
अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने अपनी नई रिपोर्ट में अडानी समूह पर पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ आक्रामक कानूनी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है। संस्था का कहना है कि समूह द्वारा दर्ज कराए गए लम्बे और महंगे मुक़दमे भारत में खोजी पत्रकारिता और प्रेस स्वतंत्रता पर सीधा असर डाल रहे हैं।
RSF ने अडानी समूह से इन मुकदमों को वापस लेने की मांग की है और भारतीय संसद से स्ट्रैटेजिक लॉसूट्स अगेंस्ट पब्लिक पार्टिसिपेशन (SLAPP) के खिलाफ स्पष्ट कानून बनाने का आग्रह किया है। संस्था का कहना है कि मौजूदा माहौल में ऐसा कानून मीडिया की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
2017 से लगातार ‘कानूनी दबाव’
RSF की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2017 से अडानी समूह ने विभिन्न पत्रकारों और मीडिया संगठनों पर अभूतपूर्व स्तर पर मानहानि के दीवानी और आपराधिक मामलों को आगे बढ़ाया है। इन मामलों का सीधा असर कम से कम 15 पत्रकारों के काम पर पड़ा है। इनमें देश के कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
इसके बावजूद, अब तक किसी भी मुकदमे में किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान को दोषी करार नहीं दिया गया है। लेकिन कई मामलों में अदालतों ने अस्थायी रोक, यानी गैग ऑर्डर, जारी किए, जिनसे पत्रकारों को अपनी कहानी या जांच को रोकना पड़ा—यहाँ तक कि जब मामलों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ था।
RSF का कहना है कि यह रणनीति पत्रकारों को मानसिक और आर्थिक रूप से थकाने का तरीका बन गई है, जिसमें मुकदमे ही सजा का रूप ले लेते हैं। फिलहाल भी कम से कम नौ पत्रकार कानूनी लड़ाई का सामना कर रहे हैं। इनमें स्वतंत्र खोजी पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता (सात मामले), अबीर दासगुप्ता (चार मामले) और रवि नायर (दो मामले) प्रमुख हैं।
RSF की सख्त टिप्पणी
RSF की साउथ एशिया डेस्क की प्रमुख सेलिया मर्सिए ने कहा कि अडानी समूह की ओर से लगातार दायर किए जा रहे मुक़दमे मीडिया की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं। उनके अनुसार, किसी बड़े कॉरपोरेट समूह की जांच को हतोत्साहित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है और न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह इस तरह के दबावों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। SLAPP मामलों के खिलाफ कानून बनाना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट में कई प्रमुख मामलों का जिक्र
RSF की रिपोर्ट में द वायर, इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (EPW), न्यूज़क्लिक, न्यूज़लॉन्ड्री, द इकोनॉमिक टाइम्स जैसे संस्थानों के साथ-साथ पत्रकार रवि नायर, अभिसार शर्मा, रवीश कुमार, परंजॉय गुहा ठाकुरता और अन्य के मामलों का विस्तार से उल्लेख है।
कई मामलों में एक ही रिपोर्ट पर दीवानी और आपराधिक—दोनों तरह के मुकदमे दायर किए गए, जिससे कानूनी दबाव और बढ़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार, RSF द्वारा भेजे गए सवालों पर अडानी समूह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भारत में कॉरपोरेट जवाबदेही और स्वतंत्र पत्रकारिता दोनों कमजोर पड़ सकती हैं।




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