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सुप्रीम कोर्ट में ‘लापता लेडीज’ ! 

गुजरे 1 मार्च को सिनेमाघरों में एक फिल्म रिलीज हुई थी- ‘लापता लेडीज’। इस फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिला। फिल्म की सिंपल-सी कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। छोटे बजट और सामान्य-सी स्टारकास्ट वाली इस फिल्म ने दुनियाभर में करीब 30 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। सिनेमाघरों में धूम मचाने के बाद जब इसे 26 अप्रैल को नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया, तब भी इसका दर्शकों में खूब क्रेज देखा गया। यानी सिनेमाघरों के बाद ओटीटी पर भी इस फिल्म का जलवा बरकरार रहा। और शायद यही वजह है कि भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी इस फिल्म को लेकर एक उत्सुकता हुई और इस उत्सुकता का परिणाम कि ये पिक्चर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ तक पहुंच गयी। 

जी हां, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पहल पर ही इस फिल्म ‘लापता लेडीज’ की 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था हुई। सुप्रीम कोर्ट के संचार प्रभाग ने न सिर्फ यह निर्णय लिया बल्कि कोर्ट ऑडिटोरियम के प्रशासनिक भवन परिसर में इसकी स्पेशल स्क्रीनिंग का इंतज़ाम भी किया। ये स्क्रीनिंग सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों, उनके सहयोगियों और रजिस्ट्री में मौजूद सभी सदस्यों के लिए हुई। स्पेशल स्क्रीनिंग के इस विशेष मौके पर फिल्म के प्रोड्यूसर आमिर खान शामिल हुए, तो साथ फिल्म की डायरेक्टर किरण राव भी।

बहरहाल, क्या इत्तेफ़ाक़ कि ‘लापता लेडीज’ जहां आमिर खान की पत्नी रहीं निर्देशक किरण राव का आइडिया थी, तो सुप्रीम कोर्ट में इस फिल्म की स्क्रीनिंग का आइडिया चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पत्नी कल्पना दास का। लेडीज की बात और इत्तेफ़ाक़ के दोनों गुणसूत्र का हिस्सा भी महिलाएं। यह अलग बात कि सीजेआई के जेंडर सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनी ‘लापता लेडीज’ में अपने नए पतियों के घर जा रही दो दुल्हनों की गलती से अदला-बदली हो जाती है। इसके बाद ही शुरू होता है नए माहौल में मज़ेदार तरीके से खुद को जानने का खूबसूरत सफ़र। 

‘लापता लेडीज’ को जानना यहाँ ज़रूरी है और मौजूं भी। दरअसल, ‘लापता लेडीज’ में एक नई नवेली दुल्हन फूल की कहानी दिखाई गई है। शादी के बाद वो अपने पति दीपक के साथ ट्रेन से ससुराल जा रही होती है। ट्रेन में उसकी तरह ही कई दुल्हनें हैं, जो लाल जोड़ा और घूंघट ओढ़े रहती हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब दीपक अपने घर पहुंचता है और उसे पता चलता है कि जिसे वो घर लाया है, वो उसकी पत्नी नहीं बल्कि कोई और है। इसके बाद फिल्म की कहानी में नया मोड़ आता है और फिर एक के बाद एक दिलचस्प घटनाएं घटती हैं।

छोटी-सी इस फिल्म में किरदार भी भले छोटे नाम वाले रहे मगर उन्होंने काम बड़ा किया। नितांशी गोयल के साथ इसमें प्रतिभा रांटा और स्पर्श श्रीवास्तव लीड रोल में थे। वहीं रवि किशन, छाया कदम, सतेंद्र सोनी जैसे कलाकार सपोर्टिंग रोल में नजर आए। तभी सीजेआई ने इसे इस लायक समझा कि इसे सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने की एक पहल बताया। लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता के लिए कोर्ट की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों में से एक। ‘लापता लेडीज’ की पटकथा और संवाद लिखने वाली लेखिका स्नेहा देसाई ने भी कभी कहा था कि निर्माता चाहते थे कि दर्शक फूल और पुष्पा के पात्रों के माध्यम से सामाजिक स्थिति के बारे में जागरूक हों। समाज से जुड़ी एक शिक्षाप्रद कहानी यानी लापता लेडीज। 

सुप्रीम कोर्ट में कई ऐसी चीजें हैं, जिसका प्रचार नहीं किया जाता। यह कहना है चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का। निःसंदेह उनकी बात में सच्चाई है। लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि सुप्रीम कोर्ट में ‘लापता लेडीज’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का प्रचार हुआ क्योंकि यह पहल लोगों को सामाजिक स्थिति के बारे में जागरूक करने की थी। लैंगिक समानता के प्रति जागरूक करने की। एक शिक्षाप्रद सामाजिक फिल्म जिसका अपना एक सन्देश निहित है। भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना के 75वें वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों के तहत इसका प्रदर्शन एक सराहनीय कदम  

      

  

Asmita Sarkar

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