फ्रांस में हाईस्कूल छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। खराब स्कूल सुविधाओं, शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी, लंबे स्कूल घंटों, भीड़भरी कक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था में पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने की शिकायतों को लेकर शुरू हुआ विरोध अब देश के कई हिस्सों तक फैल चुका है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को कई स्कूलों के प्रवेश द्वारों को छात्रों ने बंद किया। कुछ जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आईं।
फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार दोपहर तक 564 स्कूलों में किसी न किसी तरह की कार्रवाई या व्यवधान दर्ज किया गया था। शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने बताया कि देश के करीब 3,700 हाईस्कूलों में से लगभग 400 स्कूल शुक्रवार को बंद रहने की आशंका थी। कई स्कूलों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था करने की योजना बनाई।
छात्रों की प्रमुख शिकायतें क्या हैं?
छात्रों की शिकायतें केवल स्कूल की इमारतों तक सीमित नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों की कमी है, कक्षाओं में छात्रों की संख्या ज्यादा है और कुछ स्कूलों की इमारतों तथा सुविधाओं की स्थिति खराब है।
कुछ विद्यार्थियों ने लंबे स्कूल घंटों और गर्म कक्षाओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। कई छात्रों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया Parcoursup को लेकर भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई और संसाधनों से जुड़ी समस्याओं का असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
यह आंदोलन सितंबर में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ था और बाद में फ्रांस के दूसरे शहरों तक फैल गया। AFP के अनुसार 30 सितंबर तक 356 स्कूलों में प्रदर्शन या ब्लॉकेड की घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि बाद के दिनों में यह संख्या और बढ़ी।
पेरिस समेत कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़
शुक्रवार को पेरिस में कई हाईस्कूलों के प्रवेश द्वारों के आसपास आगजनी की घटनाएं हुईं। Île-de-France क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार कई स्कूलों के गेट और प्रवेश मार्ग क्षतिग्रस्त हुए। पेरिस के Gaston-Bachelard स्कूल सहित कुछ अन्य संस्थानों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं।
नांत में Nelson Mandela हाईस्कूल में लगी आग से इमारत के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा और स्कूल के कम से कम एक महीने तक बंद रहने की बात सामने आई। ल्योन समेत दूसरे शहरों में भी प्रदर्शन के दौरान आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं।
सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार किया है, लेकिन आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमलों की आलोचना की है।
कितने लोग घायल हुए और कितनी गिरफ्तारियां हुईं?
आंदोलन के दौरान छात्रों, शिक्षा कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें हैं। 2 अक्टूबर को उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने बताया कि 160 छात्र घायल हुए हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुल घायल लोगों का आंकड़ा इससे अधिक है। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से भी बड़ी संख्या में कर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है।
गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। न्याय मंत्री जेराल्ड डरमानिन के अनुसार आंदोलन शुरू होने के बाद करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत नाबालिग बताए गए हैं। सरकार ने हिंसक घटनाओं और संपत्ति के नुकसान के मामलों में कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
सरकार ने माता-पिता की जिम्मेदारी को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है और कुछ मामलों में नाबालिगों द्वारा की गई तोड़फोड़ के नुकसान की भरपाई के लिए अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। यह सरकार का प्रस्तावित रुख है, न कि प्रत्येक मामले में पहले से तय कानूनी निष्कर्ष।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कई जगह तनाव बढ़ा है। पुलिस ने कुछ स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, कुछ छात्रों के घायल होने के मामलों में पुलिस कार्रवाई की जांच भी हो रही है।
Euronews के अनुसार 14 वर्षीय एक छात्र के पुलिस की गोली से गंभीर रूप से घायल होने के मामले में फ्रांस के Defender of Rights ने भी संज्ञान लिया है। इसके अलावा अन्य छात्रों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पुलिस की कार्रवाई को लेकर आलोचना करने वाले संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में नाबालिगों वाले प्रदर्शन में बल प्रयोग को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि हिंसक घटनाओं और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुलिस की कार्रवाई आवश्यक है।
सरकार ने छात्रों की मांगों पर क्या कहा?
शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने छात्रों की कुछ शिकायतों को जायज माना है, लेकिन उनका कहना है कि आंदोलन के कुछ हिस्सों में हिंसक तत्व शामिल हो गए हैं। सरकार ने छात्रों और अभिभावकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने की अपील की है।
2 अक्टूबर को छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों की शिक्षा मंत्री के साथ बैठक भी हुई। बैठक के बाद छात्र संगठनों ने कहा कि उन्हें अपनी मांगों पर पर्याप्त ठोस कदम नहीं मिले हैं और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
फ्रांस में 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होना है और ऐसे समय में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। सरकार और उसके समर्थकों की ओर से वामपंथी पार्टी La France Insoumise (LFI) और उसके नेता ज्यां-ल्यूक मेलेंशों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि कुछ राजनीतिक समूह आंदोलन को प्रभावित कर रहे हैं।
दूसरी ओर, LFI और मेलेंशों ने सरकार की आलोचना की है और छात्रों की मांगों तथा पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर उनका समर्थन किया है। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के दावे और छात्रों की अपनी शिकायतों को अलग-अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में छात्रों ने भी यह कहा है कि उनका आंदोलन स्कूलों की वास्तविक समस्याओं से जुड़ा है।
आंदोलन अब किस दिशा में जा रहा है?
2 अक्टूबर को छात्र संगठनों ने सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। देश के कई हिस्सों में स्कूलों के संचालन पर इसका असर पड़ा है। सरकार की ओर से स्कूलों को सुरक्षित रखने और हिंसा रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।
फिलहाल फ्रांस में छात्र आंदोलन दो समानांतर मुद्दों के बीच चल रहा है—एक तरफ छात्रों की शिक्षा, स्कूल सुविधाओं और संसाधनों से जुड़ी मांगें हैं, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, संपत्ति के नुकसान और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि शिक्षा से जुड़ी मांगों पर कितने ठोस कदम उठाए जाते हैं।




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