।
TikTok ने उठाए कदम
जहां YouTube पर AI स्लॉप तेजी से बढ़ रहा है, वहीं TikTok ने इसे पहचानने और नियंत्रित करने के फीचर्स लॉन्च किए हैं। TikTok के नए टूल्स यूजर फीड में AI कंटेंट की पहचान करते हैं और चाहें तो AI वीडियो को कम दिखाने का विकल्प देते हैं। यह कदम प्लेटफॉर्म पर क्वालिटी कंटेंट को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आगे की चुनौती क्या है?
AI वीडियो और टेक्स्ट जनरेशन ने क्रिएटर्स के लिए रास्ता आसान किया है, लेकिन इसके साथ ही भरोसे और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में प्लेटफॉर्म्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी असली, उपयोगी और पत्रकारिक कंटेंट को AI स्लॉप से कैसे अलग किया जाए और एल्गोरिदम को कैसे अपग्रेड किया जाए ताकि वह मूल्यवान कंटेंट को प्राथमिकता दे सके।
AI कंटेंट का बढ़ता दौर कहाँ तक जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि डिजिटल दुनिया की गुणवत्ता को बचाने के लिए प्लेटफॉर्म्स और यूजर्स—दोनों की भूमिका अहम रहने वाली है।




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