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‘नंद घर’ की मुहिम से जुड़े मनोज बाजपेयी ताकि भूख सपनों के आड़े न आये

‘अगर बचपन से पूछा खाना खाया, तो देश का कल बनाया’ – दरअसल यह एक आंदोलन है, राष्ट्रीय आंदोलन। और ख़ास यह कि इस आंदोलन से जुड़े हैं बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee), जिनकी अपनी निजी ज़िन्दगी की कहानी भी इस सूत्र वाक्य से मेल खाती है। ‘नंद घर’ की ओर से शुरू इस मुहिम के केंद्र में हैं तो बच्चे, मगर इसका मकसद बच्चों और महिलाओं के समग्र कल्याण का है। इस मुहिम का लक्ष्य समग्र स्वास्थ्य देखभाल, गुणवत्तापूर्ण पोषण और बच्चों के लिए सर्वोत्तम प्रीस्कूल शिक्षा सुनिश्चित करके भारत की भावी पीढ़ी का पोषण करना है।

जाहिर है जब ऐसे सामाजिक कार्य में शिरकत करने, उसका हिस्सा बनने की बात हो तो एक नायक भला कैसे इससे मुंह मोड़ सकता था ! हिंदी सिने जगत का यह सितारा, यह नायक सहर्ष इसका हिस्सा बन गया। वेदांता के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने मनोज बाजपेयी जैसे नायक के इस मुहिम से जुड़ने पर उनका स्वागत भी किया और खुशी भी  जताई। अनिल अग्रवाल ने कहा कि मनोज की जिंदगी की कहानी, नंद घर के आने वाली पीढ़ियों को पोषित करने के मकसद से मेल खाती है।

आपका पुनश्च स्मरण करा दें कि ‘नंद घर’ अनिल अग्रवाल फाउंडेशन का प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा भूखा न सोए। इस फाउंडेशन द्वारा पिछले साल एक न्यूट्री बार को लॉन्च किया था, जिसके तहत वाराणसी की 1,364 आंगनबाड़ियों में 50,000 बच्चों को रोजाना खाना खिलाया जाता है। नंद घर का लक्ष्य भारत भर में 14 लाख आंगनवाड़ियों को बदलना है। यानी 7 करोड़ बच्चों और 2 करोड़ महिलाओं के जीवन को बदलना। 

स्वाभाविक है कि इस दिल छू लेने वाले अभियान के लॉन्च में, मनोज बाजपेयी ने एक युवा थिएटर अभिनेता के रूप में अपनी व्यक्तिगत यात्रा के बारे में बताया और अपने अभिनय के सपने को पूरा करने के दौरान अपने दोस्तों के अमूल्य समर्थन का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने उनके लिए नियमित पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई। मनोज के सपने को परवाज़ देना सुनिश्चित किया।   

गुणवत्तापूर्ण भोजन की अहमियत पर  बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा कि किसी इंसान को अपने सपनों को पूरा करने की ताकत भरे पेट और पौष्टिक खाने से आती है। उन्होंने www.nandhome.org पर जाकर नंद घर का समर्थन करने, दान करने और उनके साथ काम करने की भी लोगों से अपील की। 

मनोज बाजपेयी ने कहा, “एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो भूख की पीड़ा से गुजरा है, मैं समझता हूं कि इसका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए प्रोजेक्ट नंद घर जैसी पहल बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह न केवल यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों को उचित पोषण मिले बल्कि एक उज्जवल भविष्य के लिए आशा, अवसर और अवसर भी मिले।”

मैककैन द्वारा परिकल्पित इस नेक कार्य या सामाजिक आंदोलन की शुरुआत पर मैककैन वर्ल्डग्रुप इंडिया के सीईओ-सीसीओ और एशिया पैसिफिक के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने भी जो कहा, वह इस मुहिम और मनोज बाजपेयी के इससे जुड़ाव की सार्थकता सिद्ध करता है। उन्होंने कहा,  “अगर हम अपने बच्चों को उनकी वास्तविक क्षमता का एहसास करने का वास्तविक मौका देना चाहते हैं, तो अच्छी तरह से पोषण देना होगा। जरूरी है। इसे उजागर करने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है कि भारत के कुछ सबसे प्रसिद्ध बेटों और बेटियों को सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी यात्रा में इस बाधा का सामना किया है।” 

Asmita Sarkar

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