Edinbox Hindi

पद्मश्री सीतांशु यशचंद्र का अहमदाबाद विश्वविद्यालय में संदेश, एआई सोचने की क्षमता को कर सकता है कमजोर

प्रसिद्ध गुजराती कवि और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार सीतांशु यशचंद्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित खतरों को लेकर शैक्षणिक संस्थानों को चेतावनी दी है। वे अहमदाबाद विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।

यशचंद्र ने कहा कि AI छात्रों को तकनीकी रूप से कुशल तो बना सकता है, लेकिन यह उनकी स्वतंत्र सोच और नैतिक विवेक को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आगाह किया कि जहां इंसानों के पास किसी कार्य को करने या न करने का विकल्प होता है, वहीं AI में विकल्प चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती।

“AI कालिदास जैसा लिख सकता है, लेकिन सोच नहीं सकता”
गुजराती साहित्य के इस विद्वान ने उदाहरण देते हुए कहा, “AI शेक्सपियर की तरह सॉनेट और कालिदास की तरह कविता लिख सकता है, लेकिन यह नहीं पूछ सकता कि ‘क्या मैं लिखना चाहता हूं?’”

उन्होंने ज़ोर दिया कि भारतीय समाज को इस तकनीक की क्षमताओं से पहले यह सोचना चाहिए कि AI क्या नहीं कर सकता।

विश्वविद्यालय बनते जा रहे हैं प्रशिक्षण केंद्र, नहीं रह गया विचार का स्थान?
उन्होंने तीखे अंदाज़ में सवाल उठाया कि क्या आज के विश्वविद्यालय महज़ प्रशिक्षण संस्थान या सर्कस बनते जा रहे हैं। “क्या हम सर्कस में हैं, जहां कोई रिंग मास्टर हमें बताता है कि क्या करना है?”

सीतांशु यशचंद्र ने यह भी कहा कि यूरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में भी यही हो रहा है — वे ऐसी जगह बनते जा रहे हैं जहां से केवल कुशल लेकिन विचारहीन लोग निकल रहे हैं।

“क्या मुझे इसे लिखना चाहिए” — AI नहीं पूछ सकता यह सवाल
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “क्या मुझे यह लिखना चाहिए?” जैसे प्रश्न केवल मनुष्य ही पूछ सकता है।

“कृत्रिम रूप से प्रशिक्षित स्नातक या विशेषज्ञ यह सवाल नहीं पूछ सकते। यह मानवीय सोच का क्षेत्र है, जिसे AI नहीं छू सकता।”

दीक्षांत समारोह में 833 छात्रों को मिली डिग्री
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि विभिन्न विषयों में 833 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। 6 छात्रों को डॉक्टरेट की उपाधि, और 5 छात्रों को स्वर्ण पदक उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और नेतृत्व के लिए प्रदान किए गए।

सीतांशु यशचंद्र का यह भाषण मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और AI के प्रभावों को लेकर एक गंभीर विचार-विमर्श की जरूरत की ओर इशारा करता है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed