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ब्रिटेन में पढ़ाई के बाद नौकरी करने का मौका, लेकिन सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों को नहीं मिलेगा लाभ

ब्रिटेन में उच्च शिक्षा हासिल करने और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खबर है। ब्रिटिश सरकार ने अपने 2026 के बजट में पोस्ट-स्टडी वर्क यानी ग्रेजुएट वीजा को लेकर एक अहम बदलाव का एलान किया है। इसके तहत चुनिंदा विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दो साल तक ब्रिटेन में रहने और काम करने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, इस घोषणा को सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए दो साल का वीजा जारी रखने के फैसले के रूप में नहीं देखना चाहिए। सरकार ने यह सुविधा केवल उन विश्वविद्यालयों के ग्रेजुएट्स के लिए प्रस्तावित की है, जो निर्धारित मानकों के अनुसार उच्च स्तर का वीजा अनुपालन करते हैं और जहां से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के रोजगार के परिणाम बेहतर हैं।

यह बदलाव भारतीय छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रिटेन में पढ़ाई के बाद नौकरी का अनुभव हासिल करना उनके विदेश में शिक्षा लेने के फैसले का एक बड़ा हिस्सा होता है। नए नियमों के तहत अब विश्वविद्यालय का चुनाव करते समय उसकी पढ़ाई के साथ-साथ वीजा अनुपालन और रोजगार के रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

UK Budget 2026 में Graduate Visa को लेकर क्या घोषणा हुई?

ब्रिटेन के 28 अक्टूबर 2026 को पेश किए गए बजट में सरकार ने साफ किया है कि वह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित करना चाहती है। इसके लिए उन विश्वविद्यालयों के छात्रों को दो साल का ग्रेजुएट वीजा देने की व्यवस्था की जाएगी, जिनका वीजा अनुपालन रिकॉर्ड अच्छा है और जहां से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं।

यह फैसला ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति में किए जा रहे व्यापक बदलावों का हिस्सा है। सरकार एक ओर कम और मध्यम कौशल वाली नौकरियों के लिए इमिग्रेशन नियमों को सख्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर उच्च कौशल वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पेशेवरों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

दरअसल, ब्रिटिश सरकार ने पहले ग्रेजुएट वीजा की सामान्य अवधि दो साल से घटाकर 18 महीने करने का फैसला किया था। यह बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नियमों में शामिल है। अब बजट में नई घोषणा के जरिए बेहतर वीजा अनुपालन और रोजगार परिणाम वाले विश्वविद्यालयों के ग्रेजुएट्स के लिए दो साल की अवधि बनाए रखने का रास्ता तैयार किया गया है।

इसका मतलब है कि दूसरे विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए 18 महीने की अवधि का नियम लागू रहेगा, जबकि तय मानकों पर खरे उतरने वाले संस्थानों के छात्रों को दो साल का लाभ मिल सकेगा। पीएचडी और अन्य डॉक्टरेट डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के लिए ग्रेजुएट वीजा की अवधि तीन साल है।

किन छात्रों को मिलेगा दो साल का Graduate Visa?

ब्रिटिश सरकार की नई घोषणा में दो मुख्य शर्तों पर जोर दिया गया है। पहली, छात्र ने ऐसे विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की हो जिसका वीजा अनुपालन रिकॉर्ड बेहतर हो। दूसरी, उस विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले छात्रों के रोजगार के परिणाम अच्छे हों।

हालांकि, अभी सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किसी विश्वविद्यालय को ‘हाई-कॉम्प्लायंस’ की श्रेणी में रखने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह रोजगार के बेहतर परिणाम तय करने के लिए भी कोई विस्तृत पैमाना या योग्य विश्वविद्यालयों की सूची जारी नहीं की गई है।

इसलिए फिलहाल किसी विश्वविद्यालय को दो साल के ग्रेजुएट वीजा के लिए योग्य बताना जल्दबाजी होगी। भारतीय छात्रों को दाखिला लेने से पहले ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (Home Office) की ओर से जारी होने वाले नए नियमों और आधिकारिक सूची का इंतजार करना चाहिए।

2027 से लागू होने वाले Graduate Visa के नियम

छात्रों की श्रेणीवीजा की अवधि
स्नातक और मास्टर डिग्री के छात्र, 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन2 साल
स्नातक और मास्टर डिग्री के छात्र, 1 जनवरी 2027 से आवेदन18 महीने
पात्र हाई-कॉम्प्लायंस यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स2 साल का प्रस्तावित लाभ
पीएचडी और अन्य डॉक्टरेट डिग्री के छात्र3 साल

ध्यान दें: हाई-कॉम्प्लायंस विश्वविद्यालयों के लिए दो साल की नई व्यवस्था की घोषणा बजट में की गई है, लेकिन इसके लागू होने की तारीख और विस्तृत पात्रता नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए छात्रों को इसे फिलहाल घोषित नीतिगत बदलाव के रूप में समझना चाहिए, न कि पहले से लागू नियम के रूप में।

भारतीय छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

ब्रिटेन भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई के सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। यहां की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने और वैश्विक स्तर पर अनुभव हासिल करने का अवसर भी मिलता है।

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 को समाप्त हुए एक साल में भारतीय नागरिकों को 82,523 स्टूडेंट वीजा जारी किए गए। इस मामले में भारतीय छात्र दूसरे स्थान पर रहे। चीन के छात्रों को सबसे अधिक स्टूडेंट वीजा मिले थे। हालांकि, पिछले साल की तुलना में भारतीय छात्रों को जारी किए गए वीजा की संख्या में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसी अवधि में भारतीय नागरिकों को सबसे अधिक ग्रेजुएट रूट वीजा भी मिले। जून 2026 तक समाप्त हुए एक साल में 64,495 भारतीय नागरिकों को इस श्रेणी में वीजा दिया गया। इससे पता चलता है कि भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद ब्रिटेन में काम करने का अवसर कितना महत्वपूर्ण है।

वहीं, सितंबर 2026 के दाखिला सत्र को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अंतरराष्ट्रीय प्रवेश मंच के आंकड़ों में सितंबर 2026 के लिए विश्वविद्यालयों की ओर से जारी किए गए कन्फर्मेशन ऑफ एक्सेप्टेंस फॉर स्टडी (CAS) की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह एक प्रवेश मंच का आंकड़ा है, इसे ब्रिटेन के सभी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के दाखिले में 27 प्रतिशत गिरावट के रूप में नहीं देखना चाहिए।

ऐसे माहौल में दो साल के पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की सुविधा को कुछ विश्वविद्यालयों के लिए बनाए रखने का फैसला भारतीय छात्रों को राहत दे सकता है। इससे उन्हें डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी तलाशने, इंटरव्यू देने और अपने करियर की शुरुआत करने के लिए अधिक समय मिल सकता है।

अब यूनिवर्सिटी चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नई नीति के बाद ब्रिटेन में दाखिले के लिए विश्वविद्यालय का चुनाव पहले से ज्यादा सोच-समझकर करना होगा। अब केवल यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग या उसकी लोकप्रियता देखना पर्याप्त नहीं होगा।

भारतीय छात्रों को यह भी जांचना चाहिए कि संबंधित विश्वविद्यालय का वीजा अनुपालन रिकॉर्ड कैसा है, वहां से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को किस तरह की नौकरियां मिलती हैं और कंपनियों के साथ उसके संबंध कितने मजबूत हैं।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय की फीस, रहने का खर्च, उपलब्ध स्कॉलरशिप और पढ़ाई के बाद रोजगार की संभावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। खासकर उन छात्रों के लिए यह जानकारी जरूरी होगी जो विदेश में पढ़ाई के लिए परिवार की बड़ी बचत या एजुकेशन लोन का इस्तेमाल करते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों के सामने भी अब एक अहम सवाल है कि ब्रिटिश सरकार हाई-कॉम्प्लायंस यूनिवर्सिटी और मजबूत रोजगार परिणाम को किस आधार पर परिभाषित करेगी। अगर इसके मानक स्पष्ट नहीं होते हैं, तो छात्रों के लिए पहले से यह तय करना मुश्किल होगा कि किस विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से उन्हें दो साल के वीजा का लाभ मिल सकता है।

High Potential Individual Visa का भी होगा विस्तार

ब्रिटेन सरकार ने केवल ग्रेजुएट वीजा को लेकर ही बदलाव नहीं किया है, बल्कि हाई पोटेंशियल इंडिविजुअल (HPI) वीजा का दायरा बढ़ाने की भी घोषणा की है।

इस बदलाव के तहत दुनिया के शीर्ष 150 विश्वविद्यालयों से पात्र डिग्री हासिल करने वाले ग्रेजुएट्स को इस वीजा के लिए आवेदन करने का अवसर देने की योजना है। इसके साथ ही इस वीजा के लिए आवेदन की अधिकतम संख्या (कैप) भी बढ़ाई जाएगी।

HPI वीजा उन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए है जो ब्रिटेन में नौकरी की संभावनाएं तलाशना चाहते हैं और जिन्होंने दुनिया के चुनिंदा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल की है। इस विस्तार से भारतीय छात्रों को भी लाभ मिल सकता है, बशर्ते वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हों।

सितंबर 2027 में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्र क्या करें?

अगर आप सितंबर 2027 में ब्रिटेन की किसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले अपनी पसंद के विश्वविद्यालय से यह जानकारी लें कि उसका वीजा अनुपालन रिकॉर्ड कैसा है और क्या वह नई नीति के संभावित मानकों पर खरा उतर सकता है।

साथ ही, विश्वविद्यालय के करियर और प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जांच करें। केवल इस उम्मीद में किसी संस्थान में दाखिला न लें कि वहां से दो साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा मिल जाएगा। जब तक ब्रिटिश सरकार योग्य विश्वविद्यालयों की सूची और नए नियम जारी नहीं करती, तब तक इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।

नए नियमों की जानकारी के लिए ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक वेबसाइट GOV.UK Graduate Visa पर नजर रखें।

कुल मिलाकर, ब्रिटेन सरकार का यह फैसला भारतीय छात्रों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिलेगा। आने वाले समय में विश्वविद्यालयों का वीजा अनुपालन रिकॉर्ड और छात्रों को मिलने वाले रोजगार के अवसर दाखिले के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में छात्रों को केवल विदेशी डिग्री नहीं, बल्कि पढ़ाई के बाद करियर की संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर अपना विश्वविद्यालय चुनना होगा।

Raish Ahmed

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