
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब दक्षिण एशिया के देशों पर भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण Bangladesh में बिजली और ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। हालात को संभालने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला बिजली और ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। विश्वविद्यालय परिसरों में हॉस्टल, प्रयोगशालाएं, क्लासरूम और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाओं के कारण बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है। इन संस्थानों को कुछ समय के लिए बंद रखने से बिजली पर दबाव कम होगा और ईंधन की बचत भी हो सकेगी।
वैश्विक ऊर्जा संकट का असर
बांग्लादेश के शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आदेश पर सहायक सचिव सुल्तान अहमद के हस्ताक्षर हैं। आदेश में कहा गया है कि पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इनमें से लगभग 95 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों से होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
बिजली और ईंधन बचाने पर जोर
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करने से बिजली की खपत में काफी कमी आएगी। इसके साथ ही यातायात भी कम होगा, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत घटेगी।
सरकार ने बिजली बचत के लिए कई निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें अनावश्यक रोशनी को सीमित करना, सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर नियंत्रण और सार्वजनिक संस्थानों में ऊर्जा की खपत कम करना शामिल है।
स्कूल पहले से बंद, अब विश्वविद्यालय भी
रमजान के महीने के कारण देश में पहले से ही कई सरकारी और निजी स्कूल बंद हैं। अब विश्वविद्यालयों के बंद होने से अधिकांश शैक्षणिक संस्थान अस्थायी रूप से बंद हो जाएंगे।
सरकार ने विदेशी पाठ्यक्रम चलाने वाले स्कूलों और निजी कोचिंग सेंटरों को भी इस अवधि में अपनी गतिविधियां स्थगित करने के लिए कहा है, ताकि ऊर्जा की खपत कम की जा सके।
ईंधन बिक्री पर भी लगी सीमा
ऊर्जा संकट को देखते हुए सरकार ने ईंधन की बिक्री पर भी सीमाएं तय कर दी हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग घबराहट में बड़ी मात्रा में पेट्रोल या डीजल जमा न करें और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो।
गैस की कमी से उद्योग प्रभावित
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक देश में प्राकृतिक गैस की कमी भी गंभीर हो गई है। इस कारण सरकार को अपने पांच में से चार सरकारी उर्वरक कारखानों को बंद करना पड़ा है। उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर बिजली संयंत्रों को दिया जा रहा है, ताकि बड़े पैमाने पर बिजली कटौती से बचा जा सके।
ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीद रहा है और अतिरिक्त कार्गो की तलाश भी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के सामने ऐसी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।




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