
विदेश में पढ़ाई का सपना लगभग हर छात्र का होता है, लेकिन इसमें सबसे पहली बाधा आती है फीस की। पढाई और वहां रहने-खाने का खर्च लाखों रुपये का होता है। लिहाजा, महंगी फीस और विदेश में रहने के खर्चों के कारण अक्सर छात्र अपना यह सपना पूरा नहीं कर पाते। लेकिन अगर आपमें विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का जुनून है तो कुछ तरीके ऐसे हैं, जिसके जरिए बेहद कम फीस या फ्री में भी पढ़ाई की जा सकती है।
भारतीय छात्रों के लिए विदेश में मुफ्त में पढ़ाई करने के लिए कई संभावित विकल्प हो सकते हैं। कुछ देशों में छात्रों को स्कॉलरशिप या फेलोशिप के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकती है। अन्य विकल्पों में छात्र विभिन्न अनुसंधान संस्थानों या विश्वविद्यालयों के अंतर्राष्ट्रीय प्रोग्रामों के तहत अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं, जहां आपको वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा, कुछ संस्थान छात्रों को पढ़ाई के साथ काम के अवसर प्रदान करते हैं, जिससे वे अपनी शिक्षा और रहने-सहने के खर्च का हिस्सा कम कर सकते हैं।
तो, आइए जानते हैं वे तरीके, जिसके जरिए विदेश में फ्री या बेहद कम खर्च में पढ़ाई की जा सकती है :
1. सस्ते देश का चुनाव
अगर आप कम खर्च में विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं तो सबसे पहले ऐसा देश चुनें जहां रहने-खाने का खर्च कम से कम हो। ऐसे कई देश हैं जो भारतीय छात्रों के लिए बेहद सस्ते हैं, साथ ही जहां पढ़ाई भी फ्री है। जर्मनी, चेक रिपब्लिक, नॉर्वे, आइसलैंड, ब्राजील, लग्जमबर्ग, मैक्सिको जैसे देशों में फ्री में पढ़ाई की जा सकती है।
इन देशों में यूरोपियन यूनियन से बाहर के देशों के छात्रों के लिए भी पढ़ाई फ्री या बेहद सस्ती है। अधिकतर फ्री प्रोग्राम पब्लिक यूनिवर्सिटीज द्वारा ऑफर किए जाते हैं। हालांकि एडमिशन के लिए लैंग्वेज प्रोफिसिएंसी टेस्ट पास करने होते हैं और थोड़ी रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है।
2. स्कॉलरशिप और ग्रांट
विदेश में फ्री या सस्ते में पढ़ाई करने का मन है तो दूसरा तरीका यह है कि फुल स्कॉलरशिप और ग्रांट देने वाली यूनिवर्सिटी का चयन करें। हायर स्टडी के लिए कई यूनिवर्सिटीज फुल स्कॉलरशिप या ग्रांट देती हैं। जिसमें ट्यूशन फीस से लेकर हवाई यात्रा आदि तक के खर्च शामिल होते हैं।
3. एजुकेशन एक्सचेंज प्रोग्राम
भारत की कई यूनिवर्सिटीज ने विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ ओएमयू साइन किया है। जिसके तहत यूनिवर्सिटीज एजुकेशन एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अपने कुछ स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए एक दूसरे के यहां भेजती हैं। एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जाने पर अतिरिक्त फीस नहीं देनी होती।
4. असिस्टेंटशिप
नॉर्डिक देश एमएस (ग्रेजुएट) और पीएचडी स्कॉलर्स को फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए असिस्टेंटशिप प्रोवाइड कराते हैं। इसके तहत पार्ट टाइम टीचिंग या रिसर्च वर्क करना होता है। नॉर्डिक देशों में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड आते हैं।
5. विश्वविद्यालयों के अंतर्राष्ट्रीय प्रोग्राम
विदेश की कई यूनिवर्सिटीज में इंटरनेशनल प्रोग्राम का एक प्रावधान होता है। छात्र विभिन्न अनुसंधान संस्थानों या विश्वविद्यालयों के अंतर्राष्ट्रीय प्रोग्रामों के तहत अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं, जहां आपको वित्तीय सहायता दी जाती है। इस सहायता से या तो आपको पढाई का खर्च ही नहीं आएगा या फिर मामूली खर्च में आप विदेश में पढाई कर पाएंगे।




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