पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में चौथे अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में विभिन्न देशों और क्षेत्रों से आए कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य संगीत, नृत्य, परंपराओं और लोक कलाओं के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाना था।
महोत्सव में शामिल प्रतिभागियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों, संगीत और कला के जरिए अपनी-अपनी संस्कृति की झलक दिखाई। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं, लोक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने का मौका मिला।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और विभिन्न समुदायों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने में लोक कला की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। कलाकारों और प्रतिभागियों ने संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव प्रदर्शित किया। साथ ही, अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच आपसी संवाद और मेलजोल को भी बढ़ावा मिला।
चौथा पीयू अंतरराष्ट्रीय लोक कला महोत्सव छात्रों के लिए भी खास रहा। इसके जरिए उन्हें अपने समुदाय से अलग अन्य संस्कृतियों, परंपराओं और लोक कलाओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
इस महोत्सव ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान लोगों को भौगोलिक दूरियों और भाषा की सीमाओं से परे एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोक संगीत और नृत्य अभिव्यक्ति के ऐसे माध्यम हैं, जिन्हें समझने के लिए किसी भाषा की सीमा जरूरी नहीं होती।




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