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अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना होगा मुश्किल? विदेशी छात्रों के लिए OPT पर 1 लाख डॉलर तक शुल्क का प्रस्ताव

अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद वहीं नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों को विदेशी छात्रों के लिए नौकरी संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की सिफारिश करने पर भारी शुल्क देना पड़ सकता है। प्रस्ताव के तहत शुरुआती आवेदन के लिए 70,000 डॉलर और इसके बाद के आवेदन के लिए 30,000 डॉलर शुल्क निर्धारित किया गया है। इस तरह शुरुआती अवधि और उसके बाद के विस्तार को मिलाकर शुल्क 1 लाख डॉलर तक पहुंच सकता है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने 8 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में प्रस्तावित नियम जारी किया। इसका असर खास तौर पर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव है, लागू हो चुका नियम नहीं। अंतिम निर्णय से पहले इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं। 

क्या है OPT कार्यक्रम और कितना देना पड़ सकता है शुल्क?

अमेरिका में एफ-1 (F-1) छात्र वीजा पर पढ़ाई करने वाले विदेशी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान या डिग्री पूरी करने के बाद अपने विषय से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर देने के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम चलाया जाता है।

इस कार्यक्रम के तहत सामान्य तौर पर पात्र विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकतम 12 महीने तक काम कर सकते हैं। विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़े पात्र पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को इसके बाद 24 महीने का अतिरिक्त विस्तार भी मिल सकता है। इस तरह पात्र STEM विद्यार्थियों के लिए काम करने की कुल अवधि तीन साल तक हो सकती है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, किसी एफ-1 विद्यार्थी के लिए पहली बार OPT की सिफारिश करने पर संबंधित शैक्षणिक संस्थान को 70,000 डॉलर का शुल्क देना होगा। इसके बाद की प्रत्येक OPT सिफारिश, जिसमें STEM OPT विस्तार भी शामिल है, के लिए 30,000 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित है।

यह शुल्क सीधे छात्र से लेने के बजाय संबंधित संस्थान पर लगाया जाना प्रस्तावित है। हालांकि, प्रस्ताव में संस्थानों को इसकी लागत छात्रों, अन्य विद्यार्थियों या नियोक्ताओं पर डालने की संभावना भी बताई गई है। इसलिए इसका वास्तविक आर्थिक बोझ किस पर पड़ेगा, यह संस्थानों के फैसलों पर भी निर्भर करेगा। 

4.20 लाख विदेशी छात्र लेते हैं OPT का लाभ

नेचर की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में लगभग 4.20 लाख अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने OPT कार्यक्रम का लाभ लिया। यह कार्यक्रम विदेशी विद्यार्थियों को अमेरिकी कंपनियों में काम करने का अनुभव हासिल करने और आगे रोजगार के अवसर तलाशने में मदद करता है।

यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट में दिए गए अनुमानों के मुताबिक, भागीदारी में 44 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका जताई गई है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के आकलन के अनुसार, इस प्रस्ताव से विश्वविद्यालयों पर सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। शुल्क के कारण संस्थानों को यह तय करना होगा कि वे किन विद्यार्थियों के लिए OPT की सिफारिश कर सकते हैं और इसके खर्च का प्रबंधन कैसे करेंगे। 

विश्वविद्यालयों और शोध क्षेत्र पर क्या होगा असर?

इस प्रस्ताव को लेकर विशेषज्ञों की चिंता केवल विद्यार्थियों की संख्या तक सीमित नहीं है। अमेरिका में विदेशी छात्रों की मौजूदगी विश्वविद्यालयों की आय, शोध गतिविधियों और कुशल पेशेवरों की उपलब्धता से भी जुड़ी हुई है।

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री माइकल क्लेमेंस के विश्लेषण के अनुसार, यदि प्रस्तावित शुल्क के कारण OPT में भागीदारी घटती है, तो अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ट्यूशन फीस तथा अन्य स्रोतों से होने वाली आय में सालाना 2.5 अरब से 4.2 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्री इना गंगुली के अनुसार, इसका असर विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति से आगे भी जा सकता है। यदि अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर सीमित होते हैं, तो बेहतर विकल्प रखने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थी दूसरे देशों में पढ़ाई और रोजगार तलाश सकते हैं। इससे अमेरिकी विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित करने में कठिनाई हो सकती है। 

पहले भी वीजा नियमों में सख्ती कर चुका है ट्रंप प्रशासन

ट्रंप प्रशासन ने विदेशी पेशेवरों के लिए H-1B वीजा व्यवस्था को लेकर भी सख्त कदम उठाए हैं। सितंबर 2025 में नए H-1B वीजा आवेदनों से संबंधित 1 लाख डॉलर के शुल्क की घोषणा की गई थी। इस व्यवस्था को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आए।

हालांकि, H-1B वीजा और OPT अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को कुछ विशेष पेशों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जबकि OPT विदेशी विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक काम का अनुभव हासिल करने का अवसर देता है।

इस बीच, अमेरिका में नए अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। प्रस्तावित OPT शुल्क ऐसे समय सामने आया है, जब विदेशी छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए अमेरिकी आव्रजन नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों को आशंका है कि लगातार बदलते नियम अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए कम आकर्षक बना सकते हैं। 

भारतीय छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव?

भारत से हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी अमेरिका में विज्ञान, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान और दूसरे विषयों की पढ़ाई करने जाते हैं। इनमें से कई विद्यार्थी डिग्री पूरी करने के बाद वहीं नौकरी करना चाहते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए OPT कार्यक्रम अमेरिकी रोजगार बाजार में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण रास्ता है।

यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों के लिए विदेशी विद्यार्थियों को OPT की सिफारिश करना महंगा हो सकता है। कुछ संस्थान ऐसी सिफारिशें देने में अधिक सावधानी बरत सकते हैं या खर्च की भरपाई के लिए दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं। इसका असर उन भारतीय विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जो पढ़ाई के खर्च के साथ भविष्य में मिलने वाली नौकरी और संभावित आय को ध्यान में रखकर अमेरिका जाने का फैसला करते हैं।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कितने भारतीय विद्यार्थियों को इसका सीधा नुकसान होगा। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्ताव अंतिम रूप में किस तरह लागू होता है और विश्वविद्यालय इसके वित्तीय प्रभावों से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

अभी छात्रों को क्या करना चाहिए?

अमेरिका में पढ़ाई कर रहे या वहां दाखिला लेने की योजना बना रहे विद्यार्थियों को फिलहाल घबराने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद नियम में बदलाव हो सकता है या इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।

विद्यार्थियों को अपने विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय से संपर्क बनाए रखना चाहिए और OPT तथा STEM OPT से जुड़े मौजूदा नियमों को समझना चाहिए। साथ ही, अमेरिका में पढ़ाई का फैसला करते समय ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, छात्रवृत्ति, रोजगार के अवसर और वीजा संबंधी शर्तों का आकलन करना भी जरूरी है।

फिलहाल OPT की मौजूदा प्रक्रिया और शुल्क लागू हैं। प्रस्ताव को अंतिम नियम समझकर अपनी पढ़ाई या रोजगार की योजना में जल्दबाजी में बदलाव न करें। आगे की स्थिति के लिए अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और अपने विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें। 

Raish Ahmed

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