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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बड़े बदलाव की तैयारी, अवधि और आयु सीमा घटाने पर विचार

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बड़े बदलाव की तैयारी, अवधि और आयु सीमा घटाने पर विचार

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बड़े बदलाव की तैयारी, अवधि और आयु सीमा घटाने पर विचार

देश के युवाओं को कॉरपोरेट दुनिया से जोड़ने और उद्योगों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में अब बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार चाहती है कि यह स्कीम अधिक आकर्षक, व्यवहारिक और युवाओं की जरूरतों के अनुकूल बने। इसी वजह से इसकी अवधि और पात्रता आयु में कटौती जैसे प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

कम भागीदारी ने बढ़ाई चिंता

स्कीम के दो पायलट चरणों की समीक्षा में यह सामने आया कि युवाओं की भागीदारी अपेक्षित नहीं रही। आंकड़ों के अनुसार, जारी किए गए कुल ऑफर्स में से सिर्फ 33% युवाओं ने ऑफर स्वीकार किए। इंटर्नशिप जॉइन करने वालों की संख्या केवल 6% तक सिमट गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्टाइपेंड, लंबी अवधि, स्थान को लेकर असुविधा और करियर संभावनाओं पर स्पष्टता की कमी ने युवाओं की रुचि कम की। इन चुनौतियों के आधार पर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने प्रस्तावित सुधारों का विवरण व्यय वित्त समिति को भेज दिया है।

स्कीम की मौजूदा व्यवस्था

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को 12 महीने तक ट्रेनिंग मिलती है। यह ट्रेनिंग देश की टॉप-500 कंपनियों में कराई जाती है। इसके लिए 21 से 24 वर्ष के युवा पात्र हैं। चयनित प्रतिभागियों को ₹5,000 मासिक स्टाइपेंड और ₹6,000 एकमुश्त सहायता मिलती है। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाते हैं।सरकार अब नए ढांचे को दोबारा पायलट चरण में लगभग 1 लाख प्रशिक्षुओं के साथ परखने की योजना बना रही है।

राज्यों और कंपनियों की बढ़ती भागीदारी

पहले पायलट चरण में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा था, जबकि दूसरे चरण में आंध्र प्रदेश ने शीर्ष स्थान हासिल किया। स्कीम में देश की कई बड़ी कंपनियां शामिल हुईं, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने हजारों युवाओं को ट्रेनिंग के अवसर दिए।

बजट में बदलाव और आगे की रणनीति

वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹10,800 करोड़ का प्रावधान किया गया था, लेकिन कम भागीदारी के कारण बजट का बड़ा हिस्सा उपयोग नहीं हो पाया।

अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे घटाकर ₹4,788 करोड़ कर दिया गया है।

सरकार नए प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने पेश करेगी, ताकि संशोधित योजना को बेहतर रूप में लागू किया जा सके।

Asmita Sarkar

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