
दशकों से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा शिक्षा गंतव्य रहा है। हार्वर्ड, एमआईटी (MIT) और स्टैनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय दुनियाभर के छात्रों, खासकर भारतीय युवाओं का सपना रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां पहले की तुलना में अधिक सख्त हुई हैं। इसका सीधा असर वहां पढ़ाई कर रहे और करियर बनाने की योजना रखने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर पड़ रहा है।
पहले आमतौर पर छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के तहत काम करते थे, फिर नियोक्ता (Employer) के प्रायोजन पर H-1B वीजा प्राप्त करते थे और बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते थे। लेकिन अब यह रास्ता पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
H-1B वीजा का रास्ता क्यों होता जा रहा है मुश्किल?
अमेरिका में OPT कार्यक्रम को सीमित करने को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी कंपनियों पर स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे माहौल में कई कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से पहले अधिक सतर्क हो गई हैं।
भारतीय छात्रों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि H-1B वीजा पहले से ही लॉटरी प्रणाली के जरिए जारी किया जाता है। ऐसे में नौकरी मिलना, नियोक्ता का वीजा स्पॉन्सर करना और फिर लॉटरी में चयन होना—तीनों पर करियर निर्भर होना बड़ी चुनौती बन गया है।
कई छात्रों को मजबूरी में अपनी पढ़ाई से अलग क्षेत्रों में नौकरी करनी पड़ती है, जबकि कुछ छात्रों को कार्य अनुमति (Work Authorization) समाप्त होने के बाद अमेरिका छोड़ना पड़ता है, जबकि उनका करियर अभी शुरू ही हुआ होता है।
क्यों बढ़ रही है ग्रीन कार्ड की अहमियत?
बदलते हालात में अमेरिका में स्थायी निवास (Permanent Residency) अब केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि कई छात्रों के लिए करियर की जरूरत बनता जा रहा है।
ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति किसी भी कंपनी में बिना वीजा स्पॉन्सरशिप की चिंता के काम कर सकता है। इससे नियोक्ताओं के लिए भी विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना आसान हो जाता है क्योंकि उन्हें अलग से वीजा प्रक्रिया और उससे जुड़ी कानूनी जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ता।
यही वजह है कि बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र अब EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर वीजा की ओर रुख कर रहे हैं।
भारतीयों में तेजी से बढ़ा EB-5 वीजा का रुझान
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों द्वारा दायर EB-5 वीजा आवेदन पिछले एक वर्ष में दोगुने से अधिक हो गए हैं।
वित्त वर्ष 2024 में जहां भारतीयों ने 879 आवेदन किए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,903 पहुंच गई। यह अब तक दर्ज की गई सबसे तेज वार्षिक वृद्धि मानी जा रही है।
क्या है EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम?
EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने का एक वैकल्पिक रास्ता है। इस योजना के तहत आवेदक को अमेरिका में ऐसे व्यवसाय में निर्धारित निवेश करना होता है, जिससे कम से कम 10 पूर्णकालिक (Full-Time) अमेरिकी नौकरियों का सृजन हो।
इस कार्यक्रम के तहत सामान्य न्यूनतम निवेश 10.5 लाख अमेरिकी डॉलर (US$ 1.05 Million) है।
हालांकि यदि निवेश ग्रामीण क्षेत्रों या अधिक बेरोजगारी वाले क्षेत्रों में स्थित स्वीकृत परियोजनाओं में किया जाता है, तो न्यूनतम निवेश राशि 8 लाख अमेरिकी डॉलर (US$ 800,000) हो जाती है। इन श्रेणियों में फिलहाल अन्य इमिग्रेशन मार्गों की तुलना में लंबा बैकलॉग भी कम है।
छात्रों को क्या मिलता है फायदा?
साल 2022 के बाद हुए बदलावों के कारण EB-5 कार्यक्रम छात्रों के लिए पहले से अधिक आकर्षक माना जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण Concurrent Filing की सुविधा है।
इस प्रक्रिया के तहत छात्र EB-5 आवेदन के साथ-साथ रोजगार अनुमति (Employment Authorization) और यात्रा अनुमति (Travel Authorization) के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें ग्रीन कार्ड की अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार किए बिना कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलने लगती हैं।
Employment Authorization Document (EAD) से बढ़ती है आजादी
Concurrent Filing के जरिए छात्रों को Employment Authorization Document (EAD) मिल सकता है।
इस दस्तावेज के बाद छात्र केवल अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते। वे किसी भी सेक्टर में नौकरी कर सकते हैं, इंटर्नशिप ले सकते हैं, नौकरी बदल सकते हैं या अपना स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं।
यानी उन्हें पारंपरिक छात्र वर्क परमिट की तुलना में कहीं अधिक पेशेवर स्वतंत्रता मिलती है।
यात्रा करना भी हो जाता है आसान
EB-5 आवेदन के साथ मिलने वाला Advance Parole दस्तावेज छात्रों को अमेरिका से बाहर आने-जाने की सुविधा भी देता है। इससे हर बार छात्र वीजा के नवीनीकरण (Renewal) की जटिल प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो जाती है।
Regional Center क्या होते हैं?
अधिकांश निवेशक Regional Centers के माध्यम से EB-5 कार्यक्रम में निवेश करते हैं। ये ऐसे संस्थान होते हैं जिन्हें USCIS की मंजूरी प्राप्त होती है और जो कई निवेशकों के निवेश को एक साथ संचालित करते हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं का संचालन करना होता है जो EB-5 कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण शर्त—10 अमेरिकी नौकरियों का सृजन—पूरी कर सकें।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का मानना है कि EB-5 केवल इमिग्रेशन कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निवेश योजना भी है। इसलिए आवेदन करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल (Due Diligence) करना बेहद जरूरी है।
निवेशकों को ऐसे Regional Centers का चयन करना चाहिए जिनका सफल परियोजनाओं, स्वीकृत आवेदनों और निवेशकों को पूंजी लौटाने का विश्वसनीय रिकॉर्ड रहा हो। साथ ही परियोजना, रोजगार सृजन, निवेश की शर्तों और निकासी (Exit Strategy) से जुड़ी जानकारी पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
भारतीय छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण बन रहा है EB-5?
अमेरिका में वीजा नियम लगातार बदल रहे हैं और H-1B वीजा का रास्ता पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो चुका है। ऐसे में कई भारतीय छात्र अपने करियर को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि, EB-5 कार्यक्रम सभी छात्रों के लिए उपयुक्त या व्यावहारिक विकल्प नहीं है, क्योंकि इसमें बड़ी निवेश राशि की आवश्यकता होती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अनुभवी इमिग्रेशन और वित्तीय विशेषज्ञों से सलाह लेना जरूरी है।
फिर भी, जिन परिवारों के लिए यह निवेश संभव है, उनके लिए EB-5 अमेरिका में दीर्घकालिक करियर और स्थायी निवास का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है।




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