
लोकतंत्र, नेतृत्व और भागीदारी आधारित शासन व्यवस्था की समझ स्कूली स्तर पर विकसित करने के उद्देश्य से तमिलनाडु सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली बार छात्रों के बीच चुनाव कराए जाएंगे, जिनके माध्यम से ‘स्टूडेंट पार्लियामेंट’ यानी छात्र संसद का गठन होगा। यह पहल राज्य सरकार के ‘मगीझ मुत्रम’ (Magizh Mutram) कार्यक्रम के तहत लागू की जा रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र से इस कार्यक्रम को सरकारी स्कूलों में शामिल किया है। इसके तहत छात्र चुनाव प्रचार, घोषणापत्र तैयार करने, मतदान करने और छात्र मंत्रिमंडल बनाने जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे।
बचपन से लोकतंत्र और नेतृत्व की समझ विकसित करने पर जोर
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल छात्रों में कम उम्र से ही नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी, जवाबदेही और सामूहिक निर्णय लेने की समझ विकसित करेगी। साथ ही वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से सीख सकेंगे।
इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक सरकारी स्कूल में पांच छात्र सदन (Student Houses) बनाए जाएंगे। इनका नाम तमिल संस्कृति और भौगोलिक परंपरा से जुड़े कुरिंजी, मुल्लई, मरुथम, नेइथल और पालई रखा गया है।
हर छात्र सदन में एक हाउस कैप्टन और एक स्टूडेंट मिनिस्टर चुना जाएगा। हाउस कैप्टन का चयन लॉटरी या हाथ उठाकर किया जाएगा, जबकि स्टूडेंट मिनिस्टर का चुनाव पूरी मतदान प्रक्रिया के जरिए होगा।
इस तरह होगी पूरी चुनाव प्रक्रिया
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम के अनुसार, हाउस कैप्टन के चयन की प्रक्रिया 3 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 6 जुलाई को स्टूडेंट मिनिस्टर पद के उम्मीदवार चुनाव प्रचार करेंगे और अपना घोषणापत्र छात्रों के सामने प्रस्तुत करेंगे। घोषणापत्र में वे बताएंगे कि चुने जाने पर स्कूल और छात्रों के लिए क्या काम करेंगे।
मतदान 7 जुलाई को कराया जाएगा। सभी छात्र अलग-अलग बैलेट के माध्यम से पांचों छात्र सदनों के लिए अपने-अपने स्टूडेंट मिनिस्टर का चुनाव करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरह तैयार किया गया है ताकि छात्र मतदान के महत्व को समझ सकें।
किन छात्रों को मिलेगा चुनाव लड़ने का मौका?
सरकार ने चुनाव लड़ने के लिए कक्षावार पात्रता भी तय की है। प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 5 के छात्र उम्मीदवार बन सकेंगे। मिडिल स्कूलों में कक्षा 8, हाई स्कूलों में कक्षा 9 और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा 11 के विद्यार्थियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा।
छात्र संभालेंगे पांच अहम विभागों की जिम्मेदारी
चुनाव के बाद चुने गए स्टूडेंट मिनिस्टर्स को स्कूल के पांच प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें शिक्षा, छात्र कल्याण एवं सुरक्षा, सूचना एवं संचार, पर्यावरण एवं जलवायु कार्रवाई तथा स्वास्थ्य, स्वच्छता और सफाई जैसे विभाग शामिल हैं। इन विभागों का आवंटन चुने गए छात्र मंत्रियों के बीच लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को जिम्मेदारी निभाने, टीम के साथ काम करने और स्कूल की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
जेंडर संतुलन पर भी विशेष ध्यान
सरकार ने सह-शिक्षा (Co-educational) वाले स्कूलों के लिए जेंडर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के विशेष निर्देश भी जारी किए हैं। यदि किसी छात्र सदन का हाउस कैप्टन लड़का होगा तो उसी सदन का स्टूडेंट मिनिस्टर लड़की होगी। इसी तरह यदि हाउस कैप्टन लड़की होगी तो स्टूडेंट मिनिस्टर लड़का चुना जाएगा। इससे छात्र नेतृत्व में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
10 जुलाई को लेंगे शपथ
चुनाव में विजयी छात्र प्रतिनिधि 10 जुलाई को अपने पद की शपथ लेंगे। प्रत्येक छात्र सदन का अपना अलग झंडा होगा। हाउस कैप्टन और स्टूडेंट मिनिस्टर को विशेष बैज दिए जाएंगे। स्कूल में होने वाली प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में प्रदर्शन दर्ज करने के लिए स्कोरबोर्ड भी बनाया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक को छात्र संसद की गतिविधियों के संचालन और मार्गदर्शन के लिए समन्वयक नियुक्त किया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल छात्रों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें लोकतंत्र, नेतृत्व, संवाद और जिम्मेदारी जैसे जीवन कौशल भी सिखाएगी। इससे वे भविष्य में जागरूक नागरिक के रूप में समाज में अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभा सकेंगे।




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