
हाल के दिनों में खबरों और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर (University of Exeter) ब्रिटेन की पहली “मैजिक” पोस्टग्रेजुएट डिग्री शुरू कर रही है। यह सुनने में जितना रोमांचक लगता है, हकीकत उतनी ही अलग और कहीं ज्यादा अकादमिक है।
“पहली बार” नहीं, लेकिन खास जरूर
यूके की यह यूनिवर्सिटी “मैजिक डिग्री” के नाम से जिस कोर्स की पेशकश कर रही है, उसका असली नाम MA in Magic and Occult Science है। यह कोर्स फैंटेसी या जादू सिखाने वाला नहीं, बल्कि मानविकी और सामाजिक विज्ञान का हिस्सा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कोर्स 2026 में नया लॉन्च नहीं हुआ है। इसे पहले ही घोषित किया जा चुका था और लगभग 2024 से यह चल रहा है, जिसमें अब भी एडमिशन जारी हैं। यह “दुनिया का पहला” कोर्स भी नहीं है, लेकिन इस विषय पर यूके में मौजूद कुछ गिने-चुने विशेष अकादमिक प्रोग्राम्स में से एक जरूर है।
कोर्स में क्या पढ़ाया जाता है
नाम भले ही “मैजिक” हो, लेकिन पढ़ाई पूरी तरह रिसर्च और अकादमिक दृष्टिकोण पर आधारित है। इसमें जादू-टोना या अलौकिक शक्तियों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं दी जाती। इसके बजाय छात्र इन विषयों का अध्ययन करते हैं—
– जादू और टोना-टोटका का इतिहास
– लोककथाएं और मिथक
– अलग-अलग समाजों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं
– जादू, विज्ञान और चिकित्सा के बीच संबंध
– विश्वास प्रणालियों की दार्शनिक और सामाजिक समझ
सरल शब्दों में कहें तो यहां “हैरी पॉटर” जैसा कुछ नहीं सिखाया जाता, बल्कि यह समझाया जाता है कि इंसानों के विश्वास, संस्कृति और ज्ञान प्रणाली कैसे विकसित हुई।
अलग-अलग विषयों का अनोखा मेल
इस कोर्स की खासियत इसका इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच है, जिसमें कई विषयों को साथ जोड़ा गया है। इसमें इतिहास, मानवशास्त्र, साहित्य, दर्शन और धार्मिक अध्ययन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
यह प्रोग्राम यूनिवर्सिटी के “सेंटर फॉर मैजिक एंड एसोटेरिसिज्म” से भी जुड़ा है, जहां रिसर्च, चर्चा और फील्ड स्टडी को बढ़ावा दिया जाता है। इससे छात्रों को प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक सांस्कृतिक ट्रेंड्स तक समझने का मौका मिलता है।
कौन कर सकता है आवेदन
इस कोर्स की एक खास बात इसकी आसान पात्रता है। आमतौर पर आवेदन के लिए 2:2 ऑनर्स डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता चाहिए। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के छात्र इसमें आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स को एक साल (फुल-टाइम) या दो साल (पार्ट-टाइम) में पूरा किया जा सकता है, जिससे यह कई छात्रों के लिए लचीला विकल्प बन जाता है।
क्यों बढ़ रही है इस विषय में रुचि
इस तरह के कोर्स की लोकप्रियता एक बड़े ट्रेंड को दिखाती है। दुनिया भर में लोककथाओं, आध्यात्मिकता और वैकल्पिक ज्ञान प्रणालियों के प्रति रुचि बढ़ रही है। टैरो, ज्योतिष और सांस्कृतिक परंपराओं जैसे विषयों को लेकर लोग यह जानना चाहते हैं कि ये कैसे विकसित हुए और समाज पर इनका क्या असर पड़ा।
अकादमिक स्तर पर यह क्षेत्र ऐसे सवालों के जवाब खोजता है—
– इंसान अलौकिक चीजों पर विश्वास क्यों करता है?
– क्या जादू ने शुरुआती विज्ञान और चिकित्सा को प्रभावित किया?
– समाज के निर्माण में विश्वास की क्या भूमिका होती है?
हेडलाइंस से आगे की सच्चाई
“मैजिक में डिग्री” सुनकर यह एक सनसनीखेज खबर लग सकती है, लेकिन असल में यह कोर्स गंभीर अध्ययन, आलोचनात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ पर आधारित है।
यह छात्रों को अंधविश्वास नहीं, बल्कि तथ्यों और रिसर्च के आधार पर विश्वास प्रणालियों को समझने की ट्रेनिंग देता है।
पढ़ाई का नया और दिलचस्प विकल्प
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर छात्रों को जादू करना नहीं सिखा रही, बल्कि जादू और उससे जुड़े विश्वासों का गहराई से अध्ययन करना सिखा रही है।
इसलिए भले ही यह कोर्स किसी फैंटेसी कहानी जैसा लगे, लेकिन इसकी असली ताकत ज्ञान, रिसर्च और मानव समाज की गहरी समझ में छिपी है—और शायद यही “असल जादू” है।




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