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नासा चलाएगा चांद पर ट्रेन !

सुनकर हर किसी को हैरत होगी, मगर है यह सच। जी हां, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) असंभव से लगने वाले इस मिशन पर काम कर रही है। चांद पर ट्रेन चलाने के मिशन पर। और, वह न सिर्फ इस योजना पर गंभीरता से जुटी है, बल्कि अच्छा-ख़ासा कदम भी इस दिशा में आगे बढ़ा दिया है। नासा का इरादा पहले से ही चांद पर इंसानों को भेजकर वहां बस्तियां बसाने का था, अब उसने एक कदम और आगे बढ़ते हुए वहां ट्रांसपोर्ट प्रणाली विकसित करने का बीड़ा उठा लिया है। 

बताया जा रहा है कि नासा चांद पर इंसानों के परिवहन का सबसे अच्छा तरीका खोज रहा है। चूंकि हवाई परिवहन सिस्टम के वहां फेल होने की आशंका है, लिहाजा वह वहां एक रेलवे सिस्टम बनाना चाहता है ताकि इंसान चांद पर ज्यादा दूर तक जा सके। अगर नासा अपने इस इरादे में कामयाब हो गया, तो चांद पर ट्रेन का चलना एक कल्पना नहीं बल्कि हकीकत होगा। एक ऐसे सपने का धरातल पर उतरना, जिसके बारे में शायद कभी किसी ने सोचा भी न हो। 

नासा की यह योजना भले ही फिलहाल एक साइंस फिक्शन फिल्म की तरह लगती है, लेकिन इसके वैज्ञानिकों का विश्वास है कि अगले कुछ दशकों में वे इसमें सफल हो जाएंगे। यूं ही नहीं वाशिंगटन में नासा के प्रमुख जॉन नेल्सन कहते हैं, ‘इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे हमारे साथी वैज्ञानिकों की नजर में कोई भी कार्य असंभव नहीं है और वे किसी भी कार्य को यह कहकर नहीं छोड़ देते कि नहीं हो पाएगा या असंभव कार्य है।’

यहां यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि पिछले कुछ वर्षों में चांद पर कई असंभव जैसे प्रोजेक्ट कामयाब भी हुए हैं। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) द्वारा चंद्रयान-3 की लैंडिंग इसकी ताज़ा मिसाल है। चीन ने हाल ही में चंद्रमा से जुड़ा एक मिशन लॉन्च किया है। वैसे भी चांद को लेकर पिछले कुछ सालों में तमाम देशों की दिलचस्पी बढ़ी है। और, अमेरिका तो इस मामले में शुरू से अग्रणी रहा है। शायद तभी उसकी स्पेस एजेंसी नासा असंभव से लगने वाले इस मिशन को मुमकिन बनाने में जुट गई है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाकायदा एक योजना बनाकर सधे क़दमों के सहारे इस दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है। काल्पनिकता को वास्तविकता में बदलने के इस मिशन यानी चांद पर रेलवे लाइन बिछाने के काम के लिए नासा की टीम फंड भी जुटा रही है। नासा की यह योजना इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स (एनआईएसी) कार्यक्रम का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट में चांद पर रेलवे लाइन बिछाने के अलावा मंगल ग्रह पर इंसानों और माल के ट्रांसफर के लिए अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करना भी है। फिलवक्त ऐसी कुल छह परियोजनाएं चल रही हैं। 

बहरहाल, दूसरे ग्रहों पर इंसानों के परिवहन का इंतज़ाम करने में जुटी नासा फ्लोट (FLOAT) नाम की टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है। यह चंद्रमा पर मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पेलोड डिलीवरी का विकल्प भी प्रदान करेगा। नासा ने चुंबक से चलने वाले इस रेलवे की फंडिंग में बढ़ोतरी की है। FLOAT का मतलब फ्लेक्सिबल लेविटेशन ऑन ए ट्रैक है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी की ओर से संचालित की जाने वाली यह परियोजना है और इसे नासा के इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट प्रोग्राम अध्ययन के दूसरे चरण में बनाया जा रहा है।

अब सवाल उठता है कि चांद पर रेलवे काम कैसे करेगा? तो इसका जवाब है कि चंद्रमा पर यह विश्वसनीय, ऑटोमैटिक और कुशल पेलोड परिवहन प्रदान करेगा। यह सतह के चारों और कई टन रेगोलिथ (चंद्रमा की मिट्टी) के ट्रांसपोर्ट में भूमिका निभा सकता है। चांद पर बेस बनाने में चंद्रमा की मिट्टी कई तरह से अंतरिक्ष यात्रियों की ओर से इस्तेमाल की जा सकेगी। नासा के रोबोटिक्स इंजीनियर एथन स्केलर का अनुमान है कि एक दिन में यह 100 टन कार्गो ट्रांसपोर्ट कर सकता है। 

वह कहते हैं, ‘फ्लोट एक लपेटी जा सकने वाली कालीन की तरह होगी। आवश्यक्ताओं के हिसाब से इसे दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा। पहियों, पैरों या पटरियों वाले चंद्रमा रोबोट के विपरीत फ्लोट रोबोटों में कोई हिलने वाला भाग नहीं होगा, और ट्रैक पर उड़ेंगे। यानी चांद पर रेलवे धरती की तरह दो पटरियों वाला नहीं होगा। लेकिन होगा रेल ट्रांसपोर्ट प्रणाली की ही तरह। 

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बहुत से वैज्ञानिक इस मिशन के साकार होने की कोई गारंटी नहीं मानते,  लेकिन चांद पर रेल परियोजना एयरोस्पेस मिशन का हिस्सा तो बन ही चुकी है। और, अगर यह संभव हो गया तो निःसंदेह यह मानव जाति के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। चांद पर इंसानों की उपस्थिति भी मुमकिन होगी और इंसानों की चहल-कदमी भी। 

 

रईस अहमद 'लाली'

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