गुजरात की पारुल यूनिवर्सिटी में 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक चौथे पीयू अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव (PU International Folklore Festival 2026) का आयोजन किया जाएगा। यूनिवर्सिटी का परफॉर्मिंग आर्ट्स संकाय इस महोत्सव की मेजबानी करेगा। इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों के लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक कलाओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाना है। इसमें पारंपरिक प्रस्तुतियों, रंग-बिरंगी वेशभूषा और पीढ़ियों से चली आ रही लोक कथाओं के माध्यम से दुनिया की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया जाएगा।
पांच दिनों तक लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
महोत्सव में विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले लोक नृत्य, संगीत और अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके जरिए दर्शकों को दुनिया की अलग-अलग लोक कलाओं को करीब से जानने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।
लोक संगीत की जीवंत धुनों, पारंपरिक परिधानों और कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से यह आयोजन विभिन्न संस्कृतियों को एक साझा मंच पर लाएगा। इसका उद्देश्य कला के जरिए सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाना और अलग-अलग समुदायों की परंपराओं के प्रति लोगों की समझ बढ़ाना है।
पारुल यूनिवर्सिटी में चौथी बार होगा अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव
पीयू अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव का चौथा संस्करण कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की यूनिवर्सिटी की पहल का हिस्सा है। इस आयोजन को पारुल यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल अलायंस फॉर आर्ट एंड कल्चर तथा इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ फोक आर्ट के भारतीय अनुभाग के सहयोग से आयोजित कर रही है।
इस महोत्सव के जरिए विभिन्न देशों और समुदायों की लोक कलाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे दर्शकों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक विरासत, संगीत और कलात्मक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
पीयू अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव 2026 में लोक कथाओं, संगीत और नृत्य के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों की विशिष्ट पहचान को सामने लाया जाएगा। साथ ही, यह आयोजन उन साझा मानवीय अनुभवों को भी उजागर करेगा, जो भाषा और परंपराओं में अंतर होने के बावजूद दुनिया भर के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं।




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