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ऑनलाइन शिक्षा से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगी डिजिटल लर्निंग

पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था में पढ़ाई का केंद्र स्कूल की कक्षा, तय पाठ्यक्रम, शिक्षक और ब्लैकबोर्ड या व्हाइटबोर्ड होता है। सदियों से शिक्षा का यह तरीका सफलतापूर्वक अपनाया जाता रहा है। हालांकि, अब तकनीक ऐसे ऑनलाइन साधन उपलब्ध करा रही है, जिनकी मदद से पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया को एक नए स्तर पर ले जाया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी ने लगभग हर क्षेत्र के कामकाज को प्रभावित किया था। शिक्षा और प्रशिक्षण का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि, जिन शिक्षण संस्थानों के पास पहले से ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था मौजूद थी, वे इस संकट के असर को काफी हद तक कम करने में सफल रहे।

पढ़ाने के लिए नए डिजिटल साधन

महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) की मांग लगातार बढ़ी है। इसमें महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की बढ़ती जरूरत की भी अहम भूमिका रही।

लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर शिक्षकों ने घर से ही विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया। इस दौरान गूगल क्लासरूम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विद्यार्थियों को असाइनमेंट देने, उनके काम पर नजर रखने, डिजिटल कॉपी जांचने और उस पर नोट्स लिखने, पढ़ाई का शेड्यूल तैयार करने और सवाल देने जैसे कामों के लिए किया गया।

वहीं, ManageBac एक ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसकी मदद से शिक्षक तय पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराते हैं और विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखते हैं। Zoom के जरिए शिक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विद्यार्थियों से सीधे जुड़ सकते हैं। इससे ऑनलाइन कक्षा में भी आमने-सामने पढ़ाने जैसा अनुभव मिलता है।

आगे का रास्ता यही है कि ऑनलाइन शिक्षा को पारंपरिक पढ़ाई की व्यवस्था के साथ जोड़कर इस्तेमाल किया जाए। तकनीक की मदद से विद्यार्थियों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है और पढ़ाई के तरीकों में लगातार सुधार किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को प्रशासनिक और दूसरे कामों में कम समय लगाना पड़ेगा और वे बेहतर तरीके से पढ़ाने पर ध्यान दे सकेंगे।

हर क्षेत्र के लिए अलग ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था जरूरी

भारत जैसे विशाल देश में ऑनलाइन शिक्षा के लिए एक ही तरह का मॉडल सभी जगह कारगर नहीं हो सकता। यहां शहरी क्षेत्रों की औसत साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 65 प्रतिशत से कुछ कम है। दोनों क्षेत्रों की जरूरतें और उपलब्ध संसाधन अलग-अलग हैं।

शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट कैंपस और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं भविष्य की शिक्षा का हिस्सा बन सकती हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था तैयार करनी होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आसान लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम

भारत के कई सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। खासकर महिला शिक्षकों की संख्या कम होना एक बड़ी चुनौती है। इस कमी को दूर करने के लिए नीतियां बनाई गई हैं और उन पर काम भी किया जा रहा है। हालांकि, इस दिशा में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

स्टेटिस्टा के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में ग्रामीण भारत में वायरलेस मोबाइल कनेक्शन की संख्या 50 करोड़ से अधिक हो गई थी। दूरसंचार नेटवर्क की इस व्यापक पहुंच का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए व्यावहारिक और कम खर्च वाले डिजिटल मॉडल तैयार करने में किया जा सकता है।

कम संसाधनों और सीमित खर्च में कई वर्चुअल स्कूल शुरू किए जा सकते हैं। इसके लिए 3G या 4G नेटवर्क, सीमित सुविधाओं वाला लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) चलाने के लिए डेस्कटॉप या लैपटॉप, कंप्यूटर को चार्ज करने के लिए सोलर चार्जिंग यूनिट और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार पाठ्यक्रम की जरूरत होगी।

इस व्यवस्था में विद्यार्थियों को छोटे वीडियो के जरिए पढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, गणित या विज्ञान के किसी पाठ को 5 से 10 मिनट से भी कम समय के वीडियो में आसान तरीके से समझाया जा सकता है। इसके बाद कंप्यूटर में लगे कैमरे और माइक्रोफोन की मदद से विद्यार्थी दूर बैठे शिक्षक से बातचीत कर सकते हैं और अपनी शंकाओं का समाधान पा सकते हैं।

विद्यार्थियों का मूल्यांकन बहुविकल्पीय सवालों (MCQ) के जरिए किया जा सकता है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगइन करके परीक्षा दे सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की गति कम होने की समस्या को देखते हुए परीक्षाओं को ऑफलाइन भी आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद दिन के अंत में सभी विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और जवाब एक साथ ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड किए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल दो या तीन क्लिक की जरूरत होगी, जिसे शिक्षक की सहायता के लिए नियुक्त व्यक्ति भी आसानी से कर सकता है।

इस तरह विद्यार्थियों को हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांव के स्कूल जाने की जरूरत कम हो सकती है। वे अपने घर के आसपास ही रहकर पढ़ाई कर सकेंगे। इससे खासतौर पर उन ग्रामीण विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता है, जिनके लिए स्कूल तक पहुंचना रोजाना एक बड़ी चुनौती है।

Raish Ahmed

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