
अमेरिका से फिर एक भारतीय छात्र के लापता होने की खबर आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो शहर से लापता हुए भारतीय छात्र की पहचान रुपेश चंद्रा चिंताकिंदी के रूप में हुई है। उसके बीती 2 मई से लापता होने की बात कही गयी है।
शिकागो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिये भी इस बात की पुष्टि की है और कहा है कि ‘महावाणिज्य दूतावास भारतीय छात्र रुपेश चंद्रा के लापता होने की खबर सुनकर बेहद चिंतित है। दूतावास लगातार भारतीय समुदाय और पुलिस के संपर्क में है और उम्मीद है कि जल्द ही रुपेश का पता चल जाएगा।’
शिकागो पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें रुपेश के बारे में कोई भी जानकारी मिले तो उसे पुलिस के साथ साझा करें। रुपेश बीती 2 मई से शिकागो के 4300 ब्लॉक से एन शेरिडान रोड से लापता है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका में भारत से जुड़े छात्रों को लेकर ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
इससे पहले मार्च में भी एक भारतीय छात्र लापता हो गया था, जिसका अप्रैल में शव बरामद हुआ था। हैदराबाद के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल अरफात का शव ओहायो के क्लीवलैंड से बरामद किया गया था। अरफात क्लीवलैंड यूनिवर्सिटी से आईटी में मास्टर की डिग्री की पढ़ाई करने अमेरिका गया था। मार्च में भारत के 34 वर्षीय प्रशिक्षित शास्त्रीय नर्तक अमरनाथ घोष की मिसौरी के सेंट लुइस में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पर्ड्यू विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे 23 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी छात्र समीर कामथ पांच फरवरी को इंडियाना में एक संरक्षित क्षेत्र में मृत पाए गए थे। जनवरी में इलिनोइस विश्वविद्यालय के 18 वर्षीय छात्र अकुल धवन को परिसर की एक इमारत के बाहर बेसुध पाया गया था।
हालांकि न्यू जर्सी स्थित ड्रू यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर सांगय मिश्रा कहते हैं कि इन मौतों में आपसी संबंध वाला कोई “स्पष्ट पैटर्न” नहीं है और इस नैरेटिव में नहीं फंसना चाहिए कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ये भारतीय हैं। मैंने ऐसा कुछ नहीं पाया जिससे लगे कि ये नस्लीय दुश्मनी की वजह से हो रहा है या ये नस्ल के आधार पर हमले के मामले हैं।”




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