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ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, 22 यूनिवर्सिटीज से हटाया सेना अधिकारियों का फेलोशिप प्रोग्राम

ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, 22 यूनिवर्सिटीज से हटाया सेना अधिकारियों का फेलोशिप प्रोग्राम

ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, 22 यूनिवर्सिटीज से हटाया सेना अधिकारियों का फेलोशिप प्रोग्राम

अमेरिका में उच्च शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। United States Department of Defense ने देश की 22 प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और नीति संस्थानों को प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन (PME) सूची से बाहर कर दिया है। इसका सीधा असर उन सैन्य अधिकारियों पर पड़ेगा, जो इन संस्थानों में सीनियर सर्विस कॉलेज (SSC) फेलोशिप प्रोग्राम के तहत पढ़ाई करते थे।

रक्षा विभाग के आदेश के अनुसार यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026–27 से लागू होगा। इसके साथ ही SSC फेलोशिप से जुड़ी 93 सीटों को भी समाप्त कर दिया गया है।

यह फैसला Pete Hegseth द्वारा उन संस्थानों की सूची में संशोधन के बाद लिया गया, जहां अमेरिकी सेना के अधिकारी उच्च शिक्षा और नीति अध्ययन के लिए भेजे जाते थे।

क्या होता है SSC फेलोशिप प्रोग्राम

दशकों से अमेरिकी सैन्य अधिकारी देश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज में एक वर्ष के विशेष अध्ययन कार्यक्रम के लिए भेजे जाते रहे हैं। इसे सीनियर सर्विस कॉलेज फेलोशिप कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी टेक्नोलॉजी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, रणनीति और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों का अध्ययन करते हैं।

इस फेलोशिप का उद्देश्य यह भी रहा है कि सैन्य अधिकारी देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों के साथ संवाद और नेटवर्किंग कर सकें। कई बार इन्हीं संस्थानों के छात्र आगे चलकर बड़े कारोबारी, राजनयिक या नीति निर्माता बनते हैं।

आमतौर पर यह कार्यक्रम एक साल का होता है और इसकी फंडिंग पेंटागन की ओर से की जाती रही है।

किन प्रमुख संस्थानों को सूची से हटाया गया

रक्षा विभाग की नई सूची से कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और नीति संस्थानों के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें Harvard University, Yale University, Massachusetts Institute of Technology, Princeton University, Columbia University, Georgetown University, Tufts University और Brown University जैसे नाम शामिल हैं।

इसके अलावा Carnegie Mellon University, George Washington University, Johns Hopkins University और College of William & Mary जैसे संस्थानों को भी इस सूची से बाहर कर दिया गया है।

कुछ प्रमुख थिंक टैंक और नीति संस्थान भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। इनमें Brookings Institution, Atlantic Council, Council on Foreign Relations, Center for Strategic and International Studies और Center for a New American Security जैसे संस्थान शामिल हैं।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस फैसले के पीछे सरकार की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि सेना के अधिकारियों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए जो उन्हें रणनीतिक रूप से मजबूत बनाए और अमेरिकी मूल्यों के अनुरूप नेतृत्व विकसित करे।

सरकार का मानना है कि कुछ संस्थानों में मिल रही फेलोशिप का फोकस सैन्य रणनीति के बजाय सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर ज्यादा हो गया है। प्रशासन के भीतर यह धारणा भी बनी है कि कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई से अधिक वैचारिक बहस और सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है, जो सैन्य प्रशिक्षण के उद्देश्य से मेल नहीं खाता।

फैसले का संभावित असर

यह निर्णय अमेरिकी उच्च शिक्षा और रक्षा तंत्र के संबंधों पर भी असर डाल सकता है। कई दशकों से शीर्ष विश्वविद्यालयों और सेना के बीच शोध, तकनीकी विकास और नीति अध्ययन को लेकर करीबी सहयोग रहा है।

उदाहरण के तौर पर Carnegie Mellon University अमेरिकी सेना के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंटीग्रेशन सेंटर की मेजबानी करता है, जहां सैन्य अभियानों में एआई तकनीक के उपयोग पर शोध होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इससे अमेरिका में शिक्षा, नीति और सैन्य रणनीति के बीच संबंधों को लेकर नई बहस भी शुरू हो सकती है।

Asmita Sarkar

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