
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए एआई से तैयार की गई सामग्री को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। मंगलवार को जारी आदेश में सरकार ने साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी किसी भी डिजिटल सामग्री पर स्पष्ट पहचान वाला लेबल या वॉटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा। यह कदम ऑनलाइन कंटेंट की पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रामक जानकारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार के निर्देशों के अनुसार, अब मानव द्वारा बनाई गई और एआई या किसी डिजिटल टूल की मदद से तैयार, बदली या संशोधित की गई सामग्री को साफ तौर पर पहचाना जाना चाहिए। इसमें ऑडियो, वीडियो, फोटो, ग्राफिक या किसी भी तरह की डिजिटल जानकारी शामिल है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार एआई लेबल या मेटाडाटा जोड़ने के बाद उसे हटाया, छिपाया या दबाया नहीं जा सकेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यूजर यह समझ सकें कि कंटेंट वास्तविक है या तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे अपनी सेवाओं का किसी भी तरह से गैरकानूनी इस्तेमाल न होने दें। अगर कोई यूजर एआई का उपयोग करके गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी से जुड़ी या बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री बनाता या साझा करता है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे रोकने के लिए स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। सरकार का मानना है कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के साथ कंटेंट मॉडरेशन को और मजबूत करने की जरूरत है।
नए आदेश में यूजर्स को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को चेतावनी देना अनिवार्य होगा कि नियमों के उल्लंघन पर दंड या सजा हो सकती है। यदि कोई यूजर नियमों का पालन नहीं करता, तो उसका अकाउंट निलंबित किया जा सकता है या संबंधित सामग्री को हटाया जा सकता है।
कार्रवाई की समयसीमा को भी काफी कम कर दिया गया है। पहले जहां प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती थी, अब किसी भी उल्लंघन की सूचना तीन घंटे के अंदर देना जरूरी होगा। इसके साथ ही, संबंधित मामले में तुरंत उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद डिजिटल स्पेस को सुरक्षित, जिम्मेदार और भरोसेमंद बनाना है। एआई से बनी सामग्री की स्पष्ट पहचान से यूजर्स यह समझ पाएंगे कि कौन-सी जानकारी वास्तविक है और कौन-सी कृत्रिम रूप से तैयार की गई है। इससे न केवल गलत सूचना पर लगाम लगेगी, बल्कि डिजिटल मीडिया में भरोसा भी मजबूत होगा।




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