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नेपाल में फिर भड़का Gen-Z का आक्रोश, सड़कों पर उतरे युवा कर रहे विरोध-प्रदर्शन

Gen-Z anger flares again in Nepal, youth take to the streets to protest

नेपाल में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं। राजधानी काठमांडू में Gen-Z समूहों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया, जिसने कुछ ही हफ्तों पहले हुए हिंसक प्रदर्शनों की याद ताजा कर दी। उस दौरान संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों पर हमला हुआ था, साथ ही प्रमुख राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया गया था। अब सवाल यह है कि जिन युवाओं ने बदलाव की उम्मीद के साथ मौजूदा नेतृत्व को आगे बढ़ाया था, वही आज सरकार के खिलाफ क्यों उतर आए हैं?

राष्ट्रपति को सौंपा गया मेमोरेंडम

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Gen-Z आंदोलन से जुड़े 23 संगठनों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को एक विस्तृत मेमो सौंपा है। इसमें बताया गया है कि सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उनके ‘विद्रोह’ की मुख्य मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।

युवाओं का कहना है कि 8–9 सितंबर को हुए Gen-Z विद्रोह के बाद बनी अंतरिम सरकार से उम्मीदें थीं कि वह बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाएगी, लेकिन अब तक वह बुनियादी वादे भी पूरा नहीं कर सकी है।

Gen-Z की प्रमुख मांगें क्या हैं?

मेमोरेंडम में आंदोलनकारी समूहों ने सरकार के सामने पांच बड़ी मांगें रखी हैं:

  1. बड़े भ्रष्टाचार मामलों पर सख्त कार्रवाई
  2. सीधे जनता द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री की व्यवस्था के लिए संवैधानिक संशोधन
  3. विद्रोह के दौरान ‘कथित नरसंहार’ के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
  4. घायल प्रदर्शनकारियों का उचित मेडिकल इलाज
  5. शहीद घोषित लोगों के परिवारों को सही और सम्मानजनक मुआवजा

युवाओं का आरोप है कि सरकार फिलहाल सिर्फ चुनाव कराने की तैयारियों पर ध्यान दे रही है, जबकि Gen-Z विद्रोह का मकसद केवल जल्दी चुनाव कराना नहीं बल्कि शासन व्यवस्था में गहरा बदलाव लाना था।

क्या नेपाल फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है?

Gen-Z गठबंधन ने स्पष्ट कहा है कि सरकार को तुरंत उनकी मांगों पर अमल शुरू करना चाहिए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति से भी अपील की है कि अगर मौजूदा सरकार विफल होती है तो वह हस्तक्षेप कर नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू करें। 

युवाओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन का अगला चरण शुरू करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो नेपाल में एक बार फिर व्यापक असंतोष देखने को मिल सकता है, जो हाल की अशांति की तरह हिंसक भी हो सकता है। 

एडइनबॉक्स टीम

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