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Why New Zealand Is Emerging as a Popular Study Destination for Indian Students: New Policies, Universities and Costs

भारतीय छात्रों के लिए न्यूजीलैंड क्यों बन रहा है पसंदीदा स्टडी डेस्टिनेशन? जानिए नई नीतियां, यूनिवर्सिटी और खर्च

Why New Zealand Is Emerging as a Popular Study Destination for Indian Students: New Policies, Universities and Costs

न्यूजीलैंड ने लंबे समय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा और बेहतर जीवनशैली के लिए अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां की यूनिवर्सिटीज दुनिया की शीर्ष 2 प्रतिशत संस्थानों में शामिल हैं। छात्रों को भरोसा रहता है कि न्यूजीलैंड की डिग्री को दुनिया के दूसरे देशों में भी मान्यता मिलेगी।

2025 International Student Experience Survey के अनुसार, न्यूजीलैंड में पढ़ने वाले 87 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अपने अनुभव को सकारात्मक बताया। छात्रों का यह भरोसा आंकड़ों में भी दिखाई देता है। जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच न्यूजीलैंड में 63,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र पहुंचे, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है।

जहां कई दूसरे देश अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए नियमों को सख्त कर रहे हैं, वहीं न्यूजीलैंड ने अपेक्षाकृत संतुलित और सोच-समझकर कदम उठाए हैं। यही वजह है कि ग्रेजुएशन से लेकर पोस्टग्रेजुएशन तक भारतीय छात्रों के बीच न्यूजीलैंड की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है।

भारत-न्यूजीलैंड समझौते से छात्रों को क्या फायदा होगा?

हाल ही में हुआ भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-New Zealand Free Trade Agreement) छात्रों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित इस समझौते में छात्र मोबिलिटी और पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने के अवसरों से जुड़ा एक विशेष ढांचा शामिल है। यह न्यूजीलैंड का किसी देश के साथ छात्र मोबिलिटी और पोस्ट-स्टडी वर्क के लिए पहला समर्पित ढांचा है।

भारतीय छात्रों के लिए इससे अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत पढ़ाई के दौरान कम से कम 20 घंटे प्रति सप्ताह काम करने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है, भले ही भविष्य में संबंधित नीतियों में बदलाव क्यों न हो। वहीं न्यूजीलैंड की मौजूदा घरेलू नीति के तहत पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्रों को नवंबर 2025 से शैक्षणिक अवधि के दौरान हर सप्ताह 25 घंटे तक काम करने की अनुमति है।

समझौते से पढ़ाई के बाद काम के अवसरों को भी बढ़ावा मिलता है। पात्र छात्र STEM से जुड़े बैचलर और मास्टर प्रोग्राम पूरा करने के बाद तीन साल तक के पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा का लाभ उठा सकते हैं। वहीं PhD पूरी करने वाले छात्रों के लिए यह अवधि चार साल तक हो सकती है।

इसके अलावा, एक नया Temporary Employment Entry रास्ता 5,000 कुशल भारतीय नागरिकों को न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम करने का अवसर देगा। Working Holiday Visa की एक नई श्रेणी के तहत हर साल 1,000 युवा भारतीयों को न्यूजीलैंड में 12 महीने तक रहने और काम करने का अवसर मिल सकेगा।

भारतीय छात्र अब अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा तक सीमित नहीं

भारतीय छात्र अब विदेश में पढ़ाई के लिए केवल अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर नहीं रह रहे हैं। वीजा नियमों में सख्ती, बढ़ती लागत और पढ़ाई के बाद नौकरी मिलने को लेकर अनिश्चितता के कारण छात्र अब पारंपरिक स्टडी डेस्टिनेशन से आगे भी विकल्प तलाश रहे हैं।

न्यूजीलैंड, आयरलैंड और यूरोप के कुछ देश अब भारतीय छात्रों की पसंद में तेजी से शामिल हो रहे हैं।

जून 2025 में एक और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ, जब Immigration New Zealand ने अपनी List of Qualifications Exempt from Assessment का विस्तार करते हुए कई भारतीय डिग्रियों को इसमें शामिल किया। कई मामलों में इससे अलग से NZQA मूल्यांकन कराने की जरूरत कम हो गई है। इससे छात्रों और आवेदकों के समय और खर्च दोनों में कमी आ सकती है।

आगे चलकर न्यूजीलैंड 2026 के अंत से पोस्ट-स्टडी वर्क की पात्रता बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। इसके तहत तय मानदंडों को पूरा करने वाले कुछ Level 7 Graduate Diploma छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित बदलाव है और पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।

इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो छात्रों के पास पढ़ाई के दौरान आर्थिक मदद के लिए अधिक विकल्प, ग्रेजुएशन के बाद काम के स्पष्ट रास्ते और भविष्य की योजना बनाने के लिए अपेक्षाकृत अधिक स्थिर व्यवस्था उपलब्ध हो रही है।

न्यूजीलैंड में लोकप्रिय यूनिवर्सिटी और कोर्स

शैक्षणिक स्तर पर Business Administration, Engineering, IT, Health Sciences और Environmental Sciences जैसे विषयों की मांग लगातार बनी हुई है। इसके अलावा Data Science, Finance, Biotechnology और Tourism में पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम भी छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।

न्यूजीलैंड में कई विश्व स्तर की यूनिवर्सिटीज हैं। University of Auckland लगातार दुनिया की शीर्ष 100 यूनिवर्सिटीज में जगह बनाती रही है। इसके अलावा University of Otago, University of Canterbury और Victoria University of Wellington भी प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं।

इन यूनिवर्सिटीज की पहचान मजबूत रिसर्च, इंडस्ट्री से जुड़े प्रैक्टिकल लर्निंग और अलग-अलग विषयों में उपलब्ध अकादमिक प्रोग्राम के लिए है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए यहां करियर गाइडेंस, अकादमिक सहायता और वेलनेस सेवाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

पढ़ाई के बाद काम के स्पष्ट अवसर

न्यूजीलैंड की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे स्थिर इमिग्रेशन नीतियां, अपेक्षाकृत नियंत्रित जीवन-यापन खर्च और पढ़ाई के बाद काम के स्पष्ट अवसर जैसे कई कारण हैं। वीजा प्रक्रिया भी काफी हद तक अनुमान के मुताबिक रहती है और पोस्ट-स्टडी विकल्प छात्रों को भविष्य की बेहतर योजना बनाने में मदद करते हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे अधिक महंगे स्टडी डेस्टिनेशन की तुलना में न्यूजीलैंड शिक्षा पर होने वाले खर्च और उससे मिलने वाले अवसरों के बीच अपेक्षाकृत बेहतर संतुलन उपलब्ध कराता है। पढ़ाई के दौरान काम करने और डिग्री पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र में अनुभव हासिल करने का अवसर छात्रों के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

न्यूजीलैंड में पढ़ाई और रहने का खर्च कितना है?

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आवास (Accommodation) सबसे बड़ा खर्च होता है। आमतौर पर यह कुल मासिक खर्च का करीब 40 से 55 प्रतिशत तक हो सकता है। इसलिए न्यूजीलैंड में पढ़ाई की योजना बनाने वाले छात्रों के लिए पहले से बजट तैयार करना जरूरी है।

Auckland और Wellington जैसे बड़े शहरों में छात्रों का मासिक जीवन-यापन खर्च आमतौर पर NZ$1,600 से NZ$2,400 के बीच रहता है। Christchurch में यह खर्च लगभग NZ$1,380 से NZ$1,960 तक हो सकता है। वहीं अपेक्षाकृत किफायती शहरों Hamilton और Dunedin में मासिक खर्च करीब NZ$1,320 से NZ$1,900 के बीच बताया गया है।

बड़े शहरों में किराया और आवास महंगा हो सकता है, लेकिन सही योजना और बजट प्रबंधन के साथ कुल खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम का विकल्प भी छात्रों के आर्थिक बोझ को कम करने में मदद कर सकता है।

कुल मिलाकर, न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अपेक्षाकृत स्थिर नीतियों और पढ़ाई के बाद काम के व्यावहारिक अवसरों का संतुलित विकल्प बनकर उभर रहा है। पढ़ाई के बाद काम करने और भविष्य में देश में आगे बढ़ने के स्पष्ट रास्तों के कारण आने वाले समय में न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों के बीच और लोकप्रिय हो सकता है।

 

 

Asmita Sarkar

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